जुल्म व जालिम के खिलाफ शिया समुदाय ने मार्च निकालकर सौपा ज्ञापन
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। हुसैनी कौन्सिल द्वारा जालिम और जुल्म के खिलाफ आयोजित प्रदर्शन और जुलूस कार्यक्रम में हजारों पुरूष और महिलाओं ने पहुंचकर आतंकवाद मुर्दाबाद; सऊदी हुकूमत इजराईल; अमरीका मुर्दाबाद; के नारे लगाते हुए कचेहरी पहुंचकर संयुक्त राष्ट्रसंघ के नाम जिलाधिकारी के जरिये ज्ञापन देकर जालिमों के खिलाफ नफरत का इजहार किया गया। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना अता जैदपुरी ने कहा जहां पहले हमला किया जाये उसे जुल्म कहते है। जुल्म हद से बढ़ जाता है तो दिफा वाजिब हो जाता है; जो दिफा करता है उसे मजलूम कहते है। जिनका यकीन रब्बे हकीकी पर होता है वह कत्ल तो हो जाता है लेकिन जालिम के आगे सर नही झुकाता; खौफजदा नही होता। आतिशे नमरूदी ग़ुलज़ार होकर बता रही थी कि ज़ालिम की शिकस्त हुई मजलूम फाते हुआ। मौलाना ने यह भी कहा हर जालिम का वही अंजाम होगा जो नमरूद का हुआ।
हमारी जिम्मेदारी है हिम्मत का मुजाहेरा करे। इस्तेकामत का मुजाहेरा करे जो कौमे खामोश रहती है वह मुर्दा होती है अगर हम ऐहतेजाज न करेंगे तो दुनिया में सिर्फ जुल्म होता रहेगा लेकिन यह मूसा का सदका है कि हम मोहम्मदी है; हम अलवी है; हम हुसैनी है लेकिन हम फिरौनी नही है। मजलूम का खून रायग़ नही होता; वह रंग जरूर लाता है। जालिम हुकूमत को नेस्त नाबूत कर देता है। बाकर अल निम्र की शहादत के बाद कर्बला वालो की मुसीबत का बयान किया जिसे सुनकर मोमनीन रो पड़े। कर्बला सिविल लाइन्स में आज सुबह से ही जिले के कोने-कोने से इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए लोग आना शुरू हो गए थे। आफ्ताबे शरीयत मौलाना कल्बे जवाद ने जो कि दिल्ली मे थे उन्होने अपनी जगह अपनी नुमाइंदगी के लिए मौलाना रजा हुसैन को भेजा था। सुबह 10 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम की शुरूआत मौलाना जै़ग़म अब्बास ’’मुसव्विर’’ जैदपुरी ने तिलावते कलाम पाक से किया इसके बाद इशरत जैदपुरी ने पढ़ा- लिखा हुआ है ये जुल्मो सितम के सीने पर; जो झुक सका न किसी से वो सर हुसैन का है; सरवर अली रिजवी ने पढ़ा- डर गयी बातिल हुकूमत दे दी फांसी की सजा; बूजरी अंदाज था अल निम्र की गुफ़्तार में। जान देकर पासबानी दीने हक की कर गये; हो गये शामिल शहे मजलूम के अंसार में। मुसव्विर जैदपुरी ने पढ़ा- हम ऐतबार की हद से गुजर गये कि नही; वो अपने अहदे वफा से मुकर गये कि नही। सईद जैदपुरी ने पढ़ा- खून रंग लायेगा एक दिन शेख बाकर निम्र का जल्द ही नजदी तेरी खटियां खड़ी हो जायेगी। इस्लाह के सम्पादक देश के नामी गिरामी मौलाना मोहम्मद जाबिर जौराशी किबला ने कहा-आवामी दहशत गर्दी; सरकारी दहशत गर्दी हम दोनो की मजम्मत करते है। कर्बला से हमे जमहूरियत का पैगाम मिलता है और जजबा मिलता है इसी लिए कर्बला से हम तमाम दहशत गर्दो की मजम्मत करते है। अल निम्र की आवाज पर लाखों की तादात में लोग उनसे जुड़ने लगे जिससे खौफ जदा होकर जालिम सरकार ने उन्हें फांसी दे दी। मौलाना गुलामुस्सय्यदैन ने कहा- अल्लाह उन लोगो को मुतवज्जे करके कह रहा है जुल्म करने वाले जान ले उन्हे फना होना है। इमामे जुमा मौलाना रजा जैदपुरी ने कहा-सऊदी अरब के शाह परिवार की बेटी ने भी अल निम्र की फासी को गलत बताया और कहा वह हक परस्त और एक नेक इंसान थे उनको फासी देना एक निहायत गिरा हुआ काम है। इस मौके पर हुसैनी काउंसिल के सिक्रेट्री तहजीब अस्करी; मौ. मो. अयाज; मौ. मो. मुजतबा मीसम, मौ. हिलाल; मो. अकील; आमिर रज़ा; बाकर अब्बास रिजवी; मो. रईस; सादिक हुसैन; हुसैन रजा रिजवी (रेनू); रिजवान मुस्तफा; सरवर अली रिजवी; हाजी दिलकश रिजवी एडवोकेट; गौहर रजा रिजवी; हसन अब्बास जैदी; मो. हैदर रिजवी; रेहान मुस्तफा; जहीर अस्करी; अली हम्जा; डा. असद अब्बास, चांद, अली गदीर रिजवी एडवोकेट, शुजा आलमपुरी, अंजुमन इमामिया, अंजुमन गुन्चये अब्बासियां, अंजुमन गुलामे अस्करी, अंजुमन सदाये हुसैन के मेम्बरान के अलावा हजारों की तादात में बुजुर्ग; बच्चे व औरते शामिल रही।
