सिर्फ 2 मिनट याद आए बापू !
https://husainijnp.blogspot.com/2016/01/2_30.html
मनीष सिंह
बापू को याद करने का नही मिला शासनादेश
बाराबंकी। देश को ब्रितानिया हुकूमत से आजाद कराने वाले साबरमती के संत
महात्मा गांधी के निर्वाण दिवस पर जिला प्रशासन सिर्फ दो मिनट का मौन
रखकर उन्हे याद करता है। इसके बाद वह अपने कामकाज में जुट जाते हैं। न
कोई मीटिंग होती है और न ही प्रशासनिक कार्यालयों में कोई गोष्ठी। यही
नही दशकों से बजने वाला सायरन भी अब सुनायी देना बंद हो गया है। एक दौर
था जब सायरन की आवाज से जनजीवन रुक जाता था। जो व्यक्ति जहां पर भी होता
था वह अपने स्थान पर खड़ा होकर देश के राष्ट्रपिता को मौन रखकर अपनी
श्रद्धांजलि अर्पित करता था। लेकिन अब न तो लोगों को गांधी की चिंता रही
और न ही उनके विचारों से कोई सारोकार रहा। लोग इतने व्यस्त हो गये कि
उन्हे सिर्फ नोटो पर छपे गांधी की तस्वीर ही उनके लिये सब कुछ बनकर रह
गयी है। लोगों ने गांधी जी को धीरे-धीरे अपने दिलों से निकाल दिया है।
गांधी जी को याद करने की औपचारिकता जनता में ही नही बल्कि शासन-प्रशासन
में भी बनी हुई है। राजनैतिक दल लाभवश गांधी, पटेल, नेहरु, अम्बेडकर को
याद करते हैं। प्रशासन तो महापुरुषों को श्रद्धांजलि देने में खुद को
लज्जित समझता है। देश की एकता और अखण्डता के लिये खुद की कुर्बानी देने
वाले अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी के शहीद दिवस पर प्रशासन का जो
रवैया सामने आया उससे गांधी प्रमियों को बेहद दुखी होना पड़ा। सिर्फ दो
मिनट का मौन और फिर वही दिनचर्या बन कर रह गया शहीद दिवस।
प्रशासन के पास नही था कोई जवाब
बाराबंकी। शहीद दिवस पर जब प्रशासन के अधिकारियों से जानकारी हासिल की
जानी चाही तो वह खुद को बचाते हुये नजर आये। ऐसे में अपर जिलाधिकारी
हरिकेश चौरसिया से जब हमारें संवाददाता ने गांधी निर्वाण दिवस पर आयोजित
कार्यक्रम के बारे में पूछा तो उन्होने कहा कि सिर्फ दो मिनट का मौन 11
बजे हुआ था। और सभी अपनी जगहों पर खड़े हो गये। इसके बाद कोई कार्यक्रम
नही हुआ। न ही शहीद दिवस पर कोई कार्यक्रम आयोजित करने का शासनादेश
प्राप्त हुआ। इसके बाद उन्होने कहा कि इस बारे में विस्तृत जानकारी आपको
जिला सैनिक कल्याण अधिकारी देंगे। लेकिन जब जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को
फोन किया गया लेकिन काफी प्रयास के बाद भी उनसे बात नही हो सकी। यह
प्रशासनिक निरंकुशता का प्रमाण है कि आज उन्हे बापू की कोई जरुरत नही।
जबकि शासन प्रशासन में बापू की तस्वीरें उनकी दीवारों पर टंगी नजर आती
हैं। उनके आदर्शों पर चलने की तो बात दूर उन्हे याद करने की जरुरत भी नही
समझते।
हासिए पर रहा मोदी का सफाई अभियान
बाराबंकी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब गांधी जयंती पर स्वच्छ भारत
का नारा दिया तब लोगों को लगा कि शायद सफाई की इस पहल को कोई बढ़ाये न
बढ़ाये लेकिन भाजपाई जरुर इसे आगे बढ़ाने का काम करेंगे। राजनैतिक
चाटुकारिता और राजनैतिक लाभ के चलते औपचारिक सफाई अभियान भाजपाईयों ने
अवसर-अवसर पर किया। जिसमें भाजपा सांसद की भी अहम भूमिका रही। लेकिन
गांधी निर्वाण दिवस पर कहीं पर भी स्वच्छता अभियान नजर नही आया। खास तौर
पर नगर के रसूलपुर स्थित वार्ड नं-17 में बने महात्मा गांधी पार्क के
अन्दर और बाहर गंदगी का आडम्बर लगा हुआ था। जिसका रख-रखाव नगर पालिका
परिषद करता है। रसूलपुर निवासी राजेश कनौजिया ने बताया कि यह पार्क सिर्फ
गांधी जयंती, गणतंत्र दिवस एवं स्वतंत्रता दिवस पर ही खुलता है। जिस
पार्क की चाभी नगर पालिका परिषद के पास है। जो इसका रख रखाव करती है।
वहीं इसी मोहल्ले के अंकुर का कहना है कि इस पार्क का ताला गांधी जयंती
के बाद से अभी तक नही खुला। हमें उम्मीद थी कि शायर प्रशासन या नगर
पालिका का कोई व्यक्ति गणतंत्र दिवस पर बापू को याद करने आयेगा लेकिन कोई
