SP अब्दुल हमीद के कड़े तेवर का असर, दस लाख की फिरौती मांगने वाला भाई गिरफ्तार
https://husainijnp.blogspot.com/2016/01/sp_18.html
अजमी रिज़वी
बाराबंकी। कोतवाली हैदरगढ़ अन्तर्गत सोमवार की सुबह कस्बे से अज्ञात अपहरणकर्ताओं ने चार वर्षीय सचिन सिंह का अपहरण करके दस लाख की फिरौती मांगी। इस घटना से हड़कम्प मच गया। घटना की सूचना पाते ही पुलिस अधीक्षक अब्दुल हमीद ने स्वयं संज्ञान लेते हुये ऐसी ब्यूह रचना की कि शाम होते-होते अपहरणकर्ताओं के साथ नाबालिग अपहरता पुलिस की गिरफ्त में आ गया।
मिली जानकारी के मुताबिक पैसों के लिए हैदरगढ़ कस्बे में आज एक बड़ा भाई दिवाकर सिंह अपने मासूम चार वर्षीय सगे छोटे भाई सचिन के अपहरण की पटकथा को दोस्तों के साथ साकार कर गया। घटनाक्रम के मुताबिक लिल्हौरा निवासी देवेन्द्र प्रताप सिंह का छोटा पुत्र सचिन आज टयूशन पढ़ने के बाद एकाएक घर से लापता हो गया। घर वालों ने खोजना शुरू किया तो उसका पता न चला। इसी बीच बाप देवेन्द्र के फोन पर मैसेज आया कि अपने बेटे की जिन्दगी चाहते हो तो दस लाख रूपये का इन्तजाम कर दो। रूपया कहां देना है यह तुमको बता दिया जायेगा, बेटे के अपहरण की घटना से घरवाले सन्न रह गये। तत्काल इसकी सूचना कोतवाली पुलिस को दी गयी। तेज तर्रार कोतवाली प्रभारी चन्द्रशेखर सिंह ने इसकी सूचना पुलिस अधीक्षक अब्दुल हमीद को दी तो उन्होने हैदरगढ़ पुलिस के साथ एसओजी टीम को भी लगा दिया। मौके पर एएसपी सफीक अहमद भी जा पहुंचे। उधर जब पुलिस ने आये मैसेज के मोबाइल नम्बर 7310468276 को सर्विलांस पर लगाया तो लगभग सारा मामला उजागर हो गया। दरअसल उपरोक्त मोबाइल नम्बर अपहर्त सचिन का बड़ा भाई छः माह पूर्व तक अपने मोबाइल में चलाता रहा था। पुलिस ने दिवाकर को हिरासत में ले लिया। जबकि इस दौरान उसे परिजनों का विरोध भी सहना पड़ा। खासकर मासूम की मां का कहना था कि एक बेटे का अपहरण हो गया जो कि मेरा बड़ा बेटा नहीं कर सकता। अब दूसरे को भी पुलिस उत्पीड़ित कर रही है। लेकिन पुलिस ने अपनी कार्यवाही जारी रखी। आखिरकार शाम पांच बजे अपहर्ताओं ने फिर फोन किया व रूपया जासेपुर गांव के निकट एक बाग में मंगवाया।
पुलिस की घेराबंदी में फंसे अपहर्ता
बाराबंकी। सचिन के अपहरताओं ने फिरैती के लिये जिस स्थान को चुना था वहां पर सिपाही रामकुमार यादव, संतोष कुमार, जुनैद व कोतवाल चन्द्रशेखर, बड़े दरोगा अजीत सिंह आदि ने बाग में डेरा डाल दिया। बैग में रूपये की जगह ईटे रखकर पिता देवेन्द्र उक्त स्थान पर पहुंचा तो अपहर्ताओं ने सचिन को छोड़ दिया। देवेन्द्र सचिन को लेकर भागा उसके बाद रूपये का बैग उठाने आये अपहर्ता जासेपुर निवासी अरबाज व सूरज निवासी कस्बा ब्रहम्नान को पुलिस ने धर दबोचा। लगभग आठ घंटे के अंदर पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की असलियत सामने ला दी। मालूम हुआ है कि दिवाकर ने स्वयं ही अपने छोटे भाई को अपहर्त करके अपने साथी अपहर्ताओं को सौंपा था। यह पूरा कृत्य उसने रूपयों के लिए किया था ताकि पिता से मिले दस लाख रूपयों में वह पांच लाख का हिस्सेदार बन सके। फिलहाल पुलिस की जांच अभी जारी है क्योंकि इसमें कई अन्य नाम भी संज्ञान में आये बताये जा रहे हैं। कुल मिलाकर सचिन के बरामद होने पर पूरे हैदरगढ़ में खुशी की लहर दौड़ गयी। कस्बे वासी पुलिस अधीक्षक सहित हैदरगढ़ कोतवाली पुलिस को मुबारकबाद दे रही है।
