महात्मा गांधी ने दलितों के हक की लड़ाई लड़ी: पुनिया
https://husainijnp.blogspot.com/2016/01/blog-post_620.html
अजमी रिज़वी
बाराबंकी। महात्मा गांधी ने दलितों के साथ हो रहे शोषण के खिलाफ आवाज
उठाते हुए उनके हक की लड़ाई को लड़ा। बापू बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर को
बहुत चाहते थे। उन्होने ही बाबा साहब को संविधान सभा की समिति में शामिल
कराया जिससे वह भारतीय संविधान के सूत्रधार बनें।
उक्त विचार गांधी भवन में महात्मा गांधी के 69 वें शहीद दिवस पर गांधी
जयन्ती समारोह ट्रस्ट द्वारा आयोजित शान्ति प्रार्थना सभा एवं व्याख्यान
माला के मुख्य अतिथि राज्यसभा सदस्य डा. पी.एल पुनिया ने व्यक्त किया। इस
मौके पर जिलाधिकारी अजय यादव द्वारा विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद
पाण्डेय के आगमन की सूचना प्राप्त हुई। लेकिन तभी उनके अस्वस्थ्य होने की
जानकारी मिली कि वह आयोजित समारोह में शामिल नही हो पायेंगे। कार्यक्रम
की शुरुआत रामधुन से शुरु हुई। इसके बाद शांति प्रार्थना सभा तदोपरान्त
मुख्य अतिथि डा. पीएल पुनिया एवं अध्यक्षता कर रहे सेवानिवृत्त आईएएस
अधिकारी रमाशंकर सिंह ने गांधी प्रतिमा पर माल्यापर्ण कर उन्हे
श्रद्धांजलि अर्पित की।
श्री पुनिया ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे को
राष्ट्रभक्त कहा जाए यह देश व समाज के लिए अपमान की बात है। गांधीजी
प्रेरक राष्ट्रभक्त है। गांधीजी ने अपना अहम और स्वार्थ को त्याग कर एक
आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होने अहिंसा को सिद्धान्त माना है नाकि नीति।
सभा के संयोजक एवं गांधीवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने कहा कि बापू के
विचारो को मानने वालों का आज आभाव हो रहा है। युवाओं में राजनैतिक चेतना
तो बढी है लेकिन सामाजिक गिरावट के चलते उनमें कुछ सीखने और संघर्ष करने
की क्षमता में तेजी से कमी आयी है। श्री शर्मा ने कहा कि आज समाज में
गांधी जी के विचारों पर अमल करने की आवश्यकता आन पड़ी है। यही गांधी जी की
प्रासंगिकता का मूल कारण है।
अध्यक्षता कर रहे सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी रमाशंकर सिंह ने कहा कि
सामाजिक गैर बराबरी और देश विरोधी सिद्धांतो के विरुद्ध उन्होने आवाज
उठाकर समाज को जोड़ने का काम किया। उनकी वैचारिक शैली ने समाज में फैले
अराजक तत्वों के खिलाफ अहिंसा और सत्याग्रह के माध्यम से संघर्ष करने की
शक्ति पैदा की। उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम के डायरेक्टर
इजहार हुसैन ने कहा कि गोडसे ने गांधी जी की हत्या तो की थी लेकिन वह
उनके विचारों को नही मार पाया। जो आज भी समाज में अहिंसा का संदेश दे रहे
हैं।
समाजवादी पार्टी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश सचिव तेज़ तर्रार यूवा नेता दानिश सिद्दीकी ने कहा कि समाज की
बुराईयों से हमें लड़ने का संकल्प लेना होगा। क्योंकि आज भी समाज में
गांधी विरोधी लोग जीवित हैं जो उनके विचारों को खत्म करना चाहते हैं। यह
वही लोग हैं जिन्होने गांधी जी की हत्या की।
सभा को वरिष्ठ पत्रकार दीपक मिश्रा, सतीश श्रीवास्तव, वरिष्ठ कांग्रेसी
नेता शिवशंकर शुक्ला, वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेश श्रीवास्तव, सपा नेता दानिश
सिद्दीकी ने अपने विचार रखे। सभा का संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता हुमायूं नईम
खां ने किया। इस मौके पर मुख्य रुप से समाजवादी पार्टी उ.प्र के पूर्व
कार्यकारिणी सदस्य धनंजय शर्मा, सुरेश जायसवाल, डा. शिवम वर्मा,
मृत्यंुजय शर्मा, मो. एहतिशाम खान, पाटेश्वरी प्रसाद, आसिफ हुसैन, मनीष
सिंह, विनोद भारती, प्रभाकर सिंह, सत्यवान वर्मा, सरजू शर्मा, विजय पाल
गौतम, राजेश यादव, राम मनोरथ वर्मा, फराज़ अहमद खान, उपेन्द्र रावत, मो.
