प्रतिद्वन्दियों को पराजित करने में दिग्गजों ने कसी कमर, मुकाबला होगा दिलचस्प
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के महासमर में बाहुबली
अपने लाव लश्कर के साथ आमने-सामने पहुंच चुके हैं। अपने प्रतिद्वन्दियों
को पराजित करने के लिए वे सभी प्रकार से अपने निशान को हाथ में लिए हुए
एक दूसरे को अपने पक्ष में करने के लिए गठजोड़ करने में मशगूल दिखायी दे
रहे हैं।
चुनावी महासमर में बाहुबलियों की सेनायें मोर्चा लेने के लिए आमने-सामने
खड़ी हुई हैं। वे प्रत्याशियों के एक-एक मत को जुटाने के लिए कड़ी मशक्कत
कर रहे हैं। सुबह से लेकर देर रात तक प्रत्याशियों की गांवों में धमा
चौकड़ी मची रहती है। जहां पर आचार संहिता की खुले आम धज्जियां उड़ाते हुए
सैकड़ों साथियों के साथ प्रत्याशियों की जीत के सम्बन्ध में नारे लगाते
हुए जगह-जगह पर चाय, जलपान व अन्य खाद्य पदार्थों को दिये जाने के
अतिरिक्त खुले आम शराब की शीशियां वितरित किये जाने की खबरें फिजाओं में
आने की चर्चायें जोरों के साथ चल रही हैं। लोगों के द्वारा यह कहते हुए
सुना जा रहा है कि भैय्या चुनाव तो बाहुबलियों का हैं जिनके पास अकूत
दौलत का भण्ड़ार है इसके अतिरिक्त जिनके पास धन लक्ष्मी का अभाव है। ऐसे
प्रत्याशियों को मतदाता भी घास नही ड़ाल रहे हैं। क्योंकि वे जानते हैं।
कि यह समय बार-बार नही आता है। यह समय पांच वर्षो के बाद आया है। तो
बल्ले-बल्ले कर लो। बाद में देखा जायेगा क्योंकि चुनाव जीतने के बाद किसी
को कोई पूंछता नही है। सभी गांव का विकास कम बल्कि अपनी तिजोरियां भरने
में ज्यादा ध्यान देते हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक मतदाता ने बताया
कि वे तिजोरियां ंक्यों न भरें क्योंकि ग्राम पंचायत का चुनाव बहुत ही
अहम होता है चुनाव में भारी भरकम धनराशि खर्च करने के बाद वे अपना एक
पैसा मय ब्याज के लिए इकट्ठा करने लगते हैं।
यही कारण है कि गांव का आशा
के अनुरूप विकास नही हो पाता है। बल्कि पांच वर्ष के कार्यकाल में वे
अपने विकास के इबारत की रेखा खींचने में अवश्य सफल हो जाते हैं। और जब वे
सफल हो जाते हैं तो पांच वर्ष के लिए प्रधानी उनकी विरासत बन जाती है। जो
मतदाता आज प्रत्याशियों के पिछलग्गू बने हुए है और प्रत्याशी को अपना परम
हितैषी मान कर वोट करते है चुनाव जिताने के बाद वही मतदाता अपने आप को
ठगा हुआ महसूस करते है वही जो प्रत्याशी दु;ख सुख में साथ देने का वादा
करने से नही थकते वे अब गिरगिट की तरह रंग बदलते हुए दिखायी दे रहे है।
मतदाताओं को जब अपनी भूल का एहसास होता है। तो समय उनके हाथो से बहुत दूर
निकल जाता है। और अलबत्ता वे अपना मन मसोस कर रह जाते है। और वे आने वाली
पंचवर्षीय का इन्तजार पुनः करने लगते है कि आने वाले समय में पुनः अमुख
प्रत्याशी को सबक सिसाया जायेगा यही पुनरावृत्ति चलती रहती है और मतदाता
बार-बार ठगे जाते हैं। समय चक्र चलता रहता है।
कुशल नेतृत्व व दूरदर्शी
कस्बा बदोसरायं निवासी मों0 शकील ने बताया कि गांव का मुखिया कुशल
नेतृत्व करने वाला व दूरदर्शी होना चाहिये जिससमंे एक कुशल नेता के सभी
गुण विद्यमान हों उसे आगे आने वाले परिणामों का भी थोड़ा बहुत ज्ञान हो कि
उसके द्वारा उठाया गये कदमों से गांव के मतदाताओं पर उसका क्या प्रभान
पड़ेगा इससे लोगों को क्या लाभ मिलेगा। क्या हानि उठानी पडेगी उसे अपना
भला नही बल्कि जिन लोगों ने उन्हे यह कुर्सी सौंपी है। उनके हितों को
ध्यान में रखकर ही कदम उठाना चाहियें।
बात का धनी
ग्राम दरिगापुर निवासी मुन्ना कनौजिया ने बताया कि गांव का मुखिया मजबूत
इरादे वाला व बात का धनी होना चाहिये उसकी कथनी व करनी में कोई फर्क नही