बाराबंकी। कोतवाली हैदरगढ़ अन्तर्गत सोमवार की सुबह कस्बे से अज्ञात अपहरणकर्ताओं ने चार वर्षीय सचिन सिंह का अपहरण करके दस लाख की फिरौती मांगी। इस घटना से हड़कम्प मच गया। घटना की सूचना पाते ही पुलिस अधीक्षक अब्दुल हमीद ने स्वयं संज्ञान लेते हुये ऐसी ब्यूह रचना की कि शाम होते-होते अपहरणकर्ताओं के साथ नाबालिग अपहरता पुलिस की गिरफ्त में आ गया।
मिली जानकारी के मुताबिक पैसों के लिए हैदरगढ़ कस्बे में आज एक बड़ा भाई दिवाकर सिंह अपने मासूम चार वर्षीय सगे छोटे भाई सचिन के अपहरण की पटकथा को दोस्तों के साथ साकार कर गया। घटनाक्रम के मुताबिक लिल्हौरा निवासी देवेन्द्र प्रताप सिंह का छोटा पुत्र सचिन आज टयूशन पढ़ने के बाद एकाएक घर से लापता हो गया। घर वालों ने खोजना शुरू किया तो उसका पता न चला। इसी बीच बाप देवेन्द्र के फोन पर मैसेज आया कि अपने बेटे की जिन्दगी चाहते हो तो दस लाख रूपये का इन्तजाम कर दो। रूपया कहां देना है यह तुमको बता दिया जायेगा, बेटे के अपहरण की घटना से घरवाले सन्न रह गये। तत्काल इसकी सूचना कोतवाली पुलिस को दी गयी। तेज तर्रार कोतवाली प्रभारी चन्द्रशेखर सिंह ने इसकी सूचना पुलिस अधीक्षक अब्दुल हमीद को दी तो उन्होने हैदरगढ़ पुलिस के साथ एसओजी टीम को भी लगा दिया। मौके पर एएसपी सफीक अहमद भी जा पहुंचे। उधर जब पुलिस ने आये मैसेज के मोबाइल नम्बर 7310468276 को सर्विलांस पर लगाया तो लगभग सारा मामला उजागर हो गया। दरअसल उपरोक्त मोबाइल नम्बर अपहर्त सचिन का बड़ा भाई छः माह पूर्व तक अपने मोबाइल में चलाता रहा था। पुलिस ने दिवाकर को हिरासत में ले लिया। जबकि इस दौरान उसे परिजनों का विरोध भी सहना पड़ा। खासकर मासूम की मां का कहना था कि एक बेटे का अपहरण हो गया जो कि मेरा बड़ा बेटा नहीं कर सकता। अब दूसरे को भी पुलिस उत्पीड़ित कर रही है। लेकिन पुलिस ने अपनी कार्यवाही जारी रखी। आखिरकार शाम पांच बजे अपहर्ताओं ने फिर फोन किया व रूपया जासेपुर गांव के निकट एक बाग में मंगवाया।
पुलिस की घेराबंदी में फंसे अपहर्ता
बाराबंकी। सचिन के अपहरताओं ने फिरैती के लिये जिस स्थान को चुना था वहां पर सिपाही रामकुमार यादव, संतोष कुमार, जुनैद व कोतवाल चन्द्रशेखर, बड़े दरोगा अजीत सिंह आदि ने बाग में डेरा डाल दिया। बैग में रूपये की जगह ईटे रखकर पिता देवेन्द्र उक्त स्थान पर पहुंचा तो अपहर्ताओं ने सचिन को छोड़ दिया। देवेन्द्र सचिन को लेकर भागा उसके बाद रूपये का बैग उठाने आये अपहर्ता जासेपुर निवासी अरबाज व सूरज निवासी कस्बा ब्रहम्नान को पुलिस ने धर दबोचा। लगभग आठ घंटे के अंदर पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की असलियत सामने ला दी। मालूम हुआ है कि दिवाकर ने स्वयं ही अपने छोटे भाई को अपहर्त करके अपने साथी अपहर्ताओं को सौंपा था। यह पूरा कृत्य उसने रूपयों के लिए किया था ताकि पिता से मिले दस लाख रूपयों में वह पांच लाख का हिस्सेदार बन सके। फिलहाल पुलिस की जांच अभी जारी है क्योंकि इसमें कई अन्य नाम भी संज्ञान में आये बताये जा रहे हैं। कुल मिलाकर सचिन के बरामद होने पर पूरे हैदरगढ़ में खुशी की लहर दौड़ गयी। कस्बे वासी पुलिस अधीक्षक सहित हैदरगढ़ कोतवाली पुलिस को मुबारकबाद दे रही है।

