शहीदाने कर्बला की याद में निकला बनी हाशिम का यादगार ताबूत
https://husainijnp.blogspot.com/2015/12/12-18-18.html
अजमी रिज़वी
बाराबंकी। ग़म में डूबे अज़ादार, आँखों में आंसू लिए हज़ारों की संख्या में छतों पर बैठी फफक फफक कर रोती महिलाएं। मौका था शहर से 12 किमी दूर स्थित ग्राम सराय इस्माईल में शहीदाने कर्बला की याद में निकले 18 बनी हाशिम के ताबूत के जुलूस का। अंजुमन रौनके अजा तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम में हज़ारों लोगों ने शिरकत की। सबसे पहली मजलिस देश के नामी गिरामी मौलाना सैय्यद अली रिज़वान जैदपुरी ने मजलिस को खि़ताब किया। मौलाना अली रिज़वान ने कहा हक़ का साथ देना, उस पर बरक़रार रहना, खिलाफ लड़ना , इंसानियत और सच्चाई बचाने के लिए छः महीने के बच्चे से लेकर 18 साल के कड़ियल जवान को क़ुर्बान कर देना ही कर्बला का पैग़ाम है। आज इंसानियत को पामाल करने वाले क़त्लेआम करने वाले यह यज़ीद को मानने वाले हैं, आतंकवादी हैं. हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) को मानने वाला ही मुसलमान है और वो कभी क़त्लेआम ना सकता है ना दहशतगर्दी। अंत में मसायब पढ़ते हुए कहा कि चेहल्लुम के मौके पर 18 बनी हाशिम के ताबूत से हम ये जज़्बा लेकर उठे कि ज़ुल्म और ज़ालिम के खिलाफ लड़ेंगे, हक़ बोलेंगे। आतंकवादी मानसिकता को समाज से ख़त्म करने के लिए जंग करेंगे भले हमें इसके लिए क़ुर्बान होना पड़े। मजलिस के बाद ,अलम व ज़ुलजनाह का जुलूस निकला जो पूरे गाँव में ग़श्त किया। बाद में मस्जिद से 18 बनी हाशिम का ताबूत निकला जिसकी ज़ियारत कर महिलाएं व पुरुष फफक फफक कर रो पड़े। जलालपुर, सुल्तानपुर, से आयी अंजुमनो ने नोहाख्वानी व सीनाजनी किया। इसके बाद देर रात तक जंजीर व कमा का मातम चलता रहा। जुलूस समाप्ति के बाद अहमद हसन मौलाना इब्ने अब्बास, मक़ासिद हुसैन रिज़वी ने सभी का शुक्रिया अदा किया।
बाराबंकी। ग़म में डूबे अज़ादार, आँखों में आंसू लिए हज़ारों की संख्या में छतों पर बैठी फफक फफक कर रोती महिलाएं। मौका था शहर से 12 किमी दूर स्थित ग्राम सराय इस्माईल में शहीदाने कर्बला की याद में निकले 18 बनी हाशिम के ताबूत के जुलूस का। अंजुमन रौनके अजा तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम में हज़ारों लोगों ने शिरकत की। सबसे पहली मजलिस देश के नामी गिरामी मौलाना सैय्यद अली रिज़वान जैदपुरी ने मजलिस को खि़ताब किया। मौलाना अली रिज़वान ने कहा हक़ का साथ देना, उस पर बरक़रार रहना, खिलाफ लड़ना , इंसानियत और सच्चाई बचाने के लिए छः महीने के बच्चे से लेकर 18 साल के कड़ियल जवान को क़ुर्बान कर देना ही कर्बला का पैग़ाम है। आज इंसानियत को पामाल करने वाले क़त्लेआम करने वाले यह यज़ीद को मानने वाले हैं, आतंकवादी हैं. हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) को मानने वाला ही मुसलमान है और वो कभी क़त्लेआम ना सकता है ना दहशतगर्दी। अंत में मसायब पढ़ते हुए कहा कि चेहल्लुम के मौके पर 18 बनी हाशिम के ताबूत से हम ये जज़्बा लेकर उठे कि ज़ुल्म और ज़ालिम के खिलाफ लड़ेंगे, हक़ बोलेंगे। आतंकवादी मानसिकता को समाज से ख़त्म करने के लिए जंग करेंगे भले हमें इसके लिए क़ुर्बान होना पड़े। मजलिस के बाद ,अलम व ज़ुलजनाह का जुलूस निकला जो पूरे गाँव में ग़श्त किया। बाद में मस्जिद से 18 बनी हाशिम का ताबूत निकला जिसकी ज़ियारत कर महिलाएं व पुरुष फफक फफक कर रो पड़े। जलालपुर, सुल्तानपुर, से आयी अंजुमनो ने नोहाख्वानी व सीनाजनी किया। इसके बाद देर रात तक जंजीर व कमा का मातम चलता रहा। जुलूस समाप्ति के बाद अहमद हसन मौलाना इब्ने अब्बास, मक़ासिद हुसैन रिज़वी ने सभी का शुक्रिया अदा किया।
