इमामबाड़ा मीर मासूम अली में अलविदाई मजलिस व जुलूस का आयोजन
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। शहर के कटरा मोहल्ला स्थित इमामबाड़ा मीर मासूम अली में पहली मोहर्रम से चल रही अजादारी का सिलसिला अलविदाई मजलिस और मातमी जुलूस के साथ समाप्त हो गया। जुलूस के दौरान लोगों ने जंजीर का मातम करके कर्बला के शहीदों को खून का नजराना पेश किया। शाम ढ़लते ही इमामबाड़े में अजादार एकत्र होने लगे। इसके बाद मजलिस की शुरुआत तिलावते कलामे पाक से हुई। इस मजलिस को सम्बोधित करते हुये मौलाना मुस्तफा अली खां अदीब ने सक्काये सकीना हजरत अब्बास (अ.स.) व शहजाद-ए-अली अकबर की शहादत बड़े ही दर्दनाक अंदाज में बयान किये। मजलिस से पूर्व शायरे अहलेबैत, डा. रजा मौरानवी, कशिश सण्डीलवी, अली मेंहदी व बाकर नकवी ने बारगाहे शहीदाने कर्बला में अपने कलाम का नजराना पेश किया। मजलिस की समाप्ति पर शबीहे ताबूत शहजाद-ए- अली अकबर व जुलजनाह की जियारत करायी गयी। जुलूस के दौरान नवजवानों ने जंजीर का मातम कर अपना नजराना पेश किया। इसके बाद शबीहे ताबूत जुलजनाह व अलम का जुलूस निकाला गया। जो इमामबाड़े के निकट ही गश्त करके समाप्त हो गया। जुलूस के दौरान लखनऊ की आयी अन्जुमन कयामे आले एबा, मासूमे असगर, फरोगे अजा देवरा सादात, जीनतुल इमान केसरवा, गुन्चये अब्बासिया बाराबंकी, गुलामे अस्करी बाराबंकी, जीनतुल अजा आलमपुर, रौनके अजा आलमपुर, अन्जुमन गौसिया मंझियावां कोठी, अन्जुमन सिपाहे असगर के नौजवान दस्ते द्वारा नौहाख्वानी व सीनाजनी की गयी। जुलूस की समाप्ति पर नजरे इमाम (हुसैनी लंगर) का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी तादात में सभी धर्म के लोगों ने शिरकत की। कार्यक्रम की समाप्ति पर आयोजक नदीम अब्बास रिजवी ने सभी अन्जुमनों व अजादारों का आभार व्यक्त किया।
