मायावती पर बिफरे पुनिया, कहा कांग्रेस पार्टी ने किया बाबा साहब का सर्वाधिक सम्मान
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद पी.एल. पुनिया ने कहा कि संविधान निर्माता बाबा साहब पर चर्चा में भाग लेते हुए बताया कि बाबा साहब बंगाल के जिस क्षेत्र से निर्वाचित होकर आए थे, देश के विभाजन में वह क्षेत्र पाकिस्तान में जाने के बाद वे संविधान सभा के सदस्य नहीं रहे। तब कांग्रेस से डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद ने हाईकमान की तरफ से मुम्बई के मुख्यमंत्री बी.जी. खैर को पत्र लिखा कि बाबा साहब को संविधान सभा में भेजने की व्यवस्था करें। तब डॉ0 जयकर जो पहले से निर्वाचित थे, उन्होने कांग्रेस पार्टी द्वारा उनसे त्यागपत्र लेकर बाबा साहब को न केवल संविधान सभा का सदस्य बनाया गया अपितु उन्हें ड्राफ्टिंग कमेटी का चेयरमैन भी बनाया गया।
श्री पुनिया ने यह भी कहा कि 1952 में पहली लोकसभा के चुनाव में शैड्यूल्ड कास्ट फेडरेशन की तरफ से मुम्बई से लडते हुए बाबा साहब चुनाव हार गए थे। कांग्रेस द्वारा बाबा साहब की योग्यता एवं उपयोगिता को देखते हुए राज्य सभा से सांसद बनाकर कानून मंत्री भी बनाया गया। इस प्रकार सुश्री मायावती द्वारा कांग्रेस पार्टी पर बाबा साहब की उपेक्षा का आरोप एक सिरे से खारिज किया।
श्री पुनिया ने कहा कि यह आंकलन करना गलत है कि बाबा साहब एक दलित नेता थे। अपितु बाबा साहब राष्ट्रीय नेता थे तथा वे न केवल एक अच्छे कानूनविद थे, बल्कि अच्छे राजनेता, अच्छे अर्थशास्त्री, अच्छे लेखक और अच्छे पत्रकार भी थे। बाबा साहब ने संविधान निर्माण के समय जिन बातों पर चर्चा की थी वह केवल दलितों के लिए ही नहीं की थी। सामाजिक और आर्थिक गैर-बराबरी की जब बात की वह पूरे समाज के लिए की थी। वास्तव में उस समय संविधान बनाने के लिए बाबा साहब डॉ0 भीमराव अम्बेडकर सबसे श्रेष्ठ एवं योग्य व्यक्ति थे। श्री पुनिया ने सुझाव देते हुए कहा कि पदोन्नति में आरक्षण का बिल लोकसभा से पास किया जाए। न्यायपालिका में आरक्षण का प्रावधान किया जाए और भारतीय न्यायिक सेवा का गठन किया जाए। निजी क्षेत्र में आरक्षण की भी श्री पुनिया ने पुरजोर वकालत की।

