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स्पीच थेरेपी व श्रवण प्रशिक्षण से समाज की मुख्य धारा से जुड़ सकते हैं मूकबधिर व दृष्टिबाधित बच्चेः शिवाकान्त

मूकबधिर प्रशिक्षक ने बताया- 10 माह के ‘एक्सीरेटेड कैम्प’ में 60 ऐसे बच्चों को किया जा रहा है प्रशिक्षित

जौनपुर। सामान्य बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रशिक्षित करना तो आसान बात है लेकिन मूकबधिर एवं दृष्टिबाधित बच्चों को प्रशिक्षित करना दुर्लभ है लेकिन आधुनिक पद्धति के बल पर ऐसे बच्चों को सामान्य की तरह प्रशिक्षण देने का काम समेकित शिक्षा द्वारा किया जा रहा है। यह शिक्षा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) परिसर में चल रहा है जहां इस समय 10 माह का ‘एक्सीरेटेड कैम्प’ चल रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार उक्त कैम्प में 36 मूकबधिर व 24 दृष्टिबाधित बच्चों को शिक्षा प्रशिक्षण देने का भागीरथ प्रयास किया जा रहा है। अपनी कर्तव्यनिष्ठता के बल पर तमाम ऐसे बच्चों को सामान्य की तरह बनाने वाले योग्य प्रशिक्षक शिवाकांत तिवारी ने पत्र-प्रतिनिधि को बताया कि ऐसे बच्चे की पहचान कम उम्र में कर लेने से बच्चों को पुनर्वास करने का समय पर्याप्त रूप में मिल जाता है। इन बच्चों को स्पीच थेरेपी एवं श्रवण प्रशिक्षण द्वारा प्रशिक्षित करके समाज के मुख्य धारा से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने बताया कि हमारे द्वारा दिये गये स्पीच थेरेपी से बहुत से बच्चे सामान्य बच्चों की भांति सुनने व बोलने में सामर्थ्य हुये हैं। उनके द्वारा जनपद जौनपुर में पिछले 10 वर्षों से ऐसे बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रशिक्षित करने का काम किया जा रहा है।

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