हर वर्ष 9 लाख भारतीय तम्बाकू सेवन के कारण मरते: DM
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अन्तर्गत जनमानसन में जागरूकता पैदा करने हेतु डीआरडीए गॉधी सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन जिलाधिकारी अजय यादव ने मुख्य विकास अधिकारी ऋषिरेन्द्र कुमार एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. रवीन्द्र कुमार के साथ दीप प्रज्वलित करके किया। कार्यक्रम में जनपद के समस्त जनपद स्तरीय अधिकारियों ने भाग लिया। राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम से सम्बन्धित प्रान्तीय स्तर के प्रतिनिधियों ने कार्यशाला में विशेष रूप से प्रतिभाग किया। राज्य स्तरीय प्रतिनिधि सतीश त्रिपाठी ने सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पादन, विज्ञापन का प्रतिबन्ध और व्यापार तथा वाणिज्य, उत्पादन, प्रदाय और वितरण का विनिमय अधिनियम-2003 की धारा-12 (1) एवं 21(1) के अधीन शक्ति का प्रयोग करके राज्यपाल महोदय द्वारा इस अधिसूचना के गजट प्रकाशित होने के दिनांक से नगर विकास विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के अधीन तैनात चिकित्सा निरीक्षक एवं गृह विभाग के अधीन तैनात समस्त पुलिस निरीक्षकों, उप निरीक्षकों को अपनी अधिकारिता क्षेत्र के अन्तर्गत उक्त अधिनियम के अधीन शक्तियों का प्रयोग करने एवं कर्तव्यों के पालन हेतु अधिकृत करने के सम्बन्ध में जानकारी दी। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने तम्बाकू सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विश्व में 60 लाख लोग हर वर्ष तम्बाकू सेवन से अपनी जान गवाते है, लगभग हर वर्ष 9 लाख भारतीय तम्बाकू सेवन के कारण मरते जो क्षय रोग, एड्स एवं मलेरिया से होने वाली मौतों से अधिक है। इसलिए इस भीषण त्रासदी को रोकने हेतु हम सभी को मिलकर तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों का पालन करना पडेगा। मुख्य विकास अधिकारी ऋषिरेन्द्र कुमार ने बताया कि प्रतिदिन 2200 से अधिक भारतीय तम्बाकू सेवन के कारण मरते है तथा भारत में कैंसर से मरने वाले 100 रोगियों में 40 तम्बाकू के प्रयोग के कारण मरते है। लगभग 95 प्रतिशत मुख का कैंसर तम्बाकू सेवन करने वालो को होता है। उ.प्र. राज्य तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ द्वारा चलाये जा रहे इस कार्यक्रम मे सबका सहयोग एवं जागरूकता अति आवश्यक है। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जानकारी दी कि तम्बाकू सेवन से न केवल कैंसर होता बल्कि हृदय रोग, मधुमेह, टीवी, लकवा, दृष्टिविहीनता, फेफडे के रोग व श्वास सम्बन्धी रोग भी होते है। किशोरावस्था से ही तम्बाकू सेवन करने से नपुंसकता होती है। धूम्रपान करने वाला व्यक्ति न केवल अपने जीवन के लिए बल्कि अपने परिवार व समाज के लिए भी कैंसर का खतरा पैदा करता है। इसलिए राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के प्रति जनमानस को जागरूक करना हमसभी की प्राथमिकता है। नोडल अधिकारी तम्बाकू निंयत्रण कार्यक्रम बाराबंकी डा. केएनएम त्रिपाठी ने जानकारी दी कि धूम्रपान छोड़ने के 20 मिनट बाद रक्तचाप व हृदयगति सामान्य हो जाती है, 24 घण्टे बाद शरीर से जहरीली गैस निकल जाती है, 72 घण्टे बाद सॉस लेना आसान हो जाता है। 2 से 4 सप्ताह बाद रक्त संचार में सुधार आ जाता है। कार्यशाला का संचालन अजमुद्दीन अशरफ इ्रस्लामिया इण्टर कालेज के प्राचार्य मो. एहरार एवं फाइलेरिया निरीक्षक केके गुप्ता द्वारा किया गया। कार्यशाला में जिला कार्यक्रम प्रबन्धक अमरीश द्विवेदी, समस्त अधीक्षक, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी सामु.प्रा.स्वा.केन्द्र, समस्त अपर, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी, स्वयंसेवी संस्था के प्रतिनिधि, विद्यालय, कालेजो के प्राचार्य, संक्रामण रोग नियंत्रण प्रभारी डा. डीपी सिंह आदि मौजूद रहे।
