डूबते इंसान को बचाना नमाज से बड़ी इबादत है: मौलाना जव्वाद
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। शहीदाने कर्बला के चेहल्लुम 18 सफर के अवसर पर बेगमगंज स्थित इमामबाड़ा जनाबे जैनब में मजलिस को खिताब करते हुये आफताबे शरीयत मौलाना कल्बे जव्वाद नकवी ने कहा इस्लाम में जेहाद है आतंकवाद नही। मौलाना जव्वाद ने कहा कि पूरे कुराने मजीद में मुसलमानों को कही नही हमला करने की इजाजत दी गयी है। यदि हमला हो जाये तो बचाव करे। बचाव करने के नाम पर जेहाद है और हमलावर अगर सुलह करने के लिये तैयार हो तो सुलह कर लो। इस्लाम में हमले का हुक्म नही बचाव का हुआ है। हमला हो तो मैदान छोड़ के भागने की इजाजत नही है तब तक मैदान में डटे रहें जब तक फितना फसाद खत्म न हो जाये। मौलाना जव्वाद ने कहा नमाज हर हालत मे वाजिब है। यहां तक कि अगर कोई इंसान डूब रहा है तो ऐसे में इंसान पर वाजिब है कि नमाज को छोड़कर डूबते इंसान को बचाना नमाज से बड़ी इबादत है। इंसानियत को बचाना जब इबादत है तो इस्लाम के नाम पर कत्लेआम करने वाले इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं। ऐसे लोग न इस्लाम को मानने वाले है न मुसलमान है। अन्त में मौलाना जव्वाद ने मसायब पढ़ते हुये कहा कि कर्बला सामने है, जो मानेगा न वो आतंकवादी बनेगा न दहशतगर्द। मौलाना ने कर्बला के दर्दनाक मसायब बयान किये। जिसके बाद अजादार बिलखकर रो पड़े। इस मौके पर बेगमगंज के इमामबाड़ा जनाबे जैनब से इमाम हुसैन की याद में जुलूस निकाला गया। इसके बाद अन्जुमन गुलामे अस्करी और बहराइच से आयी अन्जुमन फनाफिल हुसैन ने नोहाख्वानी की। जुलूस निबलेट तिराहे पहुंचा। वहीं दूसरा जुलूस लाइनपुरवा से होता हुआ निबलेट तिराहा पहुंचा। इसके बाद दोनो जुलूस आकर मिल गये। जो बेगमगंज होता हुआ देर रात कर्बला सिविल लाइन पर पहुंचकर समाप्त हुआ। जहां पर अलविदाई मजलिस हुई। अन्त में चेहल्लुम के संयोजक हसन रजा रिजवी ने जिला प्रशासन व सभी अजादारों का शुक्रिया अदा किया।
अकीदत से निकला चेहल्लुम का जुलूस
बाराबंकी। सुन्नी समुदाय द्वारा चहेल्लुम का जुलूस निकाला गया जो कि मुख्य शहर दर्पण सिनेमा से बहुत बड़ी-बड़ी ताजियों का जुलूस निकाला गया जिसमें हर तरह की ताजियाँ देखने को मिली जुलूस में ताजियों के आगे लोग मर्ससियें पढ रहे थे। और हजरत इमाम हुसैन को अपने कलाम के जरिये गम का इजहार कर रहे थे। जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुयें। और हजरत इमाम हुसैन व नारे तकवीर की सदायें व आवाजे बुलन्द लगा रहे थे। जुलूस में बड़ी संख्या में बच्चे व महिलायें भी शामिल हुयी। इस जुलूस को दर्पण सिंनेमा से घण्टाघर, धनोखर से निकलता हुआ बेगमगंज कर्बला को समाप्त हुआ जहां ताजियाँ दारी करने वाले लोगों ने अपनी-अपनी ताजियों को कर्बला बेगमगंज में दफन किया। और हजर इमाम हुसैन के मग फिरत में दुआ कर जुलूस को समाप्त किया गया। इस जुलूस में मोहर्ररम कमेटी अहले सुन्नत के लोग शामिल हुये जिसमें ताज बाबा राईन, उसामा अंसारी, सुऐब राईन, रईस अंसारी, आसिफ कुरैशी, मो. ताज, जावेद राईन, अलीबाबा, महबूब अली अंसारी, रिजवान राईन, नसीम खान, हाजी इदरीस, मो0 अशफाक, नूरूलहूदा अंसारी, मो. आसिफ सभासद महामत्री मोर्हम कमेटी आदि लोग थे।
