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मानव सेवा जीवन का अभिन्न हिस्सा: मल्ल


अजमी रिज़वी
बाराबंकी। मानवसेवा सबसे बड़ा जीवन मूल्य है तो रोगियों की सेवा श्रेष्ठतम
मूल्य। मनुष्य होने की पूर्व शर्त है कि हमारे भीतर करूणा, उदारता के साथ
मानव सेवाभाव हो। इसीलिए आधुनिक भारत निर्माताओं ने उसे अपने जीवन का
अभिन्न हिस्सा बनाया। उपर्युक्त विचार डॉ. राजेश मल्ल चीफ प्राक्टर
जनेस्मा, ने हड़ियाकोल नेत्र आपरेशन शिविर में स्वच्छता, सफाई, तीमारदारों
हेतु राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वंय सेवकों के एक दिवसीय शिविर में
व्यक्त किया। डॉ. मल्ल ने सेवा भाव को जीवन धारण करने का प्राहवान किया।
इस अवसर पर डॉ0 अनीता सिंह एसोसिएट प्रोफेसर हिन्दी एवं पूर्व
कार्यक्रमाधिकारी ने कहा कि ऐसे शिविरों में सहभागिता प्रत्यक्ष अनुभव
तथा ज्ञान की वह पाठशाला है जिन्हें हम पुस्तकों और पुस्तकालयों से
प्राप्त नहीं कर सकते। सहभागिता की अनुभूति विरल है। डॉ0 छत्रसाल सिंह ने
कहा कि मानव जीवन से जितने भी सन्दर्भ हैं उसमें रोगियों की सेवा
सर्वश्रेष्ठ है। स्वंय सेवकों ने पूरे परिसर की सफाई, आपरेशन कक्ष से
लेकर वार्ड तक रोगियों की तीमारदारी में लगे रहे। इससे पूर्व डॉ. मल्ल ने
महाविद्यालय परिसर छात्रों की एक रैली के रूप में एनएसएस स्वंय सेवकों को
रवाना किया। छात्र जुलूस के रूप में छात्र गीत गाते हुए हड़ियाकोल शिविर
तक गये। कार्यक्रम का संयोजन संचालन कार्यक्रमाधिकारी डा. विजय प्रताप
मल्ल ने किया। कुलदीप, शुभम, रवि, अमरदीप, राममोहन, पवन, विपिन आदि ने
सहभागिता की तथा अपने उत्कृष्ट कार्यों से सबका ध्यान खींचा।

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