होना चाहिये ऐसा नही वह कहता कुछ हो और करता कुछ हो ऐसे धोखेबाज लोगों से
उसे सावधान रहना चाहिये। क्योंकि ऐसे लोग किसी के नही होते हैं।
शिक्षित एवं चरित्र वान
युवा मतदाता ग्राम टिकुरी निवासी इन्द्रसेन रावत ने बताया कि गांव का
मुखिया शिक्षित एवं चरित्रवान होना चाहिये जिसकी गांव में प्रतिष्ठा हो
समाज के लोग उसकी इज्जत करते हों किसी अंगूठा टेक को अपना मुखिया न
चुनें। जो किसी की बैशाखी बने क्योंकि उसी पर ही गांव का भविष्य निर्भर
करता है।
डमी प्रत्याशियों से सावधान
युवा मतदाता धर्मेन्द्र कुमार यादव ने बताया कि युवा मतदाताओं को डमी
प्रत्याशियों से होशियार रहना चाहिये क्योंकि न तो ये चुनाव जीतेंगें और
न तो दूसरे को जीतने देंगें अर्थात अपने आकाओं के इशारे पर वह वोट कटवा
की भूमिका अदा करेंगें। यदि जीत भी जायेंगें तो मामला 50-50 हो जायेगा।
जुआरी व शराबी लोगों से सावधान
कस्बा बदोसरायं निवासी चन्दन रावत ने बताया कि मतदाताओं को जुआरी व
शराबी लोगों से होशियार रहना चाहिये किसी दागी छवि वाले शराबी व जुआरी
उम्मीदवार को अपना मुखिया किसी हालात में न चुनें क्योंकि गांव का भविष्य
उसी पर निर्भर करेगा। यदि वह जुआरी और शराबी होगा तो गांव विकास के मामले
में बहुत पीछे छूट जायेगा।
गांव का भविष्य आप पर निर्भर
मनमोहन रावत ने बताया कि आप का मत बहुमूल्य है। आपके मत पर ही गांव व
देश का भविष्य निर्भर करता है। इसलिए ऐसे लोगों को वोट न करें जिन लोगों
की समाज में प्रतिष्ठा न हो बल्कि वे किसी के इशारे पर चुनाव लड़ रहे हों
जो जीतने के बाद किसी दूसरे हाथ की कठपुतली बन कर रह जायें बल्कि ऐसे
लोगों को मुखिया चुनना है। जो गांव का सर्वांगीण विकास करते हुए जाति
पांति की भावना से परे हो आप किसी प्रकार के दबाव व प्रलोभन में न आयें
क्योंकि आपका मत बहुमूल्य है।
बाराबंकी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के महासमर में बाहुबली
अपने लाव लश्कर के साथ आमने-सामने पहुंच चुके हैं। अपने प्रतिद्वन्दियों
को पराजित करने के लिए वे सभी प्रकार से अपने निशान को हाथ में लिए हुए
एक दूसरे को अपने पक्ष में करने के लिए गठजोड़ करने में मशगूल दिखायी दे
रहे हैं।
चुनावी महासमर में बाहुबलियों की सेनायें मोर्चा लेने के लिए आमने-सामने
खड़ी हुई हैं। वे प्रत्याशियों के एक-एक मत को जुटाने के लिए कड़ी मशक्कत
कर रहे हैं। सुबह से लेकर देर रात तक प्रत्याशियों की गांवों में धमा
चौकड़ी मची रहती है। जहां पर आचार संहिता की खुले आम धज्जियां उड़ाते हुए
सैकड़ों साथियों के साथ प्रत्याशियों की जीत के सम्बन्ध में नारे लगाते
हुए जगह-जगह पर चाय, जलपान व अन्य खाद्य पदार्थों को दिये जाने के
अतिरिक्त खुले आम शराब की शीशियां वितरित किये जाने की खबरें फिजाओं में
आने की चर्चायें जोरों के साथ चल रही हैं। लोगों के द्वारा यह कहते हुए
सुना जा रहा है कि भैय्या चुनाव तो बाहुबलियों का हैं जिनके पास अकूत
दौलत का भण्ड़ार है इसके अतिरिक्त जिनके पास धन लक्ष्मी का अभाव है। ऐसे
प्रत्याशियों को मतदाता भी घास नही ड़ाल रहे हैं। क्योंकि वे जानते हैं।
कि यह समय बार-बार नही आता है। यह समय पांच वर्षो के बाद आया है। तो
बल्ले-बल्ले कर लो। बाद में देखा जायेगा क्योंकि चुनाव जीतने के बाद किसी
को कोई पूंछता नही है। सभी गांव का विकास कम बल्कि अपनी तिजोरियां भरने
में ज्यादा ध्यान देते हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक मतदाता ने बताया
कि वे तिजोरियां ंक्यों न भरें क्योंकि ग्राम पंचायत का चुनाव बहुत ही
अहम होता है चुनाव में भारी भरकम धनराशि खर्च करने के बाद वे अपना एक
