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’’यौमे जम्हूरियां हमे दूसरो के साथ इंसानी सुलूक करने का पैग़ाम देती है’’

अजमी रिज़वी
बाराबंकी। यौमे जम्हूरियां के हवाले से अस्करी नगर स्थित गुलाम अस्करी हाल में मरहूम सै0 मो0 यूसुफ की ईसाले सवाब की मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना हसनैन बाकरी ने कहा 26 जनवरी हिन्दुस्तानी संविधान के लागू होने का दिन है। आज का दिन हमको अपने मुल्क के अंदर आजादी से जिन्दगी गुजारने और जम्हूरियत का पासो-लिहाज रखते हुए दूसरो के साथ इंसानी सुलूक करने का पैगाम देता है। दीने इस्लाम जो इंसानियत का मजहब है और दुनिया से जुल्म व नाइंसाफी व तमाम बुराईयों के खातमे के लिए आया है। वह हमें पैगाम देता है कि अपने मुल्म में अमनो अमान कायम करे और भाई चारे को बनाये रखन में मदद करे। मौलाना बाकरी ने यह भी कहा इस्लाम की बुनियाद ही अदालत पर मुनहस्सर है और यह भी कहा कि मोहम्मद व आले मोहम्मद के रास्ते को छोड़कर किसी भी रास्ते पर जाना फस्ती का रास्ता है वह दुनिया काबिले मजम्मत है जो हमे दीन से दूर कर दे और वह दुनिया काबिले तारीफ है जो हमे दीन से करीब कर दे। अन्त में कूफा व शाम में हुई असीराने कर्बला पर मुसीबतो का बयान किया जिसे सुनकर मोमनीन रोने लगे। मजलिस से पूर्व अजमल किन्तूरी, बाकर नकवी, आरिज जरगावी व मोनिस सरवर ने नजरानये अकीदत पेश किये। मजलिस की समाप्ति पर बानिये मजलिस ने सभी का शुक्रिया अदा किया।

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