इरफान कुरैशी, सुशील कुमार मिश्रा, सुनीता देवी सहित कई लोग उपस्थित रहे।
बाराबंकी। महात्मा गांधी ने दलितों के साथ हो रहे शोषण के खिलाफ आवाज
उठाते हुए उनके हक की लड़ाई को लड़ा। बापू बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर को
बहुत चाहते थे। उन्होने ही बाबा साहब को संविधान सभा की समिति में शामिल
कराया जिससे वह भारतीय संविधान के सूत्रधार बनें।
उक्त विचार गांधी भवन में महात्मा गांधी के 69 वें शहीद दिवस पर गांधी
जयन्ती समारोह ट्रस्ट द्वारा आयोजित शान्ति प्रार्थना सभा एवं व्याख्यान
माला के मुख्य अतिथि राज्यसभा सदस्य डा. पी.एल पुनिया ने व्यक्त किया। इस
मौके पर जिलाधिकारी अजय यादव द्वारा विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद
पाण्डेय के आगमन की सूचना प्राप्त हुई। लेकिन तभी उनके अस्वस्थ्य होने की
जानकारी मिली कि वह आयोजित समारोह में शामिल नही हो पायेंगे। कार्यक्रम
की शुरुआत रामधुन से शुरु हुई। इसके बाद शांति प्रार्थना सभा तदोपरान्त
मुख्य अतिथि डा. पीएल पुनिया एवं अध्यक्षता कर रहे सेवानिवृत्त आईएएस
अधिकारी रमाशंकर सिंह ने गांधी प्रतिमा पर माल्यापर्ण कर उन्हे
श्रद्धांजलि अर्पित की।
श्री पुनिया ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे को
राष्ट्रभक्त कहा जाए यह देश व समाज के लिए अपमान की बात है। गांधीजी
प्रेरक राष्ट्रभक्त है। गांधीजी ने अपना अहम और स्वार्थ को त्याग कर एक
आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होने अहिंसा को सिद्धान्त माना है नाकि नीति।
सभा के संयोजक एवं गांधीवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने कहा कि बापू के
विचारो को मानने वालों का आज आभाव हो रहा है। युवाओं में राजनैतिक चेतना
तो बढी है लेकिन सामाजिक गिरावट के चलते उनमें कुछ सीखने और संघर्ष करने
की क्षमता में तेजी से कमी आयी है। श्री शर्मा ने कहा कि आज समाज में
गांधी जी के विचारों पर अमल करने की आवश्यकता आन पड़ी है। यही गांधी जी की
प्रासंगिकता का मूल कारण है।
अध्यक्षता कर रहे सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी रमाशंकर सिंह ने कहा कि
सामाजिक गैर बराबरी और देश विरोधी सिद्धांतो के विरुद्ध उन्होने आवाज
उठाकर समाज को जोड़ने का काम किया। उनकी वैचारिक शैली ने समाज में फैले
अराजक तत्वों के खिलाफ अहिंसा और सत्याग्रह के माध्यम से संघर्ष करने की
शक्ति पैदा की। उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम के डायरेक्टर
इजहार हुसैन ने कहा कि गोडसे ने गांधी जी की हत्या तो की थी लेकिन वह
उनके विचारों को नही मार पाया। जो आज भी समाज में अहिंसा का संदेश दे रहे
हैं।
समाजवादी पार्टी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश सचिव तेज़ तर्रार यूवा नेता दानिश सिद्दीकी ने कहा कि समाज की
बुराईयों से हमें लड़ने का संकल्प लेना होगा। क्योंकि आज भी समाज में
गांधी विरोधी लोग जीवित हैं जो उनके विचारों को खत्म करना चाहते हैं। यह
वही लोग हैं जिन्होने गांधी जी की हत्या की।
सभा को वरिष्ठ पत्रकार दीपक मिश्रा, सतीश श्रीवास्तव, वरिष्ठ कांग्रेसी
नेता शिवशंकर शुक्ला, वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेश श्रीवास्तव, सपा नेता दानिश
सिद्दीकी ने अपने विचार रखे। सभा का संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता हुमायूं नईम
खां ने किया। इस मौके पर मुख्य रुप से समाजवादी पार्टी उ.प्र के पूर्व
कार्यकारिणी सदस्य धनंजय शर्मा, सुरेश जायसवाल, डा. शिवम वर्मा,
मृत्यंुजय शर्मा, मो. एहतिशाम खान, पाटेश्वरी प्रसाद, आसिफ हुसैन, मनीष
सिंह, विनोद भारती, प्रभाकर सिंह, सत्यवान वर्मा, सरजू शर्मा, विजय पाल
गौतम, राजेश यादव, राम मनोरथ वर्मा, फराज़ अहमद खान, उपेन्द्र रावत, मो.
इरफान कुरैशी, सुशील कुमार मिश्रा, सुनीता देवी सहित कई लोग उपस्थित रहे।
