छुट्टा पशुओं का आतंक, किसान परेशान
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। छुट्टा पशुओं की दिन पर दिन बढ़ती फौज अन्नदाता किसान के लिये
परशानी का सबब बनते जा रहे हैं। हाड़-तोड़ मेहनत कर तैयार की गयी फसलों को
बचाने के लिये किसान रात दिन खेतों में हांका लगाने को मजबूर है किसानो
की थोड़ी सी लापरवाही में यह छुट्टा पशु (सांड) की फौज देखते ही देखते
चौपट कर देते हैं। गौरतलब हो कि कृषि कार्य में बैलो की उपयोगिता कम होने
के कारण पशु पालक मादा बच्चो को तो पाल लेते है परन्तु पशु (बछड़ा) को
थोड़ा बड़ा होते ही छुट्टा छोड़ देते है। यही पशुअ आगे किसानो के लिये जी का
जंजाल बनते जा रहे हैं। वहीं मसौली चौराहे के निकट प्रत्येक मंगलवार को
लगने वापली पशु बाजार में लोग वाहनो में नर पशुओं को लोकर छोड़कर चले जाते
है। जिसके ही चलते क्षेत्र में दर्जनो के झुंड में सांड घूमते रहते है और
किसानो की फसलों को अपना ग्रास बनाते है। फसलो को बचाने के लिये अन्नदाता
किसान खेतो में ही रात दिन गुजार रहे है। जिससे किसान काफी परेशा है।
क्षेत्र के ग्राम मसौली, बड़ागांव, ज्योरी, अमदहा, कोटवा, मेढ़िया भयारा,
नैनामऊ, दहेजिया, शेरपुर, सादामऊ, नेवला करसण्डा सहित तमाम गांव के किसान
खेतो में मचान बनाकर रातो-रात जागकर पशुओ का हांका लगाते है फिर भी झुंड
के झुंड घूम रहे आवारा पशु मौका पाते ही फसल के ग्रास बनाकर चौपट कर देते
है। वही इन छुट्टा पशुओ में कई ऐसे सांड है जो मरकहे होने के कारण किसानो
पर हमला कर देते है जिससे रात्रि में किसान समूहों में जागकर रतजगा करने
को मजबूर है। ग्राम बड़ागांव के कृषक सुनील कुमार वर्मा, मो. उमर, मंशाराम
चौहान, सहजराम रावत, लल्लन, पांचू वर्मा, विजय कुमार आदि लोगो ने बताया
कि कड़ी मेहनत एवं लागत लगाकर तैयार की गयी। फसल को बचाने के लिये यदि
खेतो में नही रहेंगे तो घर को अनाज का एक दाना भी नही जायेगा फसल बोने के
बाद से ही रात-दिन खेतो में गुजरना पड़ रहा है। दहेजियों के किसान बंशीलाल
ने बताया कि कड़ाके की सर्दी में भी रात को जागकर फसलो की रखवाली करनी पड़
रही है। सुमेरी बाबा, राजेश वर्मा, दृगपाल यादव, अशोक वर्मा ने कहा कि
अधिक लागत के चलते वैसे भी खेती घाटे का सौदा साबित होती है और अब
क्षेत्र में छुट्टा पशुओ की बढ़ती तादात किसानो को कंगाल करने में जुटे
है। छुटटा पशुओ एवं नीलगायो की घमा चौकड़ी के चलते वैसे ही क्षेत्र में
अरहर की खेती समाप्त हो चुकी है और यही हाल रहा तो किसान अमूक-अमूक
बीमारी झेलने को मजबूर हो जायेंगे और किसान खेती के बजाय मजदूरी करने को
विवश होंगे। क्षेत्रीय किसानो ने जिला प्रशासन से क्षेत्र में आवारा पशुओ
की बढ़ती फौज से छुटकारा दिलाने की मांग की है।
बाराबंकी। छुट्टा पशुओं की दिन पर दिन बढ़ती फौज अन्नदाता किसान के लिये
परशानी का सबब बनते जा रहे हैं। हाड़-तोड़ मेहनत कर तैयार की गयी फसलों को
बचाने के लिये किसान रात दिन खेतों में हांका लगाने को मजबूर है किसानो
की थोड़ी सी लापरवाही में यह छुट्टा पशु (सांड) की फौज देखते ही देखते
चौपट कर देते हैं। गौरतलब हो कि कृषि कार्य में बैलो की उपयोगिता कम होने
के कारण पशु पालक मादा बच्चो को तो पाल लेते है परन्तु पशु (बछड़ा) को
थोड़ा बड़ा होते ही छुट्टा छोड़ देते है। यही पशुअ आगे किसानो के लिये जी का
जंजाल बनते जा रहे हैं। वहीं मसौली चौराहे के निकट प्रत्येक मंगलवार को
लगने वापली पशु बाजार में लोग वाहनो में नर पशुओं को लोकर छोड़कर चले जाते
है। जिसके ही चलते क्षेत्र में दर्जनो के झुंड में सांड घूमते रहते है और
किसानो की फसलों को अपना ग्रास बनाते है। फसलो को बचाने के लिये अन्नदाता
किसान खेतो में ही रात दिन गुजार रहे है। जिससे किसान काफी परेशा है।
क्षेत्र के ग्राम मसौली, बड़ागांव, ज्योरी, अमदहा, कोटवा, मेढ़िया भयारा,
नैनामऊ, दहेजिया, शेरपुर, सादामऊ, नेवला करसण्डा सहित तमाम गांव के किसान
खेतो में मचान बनाकर रातो-रात जागकर पशुओ का हांका लगाते है फिर भी झुंड
के झुंड घूम रहे आवारा पशु मौका पाते ही फसल के ग्रास बनाकर चौपट कर देते
है। वही इन छुट्टा पशुओ में कई ऐसे सांड है जो मरकहे होने के कारण किसानो
पर हमला कर देते है जिससे रात्रि में किसान समूहों में जागकर रतजगा करने
को मजबूर है। ग्राम बड़ागांव के कृषक सुनील कुमार वर्मा, मो. उमर, मंशाराम
चौहान, सहजराम रावत, लल्लन, पांचू वर्मा, विजय कुमार आदि लोगो ने बताया
कि कड़ी मेहनत एवं लागत लगाकर तैयार की गयी। फसल को बचाने के लिये यदि
खेतो में नही रहेंगे तो घर को अनाज का एक दाना भी नही जायेगा फसल बोने के
बाद से ही रात-दिन खेतो में गुजरना पड़ रहा है। दहेजियों के किसान बंशीलाल
ने बताया कि कड़ाके की सर्दी में भी रात को जागकर फसलो की रखवाली करनी पड़
रही है। सुमेरी बाबा, राजेश वर्मा, दृगपाल यादव, अशोक वर्मा ने कहा कि
अधिक लागत के चलते वैसे भी खेती घाटे का सौदा साबित होती है और अब
क्षेत्र में छुट्टा पशुओ की बढ़ती तादात किसानो को कंगाल करने में जुटे
है। छुटटा पशुओ एवं नीलगायो की घमा चौकड़ी के चलते वैसे ही क्षेत्र में
अरहर की खेती समाप्त हो चुकी है और यही हाल रहा तो किसान अमूक-अमूक
बीमारी झेलने को मजबूर हो जायेंगे और किसान खेती के बजाय मजदूरी करने को
विवश होंगे। क्षेत्रीय किसानो ने जिला प्रशासन से क्षेत्र में आवारा पशुओ
की बढ़ती फौज से छुटकारा दिलाने की मांग की है।

