रसोई गैस की बढ़ती कीमतों से आम आदमी कराह रहा
https://husainijnp.blogspot.com/2015/12/blog-post_54.html
अजमी रिज़वी
बाराबंकी। रसोई गैस की कीमतों में बेतहासा वृद्वि मंहगयी अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुकी है। जिससे आम आदमी कराह रहा है। उसे बीते हुए दिनों की जब याद आती है। तो वे यह गीत गुन गुनाने पर मजबूर हो जाते हैं। कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन। उक्त उद्गार कांग्रेस जिला महासचिव डा. उदय प्रताप सिंह ने अपने जारी एक बयान में कही उन्होने कहा कि रसोई गैस की कीमतों में वृद्वि के साथ ही साथ मंहगयी अपनी चरम सीमा पर पहुंच रही है। क्या मोदी सरकार के अच्छे दिन का यही सपना था। मोदी को विदेश के दौरे से फुर्सत नही। देश की जनता जिन्होने उनके इस श्लोगन को याद करके ”अब अच्छे दिन आने वाले हैं” पर विश्वास कर केन्द्र में बीजेपी सरकार बनाने में अपना बहुमूल्य मत देकर सहयोग किया था। वे अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। लोगों को अच्छे दिन नही मिले बल्कि मोदी को अच्छे दिन अवश्य मिल गये। देश की जनता मंहगयी की मार से त्रस्त है। लोग अपने परिवार का भरण पोषण ठीक से नही कर पा रहे हेैं। अरहर की दाल तिलहन तथा अन्य खाने पीने की चीजों में बेतहासा वृद्वि से आम आदमी उबर नही पा रहा है। क्या अच्छे दिनों का यही तोहफा है। जो दूर-दूर तक अच्छे दिनों के आसार दिखायी नही दे रहे हैं। पूर्ववर्ती सरकारों में इतनी मंहगयी नही थी। जितनी मोदी सरकार में है। इसलिए लोगों को बीते हुए दिनों की जब याद आती है। तो वे अनायास यह जुमला दोहराने पर मजबूर हो जाते है। कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन।
बाराबंकी। रसोई गैस की कीमतों में बेतहासा वृद्वि मंहगयी अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुकी है। जिससे आम आदमी कराह रहा है। उसे बीते हुए दिनों की जब याद आती है। तो वे यह गीत गुन गुनाने पर मजबूर हो जाते हैं। कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन। उक्त उद्गार कांग्रेस जिला महासचिव डा. उदय प्रताप सिंह ने अपने जारी एक बयान में कही उन्होने कहा कि रसोई गैस की कीमतों में वृद्वि के साथ ही साथ मंहगयी अपनी चरम सीमा पर पहुंच रही है। क्या मोदी सरकार के अच्छे दिन का यही सपना था। मोदी को विदेश के दौरे से फुर्सत नही। देश की जनता जिन्होने उनके इस श्लोगन को याद करके ”अब अच्छे दिन आने वाले हैं” पर विश्वास कर केन्द्र में बीजेपी सरकार बनाने में अपना बहुमूल्य मत देकर सहयोग किया था। वे अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। लोगों को अच्छे दिन नही मिले बल्कि मोदी को अच्छे दिन अवश्य मिल गये। देश की जनता मंहगयी की मार से त्रस्त है। लोग अपने परिवार का भरण पोषण ठीक से नही कर पा रहे हेैं। अरहर की दाल तिलहन तथा अन्य खाने पीने की चीजों में बेतहासा वृद्वि से आम आदमी उबर नही पा रहा है। क्या अच्छे दिनों का यही तोहफा है। जो दूर-दूर तक अच्छे दिनों के आसार दिखायी नही दे रहे हैं। पूर्ववर्ती सरकारों में इतनी मंहगयी नही थी। जितनी मोदी सरकार में है। इसलिए लोगों को बीते हुए दिनों की जब याद आती है। तो वे अनायास यह जुमला दोहराने पर मजबूर हो जाते है। कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन।

