मजलिस : हर इंसान को मौत का मजा चखना होता है: मौलाना रजा
https://husainijnp.blogspot.com/2015/11/blog-post_844.html
अजमी रिज़वी
बाराबंकी। हर दिल अजीज सिविल लाइन कर्बला में नौचंदी की मजलिस को शुरु
करने वाले मरहूम आरिफ रजा मजलिसी की पंजूम मजलिस को मस्जिद इमामियां में
मौलाना मोहम्मद रजा जैदपुरी ने खिताब करते हुये कहा कि हर शै को मौत का
मजा चखना होगा चाहे वो कोई भी हो। अल्लाह की बारगाह में हाजिरी देनी ही
होगी। मौलाना ने आगे कहा कि मरहूम आरिफ मजलिसी ने कर्बला में कई कामों
में खिदमात को अंजाम दिया है। इसके अलावा मौलाना ने कहा कि मोहर्रम की
हकीकत पर नजर डाले तो पता चलता है कि पैगाम-ए- मोहर्रम सारी इंसानियत के
लिये है। इस पैगाम को किसी खास कौम/मकतबे फिक्र से मुकम्मल तौर से जोड़
देना नइंसाफी होगी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि हर कौम अपने आपको मोहर्रम
और इमाम हुसैन से मुकम्मल तौर से जोड़े रखना चाहती है। उन्होने आगे कहा कि
इमाम हुसैन ने तो हर फिक्र और मजहब के लोगों को अपने पैगाम की तरफ दावत
दी। चाहे वह इसाई जॉन हो या तीसरे खलीफा के मानने वाले जुहैब या खुद
यजीदी फौज के सिपेहसलारहुर हो पैगामे हुसैन सभी के लिये एक खुले दरवाजे
के मांनिद है। फिर हम क्यों इस पैगाम के दरवाजे को बंद करने पर फक्र
महसूस करते हैं। जबकि इमाम हुसैन ने पूरी इंसानियत को बचाने के लिये
कर्बला के मैदान में आये थे। मौलाना ने कर्बला के शहीदे आजम, इमाम हुसैन
की शहादत बयान किये। जिसे सुनकर अजादार रो पड़े। मजलिस में आये हुये सभी
मोमीनों का आमिर रजा ने शुक्रिया अदा किया।
बाराबंकी। हर दिल अजीज सिविल लाइन कर्बला में नौचंदी की मजलिस को शुरु
करने वाले मरहूम आरिफ रजा मजलिसी की पंजूम मजलिस को मस्जिद इमामियां में
मौलाना मोहम्मद रजा जैदपुरी ने खिताब करते हुये कहा कि हर शै को मौत का
मजा चखना होगा चाहे वो कोई भी हो। अल्लाह की बारगाह में हाजिरी देनी ही
होगी। मौलाना ने आगे कहा कि मरहूम आरिफ मजलिसी ने कर्बला में कई कामों
में खिदमात को अंजाम दिया है। इसके अलावा मौलाना ने कहा कि मोहर्रम की
हकीकत पर नजर डाले तो पता चलता है कि पैगाम-ए- मोहर्रम सारी इंसानियत के
लिये है। इस पैगाम को किसी खास कौम/मकतबे फिक्र से मुकम्मल तौर से जोड़
देना नइंसाफी होगी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि हर कौम अपने आपको मोहर्रम
और इमाम हुसैन से मुकम्मल तौर से जोड़े रखना चाहती है। उन्होने आगे कहा कि
इमाम हुसैन ने तो हर फिक्र और मजहब के लोगों को अपने पैगाम की तरफ दावत
दी। चाहे वह इसाई जॉन हो या तीसरे खलीफा के मानने वाले जुहैब या खुद
यजीदी फौज के सिपेहसलारहुर हो पैगामे हुसैन सभी के लिये एक खुले दरवाजे
के मांनिद है। फिर हम क्यों इस पैगाम के दरवाजे को बंद करने पर फक्र
महसूस करते हैं। जबकि इमाम हुसैन ने पूरी इंसानियत को बचाने के लिये
कर्बला के मैदान में आये थे। मौलाना ने कर्बला के शहीदे आजम, इमाम हुसैन
की शहादत बयान किये। जिसे सुनकर अजादार रो पड़े। मजलिस में आये हुये सभी
मोमीनों का आमिर रजा ने शुक्रिया अदा किया।

