इल्म वही होता है जहां अक्ल व शऊर होता है: मौलाना रजा
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। देवा रोड बेलहरा हाउस के निकट आबिद हुसैन के अजाखाने की सालाना मजलिस के बाद अलम बरामद हुआ। शहर की अन्जुमनों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी के साथ अलम को देवा रोड होते हुए लाइन पुरवा मरहूम नाजिम इमामबाड़ा में पहंुचे। शोअरा ने भी मंजूम नजरानये अकीदत पेश किये। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना रजा ने कहा लाखों सलाम उस पर जिसने अल्लाह पर एहसान किया। अबूतालिब ने रसूल को बचाकर परवरदिगार पर एहसान किया। मोहसिने इस्मत का नाम अबूतालिब है। मौलाना ने यह भी कहा- इल्म वही होता है जहां अक्ल व शऊर होता है। शाने अबूतालिब में शेर पेश करते हुए मौलाना ने कहा बस इस लिए ही तुझे इस जहां ने छोड़ा है; कि तेरे बेटे ने इनके बुतों को तोड़ा है। यजीद कर्बला में मोहम्मद के इस्लाम में तब्दीली कर अपना रायज करना चाहता था। जिस इस्लाम की नकाब को हुसैन ने कर्बला में नोच कर यजीद को रहती दुनिया तक बेनकाब कर दिया। दूसरे मोहसिने इस्मत का नाम अली और तीसरे मोहसिन इस्मत का नाम अबलफज्ल है। मौलाना ने यह भी कहा इंसानियत का मरकजे तवाफ़ काबा है; मरकजे हयात जिसका तवाफ करे उसे अब्बास कहते है। अन्त में हजरत अब्बास अलम्बरदार के दर्दनाक मसायब पेश किये जिसे सुनकर अज़ादार ज़ारो कतार रोने लगे मजलिस से पूर्व कशिश सण्डीलवी ने पढ़ा-तब मुकम्मल मेरी हयात हुई; इश्के मौला मंे गर वफात हुई; कर्बला पर भी एक नज़र डालो; कौन जीता है किसकी मात हुई। अजमल किन्तूरी, बाकर नकवी, अजमी, सरवर अली रिजवी, मोनिस सरवर, अन्जुमन गुन्चये अब्बासिया; अन्जुमन गुलामे अस्करी व अन्जुमन इमामियां व बाकर ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की। लाइन पुरवा नाजिम के अजाखाने में जुलूस समाप्त हुआ। बानिये मजलिस आबिद हुसैन; सादिक हुसैन; जाहिद हुसैन आदि ने सभी का शुक्रिया अदा किया। वहीं कर्बला सिविल लाइन व अस्करी हाल में नौचंदी का अलम निकाला गया। अन्जुमनों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की।
बाराबंकी। देवा रोड बेलहरा हाउस के निकट आबिद हुसैन के अजाखाने की सालाना मजलिस के बाद अलम बरामद हुआ। शहर की अन्जुमनों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी के साथ अलम को देवा रोड होते हुए लाइन पुरवा मरहूम नाजिम इमामबाड़ा में पहंुचे। शोअरा ने भी मंजूम नजरानये अकीदत पेश किये। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना रजा ने कहा लाखों सलाम उस पर जिसने अल्लाह पर एहसान किया। अबूतालिब ने रसूल को बचाकर परवरदिगार पर एहसान किया। मोहसिने इस्मत का नाम अबूतालिब है। मौलाना ने यह भी कहा- इल्म वही होता है जहां अक्ल व शऊर होता है। शाने अबूतालिब में शेर पेश करते हुए मौलाना ने कहा बस इस लिए ही तुझे इस जहां ने छोड़ा है; कि तेरे बेटे ने इनके बुतों को तोड़ा है। यजीद कर्बला में मोहम्मद के इस्लाम में तब्दीली कर अपना रायज करना चाहता था। जिस इस्लाम की नकाब को हुसैन ने कर्बला में नोच कर यजीद को रहती दुनिया तक बेनकाब कर दिया। दूसरे मोहसिने इस्मत का नाम अली और तीसरे मोहसिन इस्मत का नाम अबलफज्ल है। मौलाना ने यह भी कहा इंसानियत का मरकजे तवाफ़ काबा है; मरकजे हयात जिसका तवाफ करे उसे अब्बास कहते है। अन्त में हजरत अब्बास अलम्बरदार के दर्दनाक मसायब पेश किये जिसे सुनकर अज़ादार ज़ारो कतार रोने लगे मजलिस से पूर्व कशिश सण्डीलवी ने पढ़ा-तब मुकम्मल मेरी हयात हुई; इश्के मौला मंे गर वफात हुई; कर्बला पर भी एक नज़र डालो; कौन जीता है किसकी मात हुई। अजमल किन्तूरी, बाकर नकवी, अजमी, सरवर अली रिजवी, मोनिस सरवर, अन्जुमन गुन्चये अब्बासिया; अन्जुमन गुलामे अस्करी व अन्जुमन इमामियां व बाकर ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की। लाइन पुरवा नाजिम के अजाखाने में जुलूस समाप्त हुआ। बानिये मजलिस आबिद हुसैन; सादिक हुसैन; जाहिद हुसैन आदि ने सभी का शुक्रिया अदा किया। वहीं कर्बला सिविल लाइन व अस्करी हाल में नौचंदी का अलम निकाला गया। अन्जुमनों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की।

