ठण्ड से ठिठुरे लोग , अलाव नदारद
https://husainijnp.blogspot.com/2015/12/blog-post_397.html
अजमी रिज़वी
बाराबंकी। मौसम ने दिसंबर के पहले सप्ताह से ही अपने तेवर दिखाने शुरु कर दिये हैं। न्यूनतम तापमान दस डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। ऐसे में बस स्टाप, रेलवे स्टेशन व देवा तिराहा आदि जगहों पर रात में यात्री व रिक्शा चालक ठिठुरते रहते हैं। लेकिन अभी तक नगर पालिका व प्रशासन द्वारा कहीं भी अलाव जलवाने की व्यवस्था नही की गयी है। जिससे आम नागरिकों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है। लेकिन प्रशासन उदासीन है। सोमवार को भीषण कोहरे के बाद मंगलवार के दिन लोगों को कोहरे से राहत मिली। लेकिन ठण्ड काफी तेज रही। मौसम विभाग के अनुसार न्यूनतम तापमान दस डिग्री सेल्सियस है। तापमान काफी कम होने से रात में आम नागरिकों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है। नगर पालिका व प्रशासन द्वारा अभी तक रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, देवा तिराहा, छाया चौराहा, धनोखर चौराहा, नाका सतरिख, पल्हरी चौराहा सहित प्रमुख स्थानो पर अभी तक अलाव तक नही जलवाये गये हैं। जिससे रात में दूर दराज से आने वाले यात्रियों को हाथ गर्म करने के लिये भी सुविधा नही मिल पा रही है। रिक्शा व टैम्पो चालकों को ठिठुरते हुये रेलवे स्टेशन व देवा तिराहा पर रात गुजारने को विवश हैं।
बाराबंकी। मौसम ने दिसंबर के पहले सप्ताह से ही अपने तेवर दिखाने शुरु कर दिये हैं। न्यूनतम तापमान दस डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। ऐसे में बस स्टाप, रेलवे स्टेशन व देवा तिराहा आदि जगहों पर रात में यात्री व रिक्शा चालक ठिठुरते रहते हैं। लेकिन अभी तक नगर पालिका व प्रशासन द्वारा कहीं भी अलाव जलवाने की व्यवस्था नही की गयी है। जिससे आम नागरिकों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है। लेकिन प्रशासन उदासीन है। सोमवार को भीषण कोहरे के बाद मंगलवार के दिन लोगों को कोहरे से राहत मिली। लेकिन ठण्ड काफी तेज रही। मौसम विभाग के अनुसार न्यूनतम तापमान दस डिग्री सेल्सियस है। तापमान काफी कम होने से रात में आम नागरिकों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है। नगर पालिका व प्रशासन द्वारा अभी तक रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, देवा तिराहा, छाया चौराहा, धनोखर चौराहा, नाका सतरिख, पल्हरी चौराहा सहित प्रमुख स्थानो पर अभी तक अलाव तक नही जलवाये गये हैं। जिससे रात में दूर दराज से आने वाले यात्रियों को हाथ गर्म करने के लिये भी सुविधा नही मिल पा रही है। रिक्शा व टैम्पो चालकों को ठिठुरते हुये रेलवे स्टेशन व देवा तिराहा पर रात गुजारने को विवश हैं।

