जंतर-मंतर पर धरना देंगी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां: सिद्दीकी
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। उत्तर प्रदेश राज्य आंगनबाडी कर्मचारी संघ के अहृवान पर प्रदेश की हजारो आंगनबाडी कार्यकत्रियां व सहायिकायें अपनी मांगो को लेकर 15 व 16 फरवरी को नई दिल्ली के जन्तर मन्तर पर धरना प्रदर्शन करेगी। यह बात उत्तर प्रदेश आंगनबाडी संघ के प्रांतीय महासचिव सुलेमान सिद्दीकी ने भिटरिया में पत्रकारो से वार्ता के दौरान कही। उन्होने कहा कि आंगनबाडी कार्यकत्रियों से चुनाव के साथ साथ पल्स पोलियों, जनगणना, बीएलओं एवं अन्य आवश्यक कार्य सरकार द्वारा कराया तो जाता है लेकिन न उन्हे आज तक सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया गया और न ही मानदेय में बढोत्तरी की जाती है। करीब चार दशक से संचालित बाल विकास परियोंजनाओं में कार्यरत आंगनबाडी कार्यत्रियों को बधुवां मजदूरो जैसी जिन्दगी जीनो को विवष किया जा रहा है। हर सरकारी चुनाव के दौरान तरह तरह के लुभावने नारे देकर वोट तो हासिल कर लेती है लेकिन सरकार बनने के बाद इन कार्यकत्रियों की कोई सुध नही लेता है। 2012 के विधान सभा चुनाव में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने इलाहाबाद की जनसभा मेें कहा था यदि हमारी सरकार बनी तो हम आंगनबाडी कर्मचारियों को राजकीय कर्मचारी का दर्जा दिलाउंगा परन्तु 4 वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रदेश की सपा सरकार ने कार्यत्रियों को राज्य कर्मचारी घोषित करने को कौन कहे मानदेय में बढोत्तरी तक नही की गई। श्री सिद्दीकी ने कहा कि इस भीषण महंगाई को देखते हुए आंगनबाडी कार्यत्रियों को 15 हजार एंव सहायकाओं को 10 हजार रूपये मानदेय दिया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त मुफ्त शिक्षा, चिकित्सा एंव पेशन सुबिधा भी दिलाई जानी चाहिएं। इतना ही नही सभी मुख्य सेविका के रिक्त पदो पर पात्र आंगनबाडी कार्यत्रियों को पदोन्नति एवं आंगनबाडी कार्यत्रियों के रिक्त पदो पर सहायिकाओं को प्रोन्नति दिये जाने की मांग काफी अरसे से की जा रही है लेकिन केन्द्र व प्रदेश की सरकारो द्वारा कोई भी कदम नही उठाया जा रहा है उन्होने कहा कि जन्तर मंतर पर होने वाला प्रदर्शन निर्णायक होगा क्योकि इसमें 4 लाख से भी अधिक आंगनबाडी एंव सहायिकाएं पहुंच रही है। आंगनबाडी नेता श्री सिद्दीकी ने कहा कि बाल विकास सेवा एंव पुष्टाहार निदेशालय द्वारा जारी शासना देश के अनुसार कार्यत्रियों से अन्य विभागो के कार्य नही लिए जा सकते क्योकि महिला कर्मी होने के नाते न इन्हे आने जाने में दिक्कत होती है बल्कि जो मानदेय मिलता है उसमें बाहर निकलकर कार्य करना बडा कठिन होता है ऐसे में हमारी मांग है कि शासनादेश का पालन करते हुए केन्द्र संचालन के समय इनसे इनसे अन्य कोई कार्य न कराया जाय।

