मजलिस बनी हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल
https://husainijnp.blogspot.com/2015/12/blog-post_241.html
अजमी रिज़वी
बाराबंकी। हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे और कौमी एकता की मिसाल बनी कर्बला सिविल लाइन जहां गांधी जयन्ती समारोह ट्रस्ट के अध्यक्ष राजनाथ शर्मा ने अपने अजीज दोस्त समाजवादी चिंतक एवं शिया प्वाइंट के संस्थापक स्व. आले पन्जेतन जैदी (एपी जैदी) की याद में मजलिस सम्पन्न कराकर श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुये देश और दुनिया में मिसाल पेश की। मालूम हो कि स्व. एपी जैदी समाजवादी आन्दोलन के बड़े नेता रहे हैं। बिहार चुनाव के दौरान 23 अक्टूबर को पटना में हृदयाघात पड़ने से निधन हो गया। वह हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री देवी लाल के राजनैतिक सलाहकार रहे तथा लोकदल के युवा संगठनो में महत्वपूर्ण पदो पर भी रहे। पिछले कुछ समय से स्व. जैदी किन्ही कारणों से राजनीति से विरक्त होकर समाजवादी विचार और दर्शन के लिये अपने जीवन के अन्तिम समय तक कार्य करते रहे। कर्बला में आयोजित मजलिस में खिताब करते हुये मशहूर मौलाना इब्ने अब्बास ने कहा कि चौदह सौ साल से दो तरह का इस्लाम लोगों के सामने आया। एक हुसैनी इस्लाम दूसरा यजीदी इस्लाम। हुसैनियत का मतलब है कमजोरो की मद्द, गरीबों का ख्याल और मजलूमों के दर्द में शिरकत करना जबकि यजीदियत का मतलब है कत्ल, जुल्म, लूट, खून खराबा। आज दुनिया में इस्लाम के नाम पर जितनी दहशतगर्दी हो रही है। वो यजीदी इस्लाम है और हर हुसैनी का फर्ज है कि इन यजीदियों का पूरी ताकत से मुकाबला करे। मजलिस से पूर्व बाकर बाराबंकवी ने कलाम पेश किया। मजलिस में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य एफ आजम वारसी, वरिष्ठ अधिवक्ता अमीर हैदर, जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजेश दीक्षित, वरिष्ठ पत्रकार रिजवान मुस्तफा, आसिफ हुसैन, सपा नेता विजय कुमार सिंह मुन्ना, मृत्युंजय शर्मा, विनय कुमार सिंह गुड्डू, रवि प्रताप सिंह, एहतिशाम खान, राजेश यादव, पाटेश्वरी प्रसाद, रेहान मुस्तफा, आमिर रजा, सादिक हुसैन, हाफिज मोहम्मद मेराज सहित कई लोग मौजूद रहे। अन्त में मजलिस संयोजक राजनाथ शर्मा ने आये हुये सभी अजादारों का शुक्रिया अदा किया।
बाराबंकी। हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे और कौमी एकता की मिसाल बनी कर्बला सिविल लाइन जहां गांधी जयन्ती समारोह ट्रस्ट के अध्यक्ष राजनाथ शर्मा ने अपने अजीज दोस्त समाजवादी चिंतक एवं शिया प्वाइंट के संस्थापक स्व. आले पन्जेतन जैदी (एपी जैदी) की याद में मजलिस सम्पन्न कराकर श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुये देश और दुनिया में मिसाल पेश की। मालूम हो कि स्व. एपी जैदी समाजवादी आन्दोलन के बड़े नेता रहे हैं। बिहार चुनाव के दौरान 23 अक्टूबर को पटना में हृदयाघात पड़ने से निधन हो गया। वह हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री देवी लाल के राजनैतिक सलाहकार रहे तथा लोकदल के युवा संगठनो में महत्वपूर्ण पदो पर भी रहे। पिछले कुछ समय से स्व. जैदी किन्ही कारणों से राजनीति से विरक्त होकर समाजवादी विचार और दर्शन के लिये अपने जीवन के अन्तिम समय तक कार्य करते रहे। कर्बला में आयोजित मजलिस में खिताब करते हुये मशहूर मौलाना इब्ने अब्बास ने कहा कि चौदह सौ साल से दो तरह का इस्लाम लोगों के सामने आया। एक हुसैनी इस्लाम दूसरा यजीदी इस्लाम। हुसैनियत का मतलब है कमजोरो की मद्द, गरीबों का ख्याल और मजलूमों के दर्द में शिरकत करना जबकि यजीदियत का मतलब है कत्ल, जुल्म, लूट, खून खराबा। आज दुनिया में इस्लाम के नाम पर जितनी दहशतगर्दी हो रही है। वो यजीदी इस्लाम है और हर हुसैनी का फर्ज है कि इन यजीदियों का पूरी ताकत से मुकाबला करे। मजलिस से पूर्व बाकर बाराबंकवी ने कलाम पेश किया। मजलिस में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य एफ आजम वारसी, वरिष्ठ अधिवक्ता अमीर हैदर, जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजेश दीक्षित, वरिष्ठ पत्रकार रिजवान मुस्तफा, आसिफ हुसैन, सपा नेता विजय कुमार सिंह मुन्ना, मृत्युंजय शर्मा, विनय कुमार सिंह गुड्डू, रवि प्रताप सिंह, एहतिशाम खान, राजेश यादव, पाटेश्वरी प्रसाद, रेहान मुस्तफा, आमिर रजा, सादिक हुसैन, हाफिज मोहम्मद मेराज सहित कई लोग मौजूद रहे। अन्त में मजलिस संयोजक राजनाथ शर्मा ने आये हुये सभी अजादारों का शुक्रिया अदा किया।
