ज़िन्दगी का पैगाम देती है कर्बला: मौलाना अब्बास
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। कर्बला सिविल लाइन में पाँच रोज़ा मजलिस की आखिरी मजलिस को खि़ताब करते हुए मौलाना इब्ने अब्बास ने कहा सच्चा हुसैनी वही है जो मकसदे हुसैनी को ज़िन्दा रखे, कर्बला ज़िन्दगी का पैगाम देती है। मकसदे हुसैन फ़िक्रे यज़ीदी को मिटाना था।मौलाना ने यह भी कहा सोच समझ कर हक्के बन्दगी करना इबादत है इस्लाम फ़िक्र की दावत देता है।दुनिया को पैगाम देने के लिए फर्शे अज़ाये हुसैन से बेहतर कोई जरिया नहीं। क्योकि यहाँ न किसी को आने में एतराज़ न किसी को बुलाने में एतराज़ दरे हुसैन पर हर मजहबो मिल्लत के लोग बे रोक टोक आते है जैसा किसी शायर ने कहा है , दरे हुसैन पे आते है हर ख्याल के लोग,ये इत्तेहाद का मरकज़ है आदमी के लिए।अन्त में मौलाना ने हज़रत अब्बास अलमदार और जनाबे ज़ैनब के दर्दनाक मसायब पेश किये जिसे सुन कर अज़ादार बिलक , बिलक कर रोने लगे। मजलिस से पूर्व डॉ. रज़ा मौरानवी ने पढा , इमरान को काफिर से मिलाया किसने , मोहसिन पे ये इलज़ाम लगाया किसने । काफिर थे अगर बाप अली के सोचो अहमद का रज़ा अक्द् पढ़ाया किसने। बाकर नक़वी ने पढा , लब पे जो तेरा नाम शामो सहर है ज़ैनब,ये मेरी माँ की दुवाओं का असर है ज़ैनब। सरवर अली रिज़वी ने पढा , मलक हो या हो बशर या हो मुस्लिमो काफिर , है कौन जो दरे सरवर से फ़ैज़याब नहीं। मो. अली आब्दी, मो.हैदर आब्दी, अयान अब्बास व अमान अब्बास ने भी नज़रानये अक़ीदत पेश किया अंजुमन गुलामें अस्करी ने नोहा ख्वानी व सीनाज़नी की बानिए मजलिस ने सभी का शुक्रिया अदा किया।
