बच्चों को दुनियावी तालीम के साथ दीनी तालीम भी दें: रजा
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। अपने बच्चों को बचपन से ही दीनी तालीम से आरास्ता करें ताकि गुमराही दूर हो सके यह बात दीन दयाल नगर के अली कालोनी स्थित जावेद के आवास पर ग्यारहवें इमाम हज़रत हसन अस्करी की विलादत के मौके पर मौलाना रज़ा ने कही मौलाना ने यह भी कहा दुनियावी तालीम भी दे ताकि दुनियां भी कामयाब हो और दीनी तालीम से भी बच्चों को आरास्ता करे ताकि आखेरत भी संवर जाये। मौलाना ने यह भी कहा अज़ीज के साथ अगर अज़ीम हस्तियों को बुलाना हो तो महफ़िले मीलाद करों। नये मकान में आने से पहले महफिले मीलाद कराना व अजीजों का दावत देना बाइसे बरकत है वहीं अज़ीम हस्तियों को बुलाकर घर को बाबरकत बनाते है। खुषियां हर इंसान को मनानी चाहिए लेकिन इंसानियत के दायरे में इमाम की विलादत पर उनके बारे मंे मोमनीन से जानकारी रखने की भी अपील की कहा हसन अस्करी (अ) के अलावा जक़ी व हादी के लक़ब से भी इन्हे जाना जाता है 8 साल की उम्र से ही इमाम ने दर्से इंसानियत देना षुरू कर दिया था मौलाना ने यह भी कहा कुरआन बलीग था उसे फ़सीह मेरे पैगम्बर मोहम्मद मुस्तफा (स0अ0व0) ने बनाया। कलामे इलाही को पैगम्बर का मोज़जा कहा जाता है और नहजुल बलागा अली मुर्तुजा (अ) का मोजजा है। इससे पूर्व आसिम ने पढ़ा- सजे थे अज्रे समन्दर अली-अली कह कर खिले थे सब के मुकद्दर अली-अली कह कर इसके अलावा हैदर आब्दी, रजा मेहदी ने नजरानये अकीदत पेष किया महफिल का आगाज मो0 हसनैन आब्दी ’’गुड्डू’’ ने हदीसे किसा से किया। अन्त में जावेद साहब ने सभी का षुक्रिया अदा किया।

