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पुरोधा रामसेवक यादव के अरमानों को दफन करने में जुटे सपाई: पुनिया


अजमी रिज़वी
बाराबंकी। स्थानीय निकाय विधान परिषद् चुनाव में सपा ने समाजवाद के पुरोधा रामसेवक यादव के अरमानों को दफन करके जनपद की पहचान को मिटाने का काम किया हैं। पार्टी के इस निर्णय से उसका असली चेहरा सामने आ गया हैं कि समाजवादी पार्टी को समाजवाद से कोई लेना देना नही हैं। समाजवाद के ठेकेदारों ने समाजवाद को एक ऐसी चौखट पर गिरवी रख दिया हैं, जिसका समाजवाद से दूर-दूर तक कोई लेना देना नही हैं। उक्त प्रतिक्रिया राज्यसभा सांसद डॉ. पीएल पुनिया ने स्थानीय निकाय विधान परिषद् के चुनाव पर व्यक्त करते हुए कहा कि मेरा सौभाग्य हैं कि समाजवाद के पुरोधा स्व. रामसेवक यादव की जन्मभूमि मेरी कर्मभूमि हैं और स्व. यादव मेरे ही नही सम्पूर्ण जनपद के सम्मानित नेता ही नही देश में जनपद की पहचान थे। उन्हीं के पदचिन्हों पर राजनीति में चलकर मैंने समाज के अंतिम व्यक्ति के दिल में अपना स्थान बनाने की कोशिश की हैं। स्थानीय निकाय विधान परिषद् चुनाव पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए श्री पुनिया ने स्पष्ट रूप से कहा कि चुनाव में प्रत्याशी उतारना न उतारना पार्टी हाईकमान का निर्णय हैं लेकिन जनपद मेरी राजनैतिक कर्मभूमि होने के कारण यहां की आवाम के दिलों की बैचेनी की जानकारी होना हमें भी जरूरी हैं। उन्होने कहा कि वर्तमान में देश की भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार व प्रदेश की समाजवादी पार्टी की अखलेश सरकार ने आवाम की जरूरतें उनके एहसास उसकी सोच को बलायें ताख पर रखकर ऐसे निर्णय लेने में मशगूल हैं, जिसमें न तो आवाम का हित हैं न पार्टी का। आज भाजपा,सपा के निष्ठावान, समर्पित कार्यकर्ताओं की आंखों में आसूं व बेबसी हैं। श्री पुनिया ने जनपद की आवाम और स्थानीय निकाय विधान परिषद् चुनाव के मतदाताओं से अपील की हैं कि समाजवाद के दुश्मनों, देश को बांटने वालों, नफरत की दीवार खड़ी करने वालों के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष का एैलान करो क्योंकि हक की लड़ाई में जनपद की आवाम ने हमेशा हक के पक्ष में अपनी राय जाहिर की हैं। 

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