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राष्ट्रीय राजमार्ग जामकर आतंकवाद का पुतला फूका

अजमी रिज़वी
बाराबंकी। ईदे ज़हरा आज शानो शौकत से मनायी गई इस मौके पर राष्ट्रीय राजमार्ग जामकर आतंकवाद मुर्दाबाद का नारा लगाकर आतंकवाद का पुतला फूंका गया। दो महीने आठ दिन गुज़रने के बाद ग़म के दिन समाप्त हो गये। आज 9 रबी अव्वल ईदे ज़हरा पर लागो ने सेवइयां पकाकर महिलाओं ने सोहाग की निशानी चूड़ियां पहनकर खुशी का इजहार किया गया। वहीं आज से काले वस़्त्र जो शौक का प्रतीक होते है त्याग कर लाल पीले वस्त्र पहने गये। इमामे जुमा मौलाना मोहम्मद रज़ा ने बताया कि आज के दिन कर्बला में 6 महीने के हज़रत अली असगर जो इमामे हुसैन (अ0) के छोटे पुत्र थे को तीर मारकर हुरमुला ने शहीद किया था। जनाबे मुख्तार ने जब इसका बदला लिया हुरमुला का सिर चौथे इमाम सय्यदे सज्जाद (अ0) के पास भेजा तो उनके चेहरे पर मुस्कुराहट आई। इसी की खुशी मंे अज़ादार आज ग़म त्याग कर ईदे ज़हरा मनाकर खुशी मनाते है। कर्बला सिविल लाइन्स में आतंकवाद मुर्दाबाद आई एस आई एस; बोको हराम व दाइश मुर्दाबाद-मुर्दाबाद के नारो के साथ आतंकवाद का पुतला लेकर लोग राष्ट्रीय राजमार्ग पहंुचे। जहां पुतले को फूंक कर आतंकवाद के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस मौके पर अज़ादार हुसैन सलीम काजमी; रजा हुसैन रिजवी (रेनू); सरवर अली रिजवी; रेहान मुस्तफा; जावेद अस्करी; अली हमजा (शब्बू) शाने हैदर (बब्लू); हसनैन आब्दी; वसीक, रफीक अब्बाज जैदी, अख्तियार हुसैन, मो0 मेहंदी, बाबू चचा, फाजिल हुसैन (पप्पू); नदीम; शहवेज; आफाक हुसैन; अली हैदर; अयान के अलावा सैकड़ो लोग उपस्थित थे। इसके बाद मैफिल का आयोजन हुआ जिसमें बड़ी संख्या में लोगो ने शिरकत की। सरवर अली रिजवी ने पढ़ा-हसों हुसैन के कातिल पे ईदे ज़हरा है कि आज सैय्यदे सज्जाद मुस्कुरांए है हसनैन आब्दी ने पढ़ा- है ईदे ज़हरा का कहना हर एक मोमिन से पढ़ो नमाज मगर उल्फते हुसैन के साथ। सलीम काजमी; मो0 अली आब्दी; अयान आदि ने भी अपने-अपने अन्दाज में शेर पढ़ेे और लोगों ने उनको खुब हसाया। नजरो नियाज के बाद एक दूसरे का मुंह मीठा कराया।

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