बाराबंकी। हुसैनी कौन्सिल द्वारा जालिम और जुल्म के खिलाफ आयोजित प्रदर्शन और जुलूस कार्यक्रम में हजारों पुरूष और महिलाओं ने पहुंचकर आतंकवाद मुर्दाबाद; सऊदी हुकूमत इजराईल; अमरीका मुर्दाबाद; के नारे लगाते हुए कचेहरी पहुंचकर संयुक्त राष्ट्रसंघ के नाम जिलाधिकारी के जरिये ज्ञापन देकर जालिमों के खिलाफ नफरत का इजहार किया गया। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना अता जैदपुरी ने कहा जहां पहले हमला किया जाये उसे जुल्म कहते है। जुल्म हद से बढ़ जाता है तो दिफा वाजिब हो जाता है; जो दिफा करता है उसे मजलूम कहते है। जिनका यकीन रब्बे हकीकी पर होता है वह कत्ल तो हो जाता है लेकिन जालिम के आगे सर नही झुकाता; खौफजदा नही होता। आतिशे नमरूदी ग़ुलज़ार होकर बता रही थी कि ज़ालिम की शिकस्त हुई मजलूम फाते हुआ। मौलाना ने यह भी कहा हर जालिम का वही अंजाम होगा जो नमरूद का हुआ।
हमारी जिम्मेदारी है हिम्मत का मुजाहेरा करे। इस्तेकामत का मुजाहेरा करे जो कौमे खामोश रहती है वह मुर्दा होती है अगर हम ऐहतेजाज न करेंगे तो दुनिया में सिर्फ जुल्म होता रहेगा लेकिन यह मूसा का सदका है कि हम मोहम्मदी है; हम अलवी है; हम हुसैनी है लेकिन हम फिरौनी नही है। मजलूम का खून रायग़ नही होता; वह रंग जरूर लाता है। जालिम हुकूमत को नेस्त नाबूत कर देता है। बाकर अल निम्र की शहादत के बाद कर्बला वालो की मुसीबत का बयान किया जिसे सुनकर मोमनीन रो पड़े। कर्बला सिविल लाइन्स में आज सुबह से ही जिले के कोने-कोने से इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए लोग आना शुरू हो गए थे। आफ्ताबे शरीयत मौलाना कल्बे जवाद ने जो कि दिल्ली मे थे उन्होने अपनी जगह अपनी नुमाइंदगी के लिए मौलाना रजा हुसैन को भेजा था। सुबह 10 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम की शुरूआत मौलाना जै़ग़म अब्बास ’’मुसव्विर’’ जैदपुरी ने तिलावते कलाम पाक से किया इसके बाद इशरत जैदपुरी ने पढ़ा- लिखा हुआ है ये जुल्मो सितम के सीने पर; जो झुक सका न किसी से वो सर हुसैन का है; सरवर अली रिजवी ने पढ़ा- डर गयी बातिल हुकूमत दे दी फांसी की सजा; बूजरी अंदाज था अल निम्र की गुफ़्तार में। जान देकर पासबानी दीने हक की कर गये; हो गये शामिल शहे मजलूम के अंसार में। मुसव्विर जैदपुरी ने पढ़ा- हम ऐतबार की हद से गुजर गये कि नही; वो अपने अहदे वफा से मुकर गये कि नही। सईद जैदपुरी ने पढ़ा- खून रंग लायेगा एक दिन शेख बाकर निम्र का जल्द ही नजदी तेरी खटियां खड़ी हो जायेगी। इस्लाह के सम्पादक देश के नामी गिरामी मौलाना मोहम्मद जाबिर जौराशी किबला ने कहा-आवामी दहशत गर्दी; सरकारी दहशत गर्दी हम दोनो की मजम्मत करते है। कर्बला से हमे जमहूरियत का पैगाम मिलता है और जजबा मिलता है इसी लिए कर्बला से हम तमाम दहशत गर्दो की मजम्मत करते है। अल निम्र की आवाज पर लाखों की तादात में लोग उनसे जुड़ने लगे जिससे खौफ जदा होकर जालिम सरकार ने उन्हें फांसी दे दी। मौलाना गुलामुस्सय्यदैन ने कहा- अल्लाह उन लोगो को मुतवज्जे करके कह रहा है जुल्म करने वाले जान ले उन्हे फना होना है। इमामे जुमा मौलाना रजा जैदपुरी ने कहा-सऊदी अरब के शाह परिवार की बेटी ने भी अल निम्र की फासी को गलत बताया और कहा वह हक परस्त और एक नेक इंसान थे उनको फासी देना एक निहायत गिरा हुआ काम है। इस मौके पर हुसैनी काउंसिल के सिक्रेट्री तहजीब अस्करी; मौ. मो. अयाज; मौ. मो. मुजतबा मीसम, मौ. हिलाल; मो. अकील; आमिर रज़ा; बाकर अब्बास रिजवी; मो. रईस; सादिक हुसैन; हुसैन रजा रिजवी (रेनू); रिजवान मुस्तफा; सरवर अली रिजवी; हाजी दिलकश रिजवी एडवोकेट; गौहर रजा रिजवी; हसन अब्बास जैदी; मो. हैदर रिजवी; रेहान मुस्तफा; जहीर अस्करी; अली हम्जा; डा. असद अब्बास, चांद, अली गदीर रिजवी एडवोकेट, शुजा आलमपुरी, अंजुमन इमामिया, अंजुमन गुन्चये अब्बासियां, अंजुमन गुलामे अस्करी, अंजुमन सदाये हुसैन के मेम्बरान के अलावा हजारों की तादात में बुजुर्ग; बच्चे व औरते शामिल रही।