बाराबंकी। राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अन्तर्गत जनमानसन में जागरूकता पैदा करने हेतु डीआरडीए गॉधी सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन जिलाधिकारी अजय यादव ने मुख्य विकास अधिकारी ऋषिरेन्द्र कुमार एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. रवीन्द्र कुमार के साथ दीप प्रज्वलित करके किया। कार्यक्रम में जनपद के समस्त जनपद स्तरीय अधिकारियों ने भाग लिया। राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम से सम्बन्धित प्रान्तीय स्तर के प्रतिनिधियों ने कार्यशाला में विशेष रूप से प्रतिभाग किया। राज्य स्तरीय प्रतिनिधि सतीश त्रिपाठी ने सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पादन, विज्ञापन का प्रतिबन्ध और व्यापार तथा वाणिज्य, उत्पादन, प्रदाय और वितरण का विनिमय अधिनियम-2003 की धारा-12 (1) एवं 21(1) के अधीन शक्ति का प्रयोग करके राज्यपाल महोदय द्वारा इस अधिसूचना के गजट प्रकाशित होने के दिनांक से नगर विकास विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के अधीन तैनात चिकित्सा निरीक्षक एवं गृह विभाग के अधीन तैनात समस्त पुलिस निरीक्षकों, उप निरीक्षकों को अपनी अधिकारिता क्षेत्र के अन्तर्गत उक्त अधिनियम के अधीन शक्तियों का प्रयोग करने एवं कर्तव्यों के पालन हेतु अधिकृत करने के सम्बन्ध में जानकारी दी। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने तम्बाकू सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विश्व में 60 लाख लोग हर वर्ष तम्बाकू सेवन से अपनी जान गवाते है, लगभग हर वर्ष 9 लाख भारतीय तम्बाकू सेवन के कारण मरते जो क्षय रोग, एड्स एवं मलेरिया से होने वाली मौतों से अधिक है। इसलिए इस भीषण त्रासदी को रोकने हेतु हम सभी को मिलकर तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों का पालन करना पडेगा। मुख्य विकास अधिकारी ऋषिरेन्द्र कुमार ने बताया कि प्रतिदिन 2200 से अधिक भारतीय तम्बाकू सेवन के कारण मरते है तथा भारत में कैंसर से मरने वाले 100 रोगियों में 40 तम्बाकू के प्रयोग के कारण मरते है। लगभग 95 प्रतिशत मुख का कैंसर तम्बाकू सेवन करने वालो को होता है। उ.प्र. राज्य तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ द्वारा चलाये जा रहे इस कार्यक्रम मे सबका सहयोग एवं जागरूकता अति आवश्यक है। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जानकारी दी कि तम्बाकू सेवन से न केवल कैंसर होता बल्कि हृदय रोग, मधुमेह, टीवी, लकवा, दृष्टिविहीनता, फेफडे के रोग व श्वास सम्बन्धी रोग भी होते है। किशोरावस्था से ही तम्बाकू सेवन करने से नपुंसकता होती है। धूम्रपान करने वाला व्यक्ति न केवल अपने जीवन के लिए बल्कि अपने परिवार व समाज के लिए भी कैंसर का खतरा पैदा करता है। इसलिए राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के प्रति जनमानस को जागरूक करना हमसभी की प्राथमिकता है। नोडल अधिकारी तम्बाकू निंयत्रण कार्यक्रम बाराबंकी डा. केएनएम त्रिपाठी ने जानकारी दी कि धूम्रपान छोड़ने के 20 मिनट बाद रक्तचाप व हृदयगति सामान्य हो जाती है, 24 घण्टे बाद शरीर से जहरीली गैस निकल जाती है, 72 घण्टे बाद सॉस लेना आसान हो जाता है। 2 से 4 सप्ताह बाद रक्त संचार में सुधार आ जाता है। कार्यशाला का संचालन अजमुद्दीन अशरफ इ्रस्लामिया इण्टर कालेज के प्राचार्य मो. एहरार एवं फाइलेरिया निरीक्षक केके गुप्ता द्वारा किया गया। कार्यशाला में जिला कार्यक्रम प्रबन्धक अमरीश द्विवेदी, समस्त अधीक्षक, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी सामु.प्रा.स्वा.केन्द्र, समस्त अपर, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी, स्वयंसेवी संस्था के प्रतिनिधि, विद्यालय, कालेजो के प्राचार्य, संक्रामण रोग नियंत्रण प्रभारी डा. डीपी सिंह आदि मौजूद रहे।

