शिविर में जैविक खेती के बताए गए तरीके
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अजमी रिज़वी
हैदरगढ़ बाराबंकी। सेवारत कर्मचारियों व प्रसार कार्यकर्ताओं को जैविक खेती की जानकारी देने के लिए आज कृषि विज्ञान केन्द्र पर एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें जैविक खेती के तरीकों की जानकारी दी गयी। केन्द्र के सस्य विभाग द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण में सस्य वैज्ञानिक डा0 जे.पी सिंह ने बताया कि जैविक खेती में किसी भी प्रकार का रसायन चाहे खर पतवार नाशी हो या फिर कीटनाशकी व फफूंदीनाशी हो प्रयोग नहीं किया जाता। यही नहीं 8-10 साल के मनवर्जन पीरियड में रसायनों द्वारा प्रदूषित भूमि व वातावरण को शुद्ध किया जाता है। इस पद्धति में अजैविक खेत से जैविक खेत में किसी तरह का पदार्थ आने से रोंकने के लिए बफर जोन भी छोड़ा जाता है। इस खेती में जैविक खाद व उत्पाद का प्रयोग किया जाता है। पशु पालन वैज्ञानिक डा0 सुरेन्द्र सिंह ने वर्मी कम्पोस्टिंग व नाडैय कम्पोस्टिंग के वैज्ञानिक तरीकों पर चर्चा की। मत्स्य पालन वैज्ञानिक डा0 जी.डी निगम ने जैविक विधि से मछली पालन व उसके लाभों से अवगत कराया। केन्द्र के कार्यक्रम समन्वयक डा0 एस.पी सिंह ने जैव कीटनाशी, फफूंदीनाशी, टाइको डरमा, राइजो बियम कल्चर एजोटो बैम्टर नीम की खली व तेल के माध्यम से रोगों, कीटों का बचाव करके जैविक खेती को आज के समय की आवश्यकता बताया। प्रशिक्षण सहायक श्री बिट्ठल ने मृदा परीक्षण के आधार पर जैविक खादों, हरी खाद व जैव उर्वरकों के प्रयोग की जानकारी दी।
हैदरगढ़ बाराबंकी। सेवारत कर्मचारियों व प्रसार कार्यकर्ताओं को जैविक खेती की जानकारी देने के लिए आज कृषि विज्ञान केन्द्र पर एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें जैविक खेती के तरीकों की जानकारी दी गयी। केन्द्र के सस्य विभाग द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण में सस्य वैज्ञानिक डा0 जे.पी सिंह ने बताया कि जैविक खेती में किसी भी प्रकार का रसायन चाहे खर पतवार नाशी हो या फिर कीटनाशकी व फफूंदीनाशी हो प्रयोग नहीं किया जाता। यही नहीं 8-10 साल के मनवर्जन पीरियड में रसायनों द्वारा प्रदूषित भूमि व वातावरण को शुद्ध किया जाता है। इस पद्धति में अजैविक खेत से जैविक खेत में किसी तरह का पदार्थ आने से रोंकने के लिए बफर जोन भी छोड़ा जाता है। इस खेती में जैविक खाद व उत्पाद का प्रयोग किया जाता है। पशु पालन वैज्ञानिक डा0 सुरेन्द्र सिंह ने वर्मी कम्पोस्टिंग व नाडैय कम्पोस्टिंग के वैज्ञानिक तरीकों पर चर्चा की। मत्स्य पालन वैज्ञानिक डा0 जी.डी निगम ने जैविक विधि से मछली पालन व उसके लाभों से अवगत कराया। केन्द्र के कार्यक्रम समन्वयक डा0 एस.पी सिंह ने जैव कीटनाशी, फफूंदीनाशी, टाइको डरमा, राइजो बियम कल्चर एजोटो बैम्टर नीम की खली व तेल के माध्यम से रोगों, कीटों का बचाव करके जैविक खेती को आज के समय की आवश्यकता बताया। प्रशिक्षण सहायक श्री बिट्ठल ने मृदा परीक्षण के आधार पर जैविक खादों, हरी खाद व जैव उर्वरकों के प्रयोग की जानकारी दी।

