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मतदान के आखिरी दिन भी प्रत्याशी मतदाताओं के आगे जोड़ रहे हाथ

अजमी रिज़वी 

बाराबंकी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में उम्मीदवारों की बाजी रातों रात पलट सकती है। मतदाताओं को रिझाने का क्रम तथाकथित उम्मीदवारों के द्वारा जारी है। मतदान के दिन किसका हो पलड़ा भारी कहा नही जा सकता है। ग्राम पंचायत चुनाव के दृष्टिगत चुनाव के पूर्व संध्या की रात्रि काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। क्योंकि इस रात्रि में जो उम्मीदवार सो गये समझों उनका भाग्य सो गया। नामांकन के पश्चात् मतदाता जिन उम्मीदवारों की कदम ताल करने से नही थकते थे। आज की रात्रि में जिन स्थानों पर लक्ष्मी देवी की यदि असीम अनुकम्पा हो गयी तो वे दूसरे के पाले में जा सकते हैं। इन्हे कोई नही रोक पायेगा। क्योंकि चुनाव बाई चांस होता है। जिसका चांस बन गया समझो उसकी बल्ले-बल्ले हो गयी। जिसका चांस बिगड़ गया उसके लिए सिर धुनने के शिवा कोई दूसरा चारा नही बचेगा। क्योंकि जब-जब चुनाव की यह रात्रि होती है। मतदाताओं को रिझाने के लिए उम्मीदवारों के द्वारा तरह-तरह के हत्थकण्ड़े अपनाये जाते हैं। कहीं तो मतदाताओं पर धन लक्ष्मी की असीम अनुकम्पा बरसती है। तो कहीं पर लक्ष्मी देवी के साथ ही साथ अंगूर की बेटी का जलवा भी गालिब होता है। ऐसा अक्सर बाहुबली ऐश्वर्यवान प्रत्याशी करते दिखायी देते हैं। इसके विपरीत जो सम्पन्न घराने के प्रत्याशी नही होते हैं। वे अपने भाग्य को कोसते हुए नजर आते हैं। फिजाओं में छनकर खबर आयी है कि महिला मतदाताओं को रिझाने के लिए कहीं-कहीं पर साड़ियां, गिफ्ट पैक के साथ ही साथ धनलक्ष्मी की सौगात भी पड़ोसी गयी है। जिसकी जोरों के साथ चर्चाऐं हुुई तो वही विपन्न उम्मीदवार मुह ताकते ही रह गये। नाम छापने की शर्त पर एक उम्मीदवार ने बताया कि भैय्या अब चुनाव आम प्रत्याशियों का नही रह गया है। जिनके पास अकूत सम्पति ऐश्वर्य होता है। मतदाता उसी की बल्ले-बल्ले करते हैं। जो सम्पन्न नही होता है। ऐसे प्रत्याशियों को मतदाता घास नही डालते हैं। चुनाव जीतने के बाद उम्मीदवार अपना एक-एक पैसा मय ब्याज के साथ भरपाई किये जाने की मुहिम छेड देते है। अलबत्ता गांव का विकास नही हो पाता है। इसके सम्बन्ध में कांग्रेस जिला महासचिव डा. उदय प्रताप सिंह बताते हैं कि मत देना आपका संवैधानिक अधिकार है। आपके मत से ही गांव का भविष्य बनता बिगड़ता है। इसलिए 1 दिसम्बर को होने वाले निर्णायक युद्ध में आप सभी की भागीदारी विकास की एक नई इबारत लिख देगा आप किसी दबाव प्रलोभन में आयें। क्योंकि आपका मत बहुमूल्य है। मत देना आपका संवैधानिक अधिकार है।

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