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सीएचसी में मरीजों से बाहर से मंगवाई जाती है दवाईयां


अजमी रिज़वी
बाराबंकी। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सिरौलीगौसपुर का एक सौ शैय्या वाले अस्पताल को विगत पखवारे दो दिन में चालू करने की एसीएमओ की घोषणा हवा हवाई साबित हुई। बताते चलें कि 10 दिसम्बर को अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डी.के. श्रीवास्तव व डा. सिंह सिरौलीगौसपुर सीएचसी पर पहुंच कर ओपीडी में मशीनों की सेटिंग व अस्पताल की साफ सफाई का कार्य तेजी से करवाने की बात अस्पताल के अधीक्षक राजीव दीक्षित से कर रहे थे और कह रहे थे कि सोमवार तक वार्डों में बेड, आई.सी.यू. रूम ठीक ठाक कराने व अति शीघ्र सर्जन ई.एन.टी.आई. बेहोशी देने वाले डॉक्टरों की शासन द्वारा दो चार दिन में नियुक्ति होकर जिला अस्पताल से भी कई गुना अच्छी बिल्डिंग में लगता था। कि अब को लोगों बाराबंकी लखनऊ से स्वास्थ्य सुविधायें जो मिल रही हैं। वह स्थानीय स्तर पर मुहैय्या हो जावेगी। और जन कल्याण होगा किन्तु एक पखवारा बीत जाने के बाद भी कार्य जहां का तहां नजर आ रहा है। अधीक्षक राजीव दीक्षित बताते हैं कि उन्होने अपने पास से अस्पताल की साफ सफाई और ओ.पी.डी. में मशीनों की सेटिंग आदि के कार्य तो करवा दिये हैं। किन्तु बजट के आभाव में वार्डों में साज सज्जा खिड़की , बिन्डो में परदे फटने आदि कार्य बाधित है। वहीं इतने बड़े अस्पताल में दवाओं का भी आभाव चल रहा है। सभी मर्जों में एक ही दवायें चलाया जाना स्वास्थ्य कर्मियों की मजबूरी भी है। इतना ही नही अस्पताल में दवायें उपलब्ध न होने की दशा में मेड़िकल स्टोरों के लिए दवा के पर्चे लिखे जा रहे हैं। सबसे बड़ी दिक्कत तो आंख के आपरेशन कराने वाले मरीजों को होती हैं। कि आंख के आपरेशन के बाद मरीजों को दवायें बाहर से ही खरीदनी पड़ती है। इस अस्पताल में एन.आर.एच.एम. का बुरा हाल रहता है। प्रसव के बाद दर्जनों बार अस्पताल के चक्कर काटने के बाद मातृ शिशु लाभ का चेक दिया जाता है। अस्पताल कैम्पस में लगी झाड़ी झंखाड़ी व वार्डों तथा ओ.पी.डी. के पास लगे मधुमक्खी के छत्ते स्वास्थ्य प्रशासन की उदासीनता को बयां करते हैं। ठीक प्रकार से यह 100 सैय्या वाला अस्पताल चालू कर दिया जाये डॉक्टर नियमित रूप से रहने लगें तो जिला अस्पताल पर भी वर्डेन कम पड़ सकता है।

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