हुसैन ने सिर्फ इस्लाम ही नहीं बल्कि इन्सानियत को भी बचाया: अहमद रज़ा
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। बेगमगंज स्थित मरहूम खुर्शीद साहब के अज़ाखाने इमामबाड़ा जनाबे जैनब में मजलिस को खिताब करते हुए खतीबे अहले बैत रज़ा ने कहा-हुसैन नजात का ज़रिया व हिदायत का चिराग है। जनाब रज़ा ने ये भी कहा कि हुसैन ने सिर्फ इस्लाम व दीन को ही नहीं बचाया बल्कि इन्सानियत को भी बचाया है, यही वजह है कि इस्लाम में उनके मानने वाले उतने नहीं होंगे जितने दूसरे मजहबों में दुनिया में मिलते है। किसी शायर ने खूब कहा है कि इन्सान को बेदार तो हो लेने दो, हर कौम पुकारेगी हमारे हैं हुसैन। रज़ा ने आगे कहा कि खुदा हुसैन से इसलिये राज़ी है कि खुदा के दीन को बचाने के लिये हुसैन ने अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया। तभी तो रसूल ने कहा कि मेरे हुसैन की मिसाल कश्तिये नूह जैसी है लेकिन सिर्फ तारीफ करने वाला नजात नही पायेगा। नजात पाने के लिये कश्ती पर सवार होना पड़ेगा यानी अमल की दुनिया में भी कदम रखना पड़ेगा। अन्त में असीराने कर्बला के दर्दनाक मसायब पेश किया गया। जिसे सुनकर अज़ादार जारो कतार रोने लगे। मजलिस से पूर्व सरवर अली रिजवी ने पढ़ा कि हयात तश्ना दहन है जहां में इन्सां की, कहाँ है मन्जिले ईमां सुराग लेके चलो, गमें हुसैन के आँसू सजाव पल्कों पर अँधेरी रात है सरवर चराग ले के चलो। शाने हैदर बब्लू ने पढ़ा कि कदम जहां भी बढ़ाया जनाबे जैनब ने, हुसैन को वहीं पाया जनाबे जै़नब ने, खुदा का दीन बचाया हुसैन ने लेकिन, हुसैनियत को बचाया जनाबे जैनब ने अन्जुमन गुलामे अस्करी के अराकीनों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की। मजलिस की समाप्ति पर बानिये मजलिस राजा ने सभी का शुक्रिया अदा किया।