पैसा मय ब्याज के लिए इकट्ठा करने लगते हैं।
यही कारण है कि गांव का आशा
के अनुरूप विकास नही हो पाता है। बल्कि पांच वर्ष के कार्यकाल में वे
अपने विकास के इबारत की रेखा खींचने में अवश्य सफल हो जाते हैं। और जब वे
सफल हो जाते हैं तो पांच वर्ष के लिए प्रधानी उनकी विरासत बन जाती है। जो
मतदाता आज प्रत्याशियों के पिछलग्गू बने हुए है और प्रत्याशी को अपना परम
हितैषी मान कर वोट करते है चुनाव जिताने के बाद वही मतदाता अपने आप को
ठगा हुआ महसूस करते है वही जो प्रत्याशी दु;ख सुख में साथ देने का वादा
करने से नही थकते वे अब गिरगिट की तरह रंग बदलते हुए दिखायी दे रहे है।
मतदाताओं को जब अपनी भूल का एहसास होता है। तो समय उनके हाथो से बहुत दूर
निकल जाता है। और अलबत्ता वे अपना मन मसोस कर रह जाते है। और वे आने वाली
पंचवर्षीय का इन्तजार पुनः करने लगते है कि आने वाले समय में पुनः अमुख
प्रत्याशी को सबक सिसाया जायेगा यही पुनरावृत्ति चलती रहती है और मतदाता
बार-बार ठगे जाते हैं। समय चक्र चलता रहता है।
कुशल नेतृत्व व दूरदर्शी
कस्बा बदोसरायं निवासी मों0 शकील ने बताया कि गांव का मुखिया कुशल
नेतृत्व करने वाला व दूरदर्शी होना चाहिये जिससमंे एक कुशल नेता के सभी
गुण विद्यमान हों उसे आगे आने वाले परिणामों का भी थोड़ा बहुत ज्ञान हो कि
उसके द्वारा उठाया गये कदमों से गांव के मतदाताओं पर उसका क्या प्रभान
पड़ेगा इससे लोगों को क्या लाभ मिलेगा। क्या हानि उठानी पडेगी उसे अपना
भला नही बल्कि जिन लोगों ने उन्हे यह कुर्सी सौंपी है। उनके हितों को
ध्यान में रखकर ही कदम उठाना चाहियें।
बात का धनी
ग्राम दरिगापुर निवासी मुन्ना कनौजिया ने बताया कि गांव का मुखिया मजबूत
इरादे वाला व बात का धनी होना चाहिये उसकी कथनी व करनी में कोई फर्क नही
होना चाहिये ऐसा नही वह कहता कुछ हो और करता कुछ हो ऐसे धोखेबाज लोगों से
उसे सावधान रहना चाहिये। क्योंकि ऐसे लोग किसी के नही होते हैं।
शिक्षित एवं चरित्र वान
युवा मतदाता ग्राम टिकुरी निवासी इन्द्रसेन रावत ने बताया कि गांव का
मुखिया शिक्षित एवं चरित्रवान होना चाहिये जिसकी गांव में प्रतिष्ठा हो
समाज के लोग उसकी इज्जत करते हों किसी अंगूठा टेक को अपना मुखिया न
चुनें। जो किसी की बैशाखी बने क्योंकि उसी पर ही गांव का भविष्य निर्भर
करता है।
डमी प्रत्याशियों से सावधान
युवा मतदाता धर्मेन्द्र कुमार यादव ने बताया कि युवा मतदाताओं को डमी
प्रत्याशियों से होशियार रहना चाहिये क्योंकि न तो ये चुनाव जीतेंगें और
न तो दूसरे को जीतने देंगें अर्थात अपने आकाओं के इशारे पर वह वोट कटवा
की भूमिका अदा करेंगें। यदि जीत भी जायेंगें तो मामला 50-50 हो जायेगा।
जुआरी व शराबी लोगों से सावधान
कस्बा बदोसरायं निवासी चन्दन रावत ने बताया कि मतदाताओं को जुआरी व
शराबी लोगों से होशियार रहना चाहिये किसी दागी छवि वाले शराबी व जुआरी
उम्मीदवार को अपना मुखिया किसी हालात में न चुनें क्योंकि गांव का भविष्य
उसी पर निर्भर करेगा। यदि वह जुआरी और शराबी होगा तो गांव विकास के मामले
में बहुत पीछे छूट जायेगा।
गांव का भविष्य आप पर निर्भरमनमोहन रावत ने बताया कि आप का मत बहुमूल्य है। आपके मत पर ही गांव व
देश का भविष्य निर्भर करता है। इसलिए ऐसे लोगों को वोट न करें जिन लोगों
की समाज में प्रतिष्ठा न हो बल्कि वे किसी के इशारे पर चुनाव लड़ रहे हों
जो जीतने के बाद किसी दूसरे हाथ की कठपुतली बन कर रह जायें बल्कि ऐसे
लोगों को मुखिया चुनना है। जो गांव का सर्वांगीण विकास करते हुए जाति
पांति की भावना से परे हो आप किसी प्रकार के दबाव व प्रलोभन में न आयें
क्योंकि आपका मत बहुमूल्य है।


