युवा जागृति के तत्वाधान में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। हरी हरी धानी चुनरिया ओढे घरती मइया“ गीत ने ऐसा धमाल मचाया कि भीड भी उठ कर लोक गायक कलाकारों के साथ झूम उठें। मौका था सांस्कृतिक मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से युवा जागृति एवं विकास संस्थान द्वारा आयोजित सांस्कृतिक संध्या का। सांस्कृति संध्या में विशेष तौर पर ग्रामीण कलाकारो को प्रतिमा प्रर्दशन का मौका दिया गया जिसमें लोक कलाकर उमेश विवंेला ने उमडी भीड की खूब तालियॉ बटोरी। भगवानपुर निवासी राम गोपाल रावत ने “मस्त बहार है, रंगों की फुहार है, आजा मेरे साजना दिल की पुकार है.....“ ग्राम निरऊमऊ से आये राम आधार “अज्ञानी“ ने नशा और दहेज पर गीत गाकर कुरीतियों से बचने का संदेश दिया। महिलाए भी इस कार्यक्रम में पीछे नही रही। निवासी कु. बबली वर्मा ने “राधे ने चुराई बॅसुरिया“ मोह लिया। लगभग ढ़ाई घण्टे तक इस कार्यक्रम में ग्रामीण महिलाओं ने अपने लोक गीत प्रस्तुति कियंे। दो दिवसीय सांस्कृतिक संध्या का समापन करते हुए समाज सेवी प्रदीप सारंग ने कहा कि लोक संस्कृति की रक्षा राष्ट्र की रक्षा से कमतर नही होती है। श्री सारंग ने कहा कि कवि सम्मेलन मुशायरा व लोक संस्कृति कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता को मजबूरी प्रदान करते है। इस अवसर पर संस्था संरक्षण हरि प्रसाद वर्मा सहित राम मूर्ति, शैलेश कुमार, कौशल वर्मा ने भी विचार व्यस्त किये।
बाराबंकी। हरी हरी धानी चुनरिया ओढे घरती मइया“ गीत ने ऐसा धमाल मचाया कि भीड भी उठ कर लोक गायक कलाकारों के साथ झूम उठें। मौका था सांस्कृतिक मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से युवा जागृति एवं विकास संस्थान द्वारा आयोजित सांस्कृतिक संध्या का। सांस्कृति संध्या में विशेष तौर पर ग्रामीण कलाकारो को प्रतिमा प्रर्दशन का मौका दिया गया जिसमें लोक कलाकर उमेश विवंेला ने उमडी भीड की खूब तालियॉ बटोरी। भगवानपुर निवासी राम गोपाल रावत ने “मस्त बहार है, रंगों की फुहार है, आजा मेरे साजना दिल की पुकार है.....“ ग्राम निरऊमऊ से आये राम आधार “अज्ञानी“ ने नशा और दहेज पर गीत गाकर कुरीतियों से बचने का संदेश दिया। महिलाए भी इस कार्यक्रम में पीछे नही रही। निवासी कु. बबली वर्मा ने “राधे ने चुराई बॅसुरिया“ मोह लिया। लगभग ढ़ाई घण्टे तक इस कार्यक्रम में ग्रामीण महिलाओं ने अपने लोक गीत प्रस्तुति कियंे। दो दिवसीय सांस्कृतिक संध्या का समापन करते हुए समाज सेवी प्रदीप सारंग ने कहा कि लोक संस्कृति की रक्षा राष्ट्र की रक्षा से कमतर नही होती है। श्री सारंग ने कहा कि कवि सम्मेलन मुशायरा व लोक संस्कृति कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता को मजबूरी प्रदान करते है। इस अवसर पर संस्था संरक्षण हरि प्रसाद वर्मा सहित राम मूर्ति, शैलेश कुमार, कौशल वर्मा ने भी विचार व्यस्त किये।

