गुणा भाग लगाने में जुटे प्रधान प्रत्याशी
https://husainijnp.blogspot.com/2015/12/blog-post_784.html
अजमी रिज़वी
बाराबंकी। ग्राम पंचायतों के चुनाव हो जानें के बाद सभी प्रत्याशियों के भाग्य मतपेटियों में बन्द हो गये प्रधान प्रत्याशियों एंव समर्थको को मतगणना का इन्तजार है। मतगणना की तारीख जैसे जैसे नजदीक आती जा रही है वैसे वैसे प्रत्याशियों एंव समर्थकों की धड़कने बढती जा रही है मतगणना की 13 तारीख का इन्तजार कर रहे है चौराहों पर चाय एवं पान की दुकानों पर प्रधान प्रत्याशी तो कम ही दिखायी पडतें है लेकिन उनके समर्थक हार जीत का आकड़ा लगाते दिखाई पड़ते है। यहां तक कि समर्थकों में मारपीट की नौबत आ जाती है। गांवों मे अपनी हार जीत का फैसला भी नहीं आया की पार्टी बन्दी शुरू हो गयी। चुनाव मैदान में उतरे सभी प्रत्याशी अपनी अपनी जीत का दावा ठोक रहें है। जबकि इस बार के चुनाव मेें प्रधान प्रत्याशी स्वंय ही अपनी जीत का अपनी अन्तरात्मा से फैसला नही ले पा रहें है। पैसा किसी का खाना पीना किसी का खादी कपडे़ किसी का वोटरो का क्या आरोप कि किसको दिया इस बार मतदाता सीधा पोलिंग पर गया वोट डाला और फिर बिना किसी प्रत्याशी से मिले वापस चला गया। यहाँ तक कि इस बार वोट डालने के बाद प्रत्याशियो से नजरे भी नही मिलाया इस प्रकार प्रत्याशी स्वंय मुक्ति है। यह आकड़ा नही लगा पा रहा है किसने किस प्रत्याशी को वोट दिया होगा। प्रत्याशियो से ज्यादा उनके समर्थको की दिन का चैन और रात की नींद हराम हो गयी है। सोते जागते एक वही गुणा भाग।
बाराबंकी। ग्राम पंचायतों के चुनाव हो जानें के बाद सभी प्रत्याशियों के भाग्य मतपेटियों में बन्द हो गये प्रधान प्रत्याशियों एंव समर्थको को मतगणना का इन्तजार है। मतगणना की तारीख जैसे जैसे नजदीक आती जा रही है वैसे वैसे प्रत्याशियों एंव समर्थकों की धड़कने बढती जा रही है मतगणना की 13 तारीख का इन्तजार कर रहे है चौराहों पर चाय एवं पान की दुकानों पर प्रधान प्रत्याशी तो कम ही दिखायी पडतें है लेकिन उनके समर्थक हार जीत का आकड़ा लगाते दिखाई पड़ते है। यहां तक कि समर्थकों में मारपीट की नौबत आ जाती है। गांवों मे अपनी हार जीत का फैसला भी नहीं आया की पार्टी बन्दी शुरू हो गयी। चुनाव मैदान में उतरे सभी प्रत्याशी अपनी अपनी जीत का दावा ठोक रहें है। जबकि इस बार के चुनाव मेें प्रधान प्रत्याशी स्वंय ही अपनी जीत का अपनी अन्तरात्मा से फैसला नही ले पा रहें है। पैसा किसी का खाना पीना किसी का खादी कपडे़ किसी का वोटरो का क्या आरोप कि किसको दिया इस बार मतदाता सीधा पोलिंग पर गया वोट डाला और फिर बिना किसी प्रत्याशी से मिले वापस चला गया। यहाँ तक कि इस बार वोट डालने के बाद प्रत्याशियो से नजरे भी नही मिलाया इस प्रकार प्रत्याशी स्वंय मुक्ति है। यह आकड़ा नही लगा पा रहा है किसने किस प्रत्याशी को वोट दिया होगा। प्रत्याशियो से ज्यादा उनके समर्थको की दिन का चैन और रात की नींद हराम हो गयी है। सोते जागते एक वही गुणा भाग।

