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जुलूसे अमारी में उमड़ा जनसैलाब


अजमी रिज़वी
बाराबंकी। विकास खण्ड सिद्धौर क्षेत्र के ग्राम देवरा सादात में हर वर्षाे की तरह इस वर्ष भी दो रवीअव्वल यानी 15 दिसम्बर को बड़े अदब व एहतराम के साथ जुलूसे अमारी निकाली गयी। यह जुलूसे अमारी का 50वां दौर था। सैदवाड़ा क्षेत्र के देवरा सादात में हमेशा की तरह इस बार भी 15 दिसम्बर को बड़े अदब व एहतराम के साथ जुलूसे अमारी निकाली गई। इसमें  सबसे पहले 14 दिसम्बर की रात में देवरा सादात स्थित आबाद हुसैन के इमाम बारगाह में मजलिसे अजा मुनक्किद हुई जिको मौलाना मो0 जहीर जैदी ने खिताब किया। मौलाना ने कहा कि खुदा वन्दे आलम अपने नेक बन्दे को किसी हाल में तन्हा नही छोड़ता। रहबराने दीन को हर आम इन्सानो की हिदायत के लिए भेजता रहता है। अगर खुदा अपनी बारगाह से निकाले हुए शैतान को लम्बी उम्र दे सकता है तो इन्सानो के लिए हादी बनकर आने वाले आखिरी इमाम- इमामे जमाना-को इतने दिन तक क्यों जिन्दा नही रख सकता। आखिर में जनाबे सकीना पर गुजरे मसायब बयान किए जिसको सुनकर अजादार फूट-फूटकर रो पड़े। बाद मजलिस यहां से जुलूस निकाला गया फिर यह जुलूस जाकर हिदायत हुसैन व मो0 नकी जैदी के इमाम बारगाह में पहुंचा।
जहां पर दूसरी मजलिस मौलाना जहीर हैदर मऊ फैजाबादी ने खिताब फरमाया। बाद मजलिस जनाबे अब्बास का ताबूत बरामद किया गया। फिर यह जुलूस रौजा-ए- जनाब सकीना पर पहुंचा। जहां पर तीसरी मजलिस को मौलाना सुहैल मौलाई बाराबंकवी ने खिताब किर्या। बाद मजलिस आई हुई बहरुनी व मुकामी अन्जुमनो ने नौहाखानी व सीनाजनी की। इसके बाद बूढ़े बच्चे व जवानो ने आग पर चलकर मातम किया। 15 दिसम्बर को सुबह 6 बजे सोसखानी हुई जिसको मौलाना जव्वार हुसैन कर्बलाई जलालपुरी ने पेश किया। बाद सोसखानी पहली मजलिस को मौलाना वसी हसन मीसम जलालपुरी ने खिताब किया। जिसमें मौलाना ने कहा कि सरकारे दो आलम ने इरशाद फरमाया मेरा हुसैन मुझसे है और मै हुसैन से हु । इस हदीस में हमारे नबी ने दुआ भी की है और खबर भी दी हैं सरकार को खबर के ऐतबार से कुफ्फारे मक्का में सच्चा माना और दुआ के ऐतबार से नसाराए नजरान में सच्चा माना अब अगर कोई नबी की दुवा में शक करे तो कुफ्फारे मक्का से बत्तर है।और जो दुआ में शक करे वह इसाइयों से बत्तर है। अन्त में बीबी सकीना से मसायब बयान किया। कहा कि सकीना बीबी का नाम है जिसको नमाजे शब में नाम रखा। वह सकीना जिसको हुसैन के सीने के अलावा कहीं नीद नही आती थी जो कर्बला से पहले आगोश में ज्यादा चली पैरो से कम चली लेकिन वही सकीना बाद-ए कर्बला तमाचो पर तमाचे खाती रही। जालमीन के दुर्रे खाती रही बादे हुसैन जिसे चैन से सोना नसीब नही हुआ जो अपने वतन को याद करते-करते जिन्दान के अंधेरे कैदखाने में घुट-घुट कर मर गई। बाद मजलिस जुलूसे अमारी ऊंटो [पर बरामद हुई जिसको देखते ही अजादार फूट-फूटकर रो पड़े। दूसरी मजलिस मुशीर अब्बास सुल्तानपुरी ने खिताब किया। बाद मजलिस 72 पंजो का आलम बरामद हुआ। तीसरी मजलिस मौलाना फजले अब्बास जौनपुरी व चौथी मजलिस जीशान आजमी आजमगढ़ ने खिताब किया। बाद मजलिस अन्जुमन रौनके इस्लाम मुस्ताफाबाद अम्बेडकर नगर जलालपुर अन्जुमन अब्बासिया सिरौली सुल्तानपुर अन्जुमन असगरिया कदीर अमहट सुल्तानपुर अन्जुमन पंजतनी सेथल बरेली अन्जुमन रौनके अजा आलमपुर ने अपने मक्सूस अन्दाज में नौहाखानी व सीनाजनी करते हुए देवरा सादात में ले जाकर आबाद हुसैन के अजाखाने में तमाम किया। अन्जुमन फरोगेअजा के जनरल सिक्रेट्री मो अकील जैदी व सदर आबद हुसैन ने आए हुए मेहमानो का शुक्रिया अदा किया।

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