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शिक्षकों ने कैंडिल जलाकर जताया विरोध


अजमी रिज़वी
बाराबंकी। बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत मृतक आश्रित शिक्षकों की समस्याओं पर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक मृतक ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन सौपा। इसके उपरान्त शाम को गाँधी भवन में एक गोष्ठी का आयोजित की गयी। अन्त में गाँधी के समक्ष उपस्थित शिक्षकों ने कैंडिल जलाकर विरोध जताया। इस दौरान गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे संगठन के प्रदेश महामंत्री जुबेर अहमद ने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा मृतक आश्रितों के साथ अन्याय किया जा रहा है। मृतक आश्रित कोटे में नियुक्त हुए उच्च स्तरीय डिग्री धारकों को चतुर्थ श्रेणी पर पद पर समायोजित किया गया है। जो शिक्षकों के साथ सौतेला व्यवहार है। एक शिक्षक दूसरों का भविष्य बनाता है लेकिन आज उसको भविष्य अंधकार में है। ये लड़ाई पूरे शिक्षक परिवार की है। श्री जुबेर ने कहा कि मृतक आश्रित अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर लखनऊ में प्रदेश स्तरीय आन्दोलन करेगें। यदि हमारी मांगे नही मानी गयी तो हम भूख हड़ताल पर भी बैठेगें। इस मौके पर मौजूद वरिष्ठ शिक्षक नेता सुशील कुमार पाण्डेय ने कहा कि शिक्षक अपनी धरोहर को बचाने में असफल रहे हैं लेकिन अब मृतक आश्रित की लड़ाई समस्त शिक्षक की लड़ाई है। ये लड़ाई प्रदेश के 484000 शिक्षकों की है। मृतक आश्रितों की मांग आधार पर उनकों सरकार सेवारत प्रशिक्षण करा दे और टीईटी में बैठने का मौका दे। अगर मृतक टीईटी उत्तीर्ण कर लेते है तो सहायक अध्यापक बना दे। अन्यथा यथास्थिति में जो उसकी योग्यता हो उसको उस पद कार्यरत किया जाये। जिलाध्यक्ष कुलदीप द्विवेदी ने कहा कि हम हर तरह से प्रदेश स्तरीय लड़ाई के लिए तैयार है। इस बार करो या मरो की नीति से लड़ाई होगी। 

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