आया ही नही। यदि ताला खुलता तो हम भी बापू को फूल-माला पहनाकर उन्हे
श्रद्धांजलि देते।
बाराबंकी। देश को ब्रितानिया हुकूमत से आजाद कराने वाले साबरमती के संत
महात्मा गांधी के निर्वाण दिवस पर जिला प्रशासन सिर्फ दो मिनट का मौन
रखकर उन्हे याद करता है। इसके बाद वह अपने कामकाज में जुट जाते हैं। न
कोई मीटिंग होती है और न ही प्रशासनिक कार्यालयों में कोई गोष्ठी। यही
नही दशकों से बजने वाला सायरन भी अब सुनायी देना बंद हो गया है। एक दौर
था जब सायरन की आवाज से जनजीवन रुक जाता था। जो व्यक्ति जहां पर भी होता
था वह अपने स्थान पर खड़ा होकर देश के राष्ट्रपिता को मौन रखकर अपनी
श्रद्धांजलि अर्पित करता था। लेकिन अब न तो लोगों को गांधी की चिंता रही
और न ही उनके विचारों से कोई सारोकार रहा। लोग इतने व्यस्त हो गये कि
उन्हे सिर्फ नोटो पर छपे गांधी की तस्वीर ही उनके लिये सब कुछ बनकर रह
गयी है। लोगों ने गांधी जी को धीरे-धीरे अपने दिलों से निकाल दिया है।
गांधी जी को याद करने की औपचारिकता जनता में ही नही बल्कि शासन-प्रशासन
में भी बनी हुई है। राजनैतिक दल लाभवश गांधी, पटेल, नेहरु, अम्बेडकर को
याद करते हैं। प्रशासन तो महापुरुषों को श्रद्धांजलि देने में खुद को
लज्जित समझता है। देश की एकता और अखण्डता के लिये खुद की कुर्बानी देने
वाले अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी के शहीद दिवस पर प्रशासन का जो
रवैया सामने आया उससे गांधी प्रमियों को बेहद दुखी होना पड़ा। सिर्फ दो
मिनट का मौन और फिर वही दिनचर्या बन कर रह गया शहीद दिवस।
प्रशासन के पास नही था कोई जवाब
बाराबंकी। शहीद दिवस पर जब प्रशासन के अधिकारियों से जानकारी हासिल की
जानी चाही तो वह खुद को बचाते हुये नजर आये। ऐसे में अपर जिलाधिकारी
हरिकेश चौरसिया से जब हमारें संवाददाता ने गांधी निर्वाण दिवस पर आयोजित
कार्यक्रम के बारे में पूछा तो उन्होने कहा कि सिर्फ दो मिनट का मौन 11
बजे हुआ था। और सभी अपनी जगहों पर खड़े हो गये। इसके बाद कोई कार्यक्रम
नही हुआ। न ही शहीद दिवस पर कोई कार्यक्रम आयोजित करने का शासनादेश
प्राप्त हुआ। इसके बाद उन्होने कहा कि इस बारे में विस्तृत जानकारी आपको
जिला सैनिक कल्याण अधिकारी देंगे। लेकिन जब जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को
फोन किया गया लेकिन काफी प्रयास के बाद भी उनसे बात नही हो सकी। यह
प्रशासनिक निरंकुशता का प्रमाण है कि आज उन्हे बापू की कोई जरुरत नही।
जबकि शासन प्रशासन में बापू की तस्वीरें उनकी दीवारों पर टंगी नजर आती
हैं। उनके आदर्शों पर चलने की तो बात दूर उन्हे याद करने की जरुरत भी नही
समझते।
हासिए पर रहा मोदी का सफाई अभियान
बाराबंकी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब गांधी जयंती पर स्वच्छ भारत
का नारा दिया तब लोगों को लगा कि शायद सफाई की इस पहल को कोई बढ़ाये न
बढ़ाये लेकिन भाजपाई जरुर इसे आगे बढ़ाने का काम करेंगे। राजनैतिक
चाटुकारिता और राजनैतिक लाभ के चलते औपचारिक सफाई अभियान भाजपाईयों ने
अवसर-अवसर पर किया। जिसमें भाजपा सांसद की भी अहम भूमिका रही। लेकिन
गांधी निर्वाण दिवस पर कहीं पर भी स्वच्छता अभियान नजर नही आया। खास तौर
पर नगर के रसूलपुर स्थित वार्ड नं-17 में बने महात्मा गांधी पार्क के
अन्दर और बाहर गंदगी का आडम्बर लगा हुआ था। जिसका रख-रखाव नगर पालिका
परिषद करता है। रसूलपुर निवासी राजेश कनौजिया ने बताया कि यह पार्क सिर्फ
गांधी जयंती, गणतंत्र दिवस एवं स्वतंत्रता दिवस पर ही खुलता है। जिस
पार्क की चाभी नगर पालिका परिषद के पास है। जो इसका रख रखाव करती है।
वहीं इसी मोहल्ले के अंकुर का कहना है कि इस पार्क का ताला गांधी जयंती
के बाद से अभी तक नही खुला। हमें उम्मीद थी कि शायर प्रशासन या नगर
पालिका का कोई व्यक्ति गणतंत्र दिवस पर बापू को याद करने आयेगा लेकिन कोई
आया ही नही। यदि ताला खुलता तो हम भी बापू को फूल-माला पहनाकर उन्हे
श्रद्धांजलि देते।
