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ईरान मजहब की नही; मजलूमियत की हिमायत करता है-मौलाना सईदुल


अजमी रिज़वी
बाराबंकी। मौलाना गुलाम अस्करी हाल में आयतुल्लाह शेख मो. बाकर अल निम्र की शहादत पर एक मजलिसे अजा की गई जिसमें शोआरा ने नजरानये अकीदत पेश किये। मौलाना ने मजलिस को खिताब किया। शेख अल निम्र व उनके साथ शहीद किये गये सुन्नी व हनफी के अलावा पठान कोट में शहीद भारतीयों व नाईजीरिया में मौलाना जकजाकी के बच्चों के लिए फातेहा पढ़ी गयी। मौलाना सै. सईदुल हसन नक़वी ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा ’’मर्द वही होता है जो हक़ पर जान दे देता है; लेकिन सौदा नही करता’’ मौलाना ने कहा दर अस्ल यह खैबर के यहूदियों की नस्ल है। अमरीका और इजराईल की गुलाम है। अन्त में पाठानकोट में बेगुुनाह मारे गये हिन्दुस्तानियों; नाईजीरियां में ज़कज़ाकी के बच्चों व उनकी बीवी और खुद उनके साथ हुए जुल्म के साथ अल निम्र व उनके साथी सुन्नी उलेमा व हनफ़ी की शहादत का बयान करते हुए करबला के शहीदो का जिक्र किया। जिसे सुनकर मोमनीन रो पड़े।मौलाना ने कहा की ईरान मजहब की नही; मजलूमियत की हिमायत करता है मजलिस से पूर्व मौलाना साबिर इमरानी ने पढ़ा- वो आदिल खूने नाहक को मेरे मीज़ंा पे तोलेगा; जबां जिस वक्त होगी बंद मेरी; खूॅन बोलेगा। डा0 रजा मौरांवी ने  पढ़ा- जनाबे निम्र को जालिम डराने निकले थे; गुलामे शह से वह आंखे मिलाने निकले थे। इन्हे पता ही नही फलसफा शहादत का; गलो के कटने से आवाज दब नही सकती। के अलावा अजमल किन्तूरी, सरवर अली रिजवी, मो. अयान ने भी नजरानये अकीदत पेश किया।

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