गांधी भवन में ध्वजारोहण एवं गोष्ठी का आयोजन
https://husainijnp.blogspot.com/2016/01/blog-post_586.html
अजमी रिज़वी
बाराबंकी। गांधी भवन में गणतंत्र दिवस की 67 वीं वर्षगांठ पर गांधी
जयन्ती समारोह ट्रस्ट के तत्वावधान में ध्वजारोहण एवं गोष्ठी का आयोजन
किया गया। गांधी भवन में समाजवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने ध्वजारोहण
किया। इस मौके पर उन्होने कहा कि भारतीय गणतंत्र के प्रारम्भ होने के दिन
से लेकर आज तक भारत के सर्वोच्च न्यायालय पर गणतंत्र दिवस का आयोजन नही
किया गया जबकि दिल्ली उच्च न्यायालय में एक दिन पूर्व यानि 25 जनवरी को
ही उपरोक्त आयोजन मनाया जाता है। जो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को
खण्डित करने का कार्य है। श्री शर्मा ने गोष्ठी के दौरान एक प्रस्ताव रख
कर देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं राज्यपाल से उक्त मामले में
गम्भीरता के साथ हस्ताक्षेप करने की मांग की है। उन्होने कहा हे कि
गणतंत्र दिवस की शुरूआत (26 जनवरी,1950) से वर्तमान समय (26 जनवरी,2016)
तक यह राष्ट्रीय पर्व सर्वोच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय में 26
जनवरी को नही मनाया जाता है। इस प्रकरण को न्यायालय अपने विशेषाधिकार में
प्रयोग करके किसी भी रूप में गणतंत्र दिवस का आयोजन अगले वर्ष 2017 में
भारतीय लोकतंत्र की मर्यादा की रक्षा के लिए करना चाहिए और उन्हे इस
राष्ट्रीय घटना पर दुःख व्यक्त करना चाहिए ताकि भविष्य में 26 जनवरी 2017
से निरंतर सर्वोच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय में गणतंत्र दिवस
मनाने की व्यवस्था सुनिश्चित हो सकेे। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ
पत्रकार सतीश श्रीवास्तव ने की। इस अवसर पर जिला शासकीय अधिवक्ता जमील
अहमद, जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष ब्रजेश दीक्षित, वरिष्ठ
अधिवक्ता सुरेन्द्र प्रताप सिंह बब्बन, हुमायूं नईम खान, वरिष्ठ चिकित्सक
डा एस. के वर्मा, सपा नेता दानिश सिददीकी, फरहान अंसारी, समाजसेवी फराज़
अहमद खान, मृत्युंजय शर्मा, असलम बब्लू, एहतेशाम खान, सत्यवान वर्मा,
शिवा शर्मा, अंकुर शर्मा, रवि प्रताप सिंह, विनोद भारती, पाटेश्वरी
प्रसाद, आसिफ हुसैन, फरहान अहमद, हसीब हिन्दुस्तानी, रोहिताश्व दीक्षित
सहित कई लोग मौजूद रहे।
बाराबंकी। गांधी भवन में गणतंत्र दिवस की 67 वीं वर्षगांठ पर गांधी
जयन्ती समारोह ट्रस्ट के तत्वावधान में ध्वजारोहण एवं गोष्ठी का आयोजन
किया गया। गांधी भवन में समाजवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने ध्वजारोहण
किया। इस मौके पर उन्होने कहा कि भारतीय गणतंत्र के प्रारम्भ होने के दिन
से लेकर आज तक भारत के सर्वोच्च न्यायालय पर गणतंत्र दिवस का आयोजन नही
किया गया जबकि दिल्ली उच्च न्यायालय में एक दिन पूर्व यानि 25 जनवरी को
ही उपरोक्त आयोजन मनाया जाता है। जो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को
खण्डित करने का कार्य है। श्री शर्मा ने गोष्ठी के दौरान एक प्रस्ताव रख
कर देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं राज्यपाल से उक्त मामले में
गम्भीरता के साथ हस्ताक्षेप करने की मांग की है। उन्होने कहा हे कि
गणतंत्र दिवस की शुरूआत (26 जनवरी,1950) से वर्तमान समय (26 जनवरी,2016)
तक यह राष्ट्रीय पर्व सर्वोच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय में 26
जनवरी को नही मनाया जाता है। इस प्रकरण को न्यायालय अपने विशेषाधिकार में
प्रयोग करके किसी भी रूप में गणतंत्र दिवस का आयोजन अगले वर्ष 2017 में
भारतीय लोकतंत्र की मर्यादा की रक्षा के लिए करना चाहिए और उन्हे इस
राष्ट्रीय घटना पर दुःख व्यक्त करना चाहिए ताकि भविष्य में 26 जनवरी 2017
से निरंतर सर्वोच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय में गणतंत्र दिवस
मनाने की व्यवस्था सुनिश्चित हो सकेे। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ
पत्रकार सतीश श्रीवास्तव ने की। इस अवसर पर जिला शासकीय अधिवक्ता जमील
अहमद, जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष ब्रजेश दीक्षित, वरिष्ठ
अधिवक्ता सुरेन्द्र प्रताप सिंह बब्बन, हुमायूं नईम खान, वरिष्ठ चिकित्सक
डा एस. के वर्मा, सपा नेता दानिश सिददीकी, फरहान अंसारी, समाजसेवी फराज़
अहमद खान, मृत्युंजय शर्मा, असलम बब्लू, एहतेशाम खान, सत्यवान वर्मा,
शिवा शर्मा, अंकुर शर्मा, रवि प्रताप सिंह, विनोद भारती, पाटेश्वरी
प्रसाद, आसिफ हुसैन, फरहान अहमद, हसीब हिन्दुस्तानी, रोहिताश्व दीक्षित
सहित कई लोग मौजूद रहे।

