परवान चढ़ी गोडसेवादी विचार धारा: दीक्षित
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या के बाद से ही देश में दो विचार धारायें सामने आयी थी। एक गांधीवाद और दूसरा गोडसेवाद। कहीं न कहीं गांधीवादी विचारधारा देश में पिछड़ती गयी और गोडसेवादी विचारधारा परवान चढ़ती रही। जिसका भव्य रूप आज हमारे सामने है। उक्त विचार जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष बृजेश दीक्षित, गांधी भवन देवां रोड पर अखिल भारतीय विधान सभा द्वारा आयोजित ‘‘देश भक्ति व देश द्रोह का प्रमाण पत्र जारी करने वाले लोग कौन हैं’’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में अपने अध्यक्षीय भाषण में व्यक्त कर रहे थे। उन्होनें कहा कि एक सोची समझी रणनीति के तहत गोडसे की विचार धारा का समर्थन करने वाली शक्तियाँ समय-समय पर अपनी रणनीति बदलती रही। कभी गैर कांग्रेसवाद के नाम पर और कभी गैर साम्यवाद के नाम पर सत्ता के लोभी राजनीतिक दलों की बैसाखी का सहारा उन्होनें लिया और आज जब वह केन्द्र की सत्ता पर मजबूती से बैठ गये हैं तो अपने ही दल के उन नेताओं को किनारे लगा दिया जो लचीला रूख रखते थे। परिचर्चा में अपने विचार रखते हुए रिहाई मंच के अध्यक्ष मो. शुऐब एडवोकेट ने कहा कि आज देश की दिशा व दशा का संचालन पूंजीपति कर रहे हैं। यह बात किसी से छुपी नहीं है कि आज के मीडिया हाउस का संचालन कौन शक्तियाँ कर रही हैं और देश पर हुकुमत कर रही इन कठपुतलियों को नचानेवाले कौन हैं। गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सहसचिव रणधीर सिंह सुमन एडवोकेट ने कहा कि जिस प्रकार से जेएनयू को मुद्दा बनाकर पेश किया गया है यह एक गम्भीर बात है और नागपुरी मुख्यालय में बैठे लोगों की सोची समझी रणनीति का एक हिस्सा है।
गोष्ठी में उप्र अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम के निदेशक इज़हार हुसैन, भाकपा के जिला सचिव बृजमोहन वर्मा, महन्त गुरूशरणदास, डा. तस्खीर हसन नदवी, डा. रामगोपाल वर्मा, डा. एसएम हैदर, डा. कौसर हुसैन आदि ने सम्बोधित किया।
गोष्ठी में प्रमुख रूप से किसान सभा के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह, महामंत्री सत्येन्द्र कुमार, डा. उमेश चन्द्र, नीरज वर्मा एडवोकेट, भोला, रामनरेश, मुनेश्वर, अवधेश, टिंकू, उत्तम, अरूण, रमेश, रामलखन, राजेश, बलराम सिंह, पुष्पेन्द्र सिंह, कर्मवीर सिंह, गनेश सिंह, आदि लोग उपस्थित थे तथा संचालन मो. तारिक खान ने किया।

