ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना फ़ातिमा की सीरत है: मौलाना बाकिर
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। माद्दियात को नुकसान पहुंचाने वाला छोटा और सिस्टम को नुुकसान पहुंचाने वाला बड़ा दुश्मन होता है। यह बात पंाच रोजा अजाए फातमी की मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना गुलाम अस्करी हाल में मुम्बई से आये मौलाना सै. फैय्याज बाकिर हुसैनी साहब किबला ने कहा। मौलाना ने ये भी कहा दीन इस्लाम की जरूरियात को पूरा करने का नाम है, हिजाब को दुश्मन के सामने बाकी रखना तहरीक भी है, जवाब भी है। दुश्मन आज सायवर वार से इस्लाम को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। मुसलमान जिसका शिकार हो रहा है आज दीन से ज्यादा इस्लाम में रूसूमात ने जगह ले ली है। हमें इस पर गौरो फिक्र करना चाहिए क्यों कि जब कोई गलत चीज दाखिल होती है तो किसी सही चीज का हटना पड़ता है मजलिस के अन्त में जनाबे जहरा के मसायब पेश किये जिसे सुनकर मोमनीन रोने लगे मजलिस से पूर्व अजमल किन्तूरी ने पढ़ा- जिसको हासिल ही नही तेरा वसीला जहरा, उसकी तकदीर में रहता है अंधेरा जहरा। सरवर अली रिजवी ने पढ़ा- आपके बच्चों का मिल जाये गुलामी का शरफ़ इतना सरवर का बढ़ा दीजिए रूत्बा जहरा इसके अलावा मोनिस सरवर ने भी नजरानये अकीदत पेश किया। मजलिस की समाप्ति पर बानिए मजलिस ने सभी का शुक्रिया अदा किया।

