आयतुल्लाह निम्र को फाँसी इस्लामी सिद्धांतों के ख़िलाफ़ - मौलाना सफ़दर
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जौनपुर । प्रसिद्ध मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना सफ़दर हुसैन जैदी ने सऊदी अरब के वरिष्ठ शिया धर्मगुरू अयातुल्लाह शैख़ बाक़िर निम्र को दी गई फांसी के ख़िलाफ़ कड़ी प्रातिक्रिया व्यक्त करते हुए सऊदी शासन की कड़े शब्दों में आलोचना की है।
मौलाना जैदी ने नगर के इस्लाम चौक पर स्वर्गीय ज़मीर हसन की मजलिस के बाद आयोजित एह्तिजाज़ी जलसे को ख़िताब करते हुए कहा कि शहीद निम्र का खून बेकार नहीं जाएगा और पूरी दुनिया जल्द ही सऊदी सरकार के पतन को देखेगी। मौलाना ने अत्याचारी सऊदी शासन द्वारा वरिष्ठ शिया धर्मगुरू शैख़ निम्र और उनके तीन सहयोगियों को दी गई फांसी को इस्लामी सिद्धांतों के ख़िलाफ़ बताया और कहा कि अपने आप को इस्लामी देशों का ठेकेदार समझने वाले सऊदी अरब का अस्ली रूप सबके सामने आ गया है।
उन्होंने कहा कि सऊदी अरब में अल्पसंख्यकों पर लगातार अत्याचार हो रहा है, उस देश के अत्याचारी शासन के ख़िलाफ़ कोई आवाज़ भी नहीं उठा सकता और अगर कोई अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाता है तो उसको मौत की सज़ा दे दी जाती है। उस इस्लामी देश की ग़ैर इस्लामी सरकार किस प्रकार अपने नागरिकों के अधिकारों का हनन कर रही है और कैसे अल्पसंख्यकों की बेरहमी से हत्या कर रही है और पूरी दुनिया देख रही है लेकिन अफ़सोस की बात यह है कि संयुक्त राष्ट्र , मानव अधिकारों की रक्षक संस्थाएं और ठेकेदार मूकदर्शक बने हुए हैं।
मौलाना नदीम असगर ने पूरे भारत के मुसलमानों से अपील की है कि वे सऊदी अरब की अत्याचारी सरकार के विरुद्ध उठ खड़े हों, उन्होंने कहा कि सऊदी अरब की अत्याचारी सरकार का पतन शुरू होने वाला है क्योंकि कभी भी शहीदों का बलिदान बेकार नहीं जाता |
जलसे की अध्यक्षता करते हुए चेहलुम कमिटी के संयोजक असगर हुसैन जैदी ने कहा की अनेक देशों के आग्रह के बावजूद सऊदी अरब की ओर से शैख़ निम्र को शहीद किया जाना, पूरे संसार के मुसलमानों का अपमान है।
उन्होंने कहा कि आयतुल्लाह शैख़ निम्र, न्याय-प्रेम व ईश्वरीय भय की मूर्ति थे। उन्होंने कहा कि वे एक परिवार की तानाशाही को रोकना चाहते थे और सऊदी अरब में न्याय की स्थापना ही उनकी केवल एक इच्छा थी। पर सऊदी शासक लोगों की इच्छाओं का सम्मान किए बिना जो भी चाहता है अंजाम देता है। आयतुल्लाह शैख़ निम्र की शहादत ने एक बार फिर सऊदी हुकूमत के काले चेहरे को संसार के सामने बेनक़ाब कर दिया है।
इस मौके पर कबीर जैदी , लाडले जैदी , अफसर अनमोल , अली कैसर , हैदर अब्बास आफताब , नजमुल हसन नजमी ,मुफ़्ती दानिश , अलमदार जैदी , जफ्फु भाई आदि के साथ भारी संख्या में लोग मौजूद रहे । संचालन कमर जौनपुरी ने किया ।
मौलाना जैदी ने नगर के इस्लाम चौक पर स्वर्गीय ज़मीर हसन की मजलिस के बाद आयोजित एह्तिजाज़ी जलसे को ख़िताब करते हुए कहा कि शहीद निम्र का खून बेकार नहीं जाएगा और पूरी दुनिया जल्द ही सऊदी सरकार के पतन को देखेगी। मौलाना ने अत्याचारी सऊदी शासन द्वारा वरिष्ठ शिया धर्मगुरू शैख़ निम्र और उनके तीन सहयोगियों को दी गई फांसी को इस्लामी सिद्धांतों के ख़िलाफ़ बताया और कहा कि अपने आप को इस्लामी देशों का ठेकेदार समझने वाले सऊदी अरब का अस्ली रूप सबके सामने आ गया है।
उन्होंने कहा कि सऊदी अरब में अल्पसंख्यकों पर लगातार अत्याचार हो रहा है, उस देश के अत्याचारी शासन के ख़िलाफ़ कोई आवाज़ भी नहीं उठा सकता और अगर कोई अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाता है तो उसको मौत की सज़ा दे दी जाती है। उस इस्लामी देश की ग़ैर इस्लामी सरकार किस प्रकार अपने नागरिकों के अधिकारों का हनन कर रही है और कैसे अल्पसंख्यकों की बेरहमी से हत्या कर रही है और पूरी दुनिया देख रही है लेकिन अफ़सोस की बात यह है कि संयुक्त राष्ट्र , मानव अधिकारों की रक्षक संस्थाएं और ठेकेदार मूकदर्शक बने हुए हैं।
मौलाना नदीम असगर ने पूरे भारत के मुसलमानों से अपील की है कि वे सऊदी अरब की अत्याचारी सरकार के विरुद्ध उठ खड़े हों, उन्होंने कहा कि सऊदी अरब की अत्याचारी सरकार का पतन शुरू होने वाला है क्योंकि कभी भी शहीदों का बलिदान बेकार नहीं जाता |
जलसे की अध्यक्षता करते हुए चेहलुम कमिटी के संयोजक असगर हुसैन जैदी ने कहा की अनेक देशों के आग्रह के बावजूद सऊदी अरब की ओर से शैख़ निम्र को शहीद किया जाना, पूरे संसार के मुसलमानों का अपमान है।
उन्होंने कहा कि आयतुल्लाह शैख़ निम्र, न्याय-प्रेम व ईश्वरीय भय की मूर्ति थे। उन्होंने कहा कि वे एक परिवार की तानाशाही को रोकना चाहते थे और सऊदी अरब में न्याय की स्थापना ही उनकी केवल एक इच्छा थी। पर सऊदी शासक लोगों की इच्छाओं का सम्मान किए बिना जो भी चाहता है अंजाम देता है। आयतुल्लाह शैख़ निम्र की शहादत ने एक बार फिर सऊदी हुकूमत के काले चेहरे को संसार के सामने बेनक़ाब कर दिया है।
इस मौके पर कबीर जैदी , लाडले जैदी , अफसर अनमोल , अली कैसर , हैदर अब्बास आफताब , नजमुल हसन नजमी ,मुफ़्ती दानिश , अलमदार जैदी , जफ्फु भाई आदि के साथ भारी संख्या में लोग मौजूद रहे । संचालन कमर जौनपुरी ने किया ।

