बुराइयों को देखकर खामोश रहती है वो कौमें मुर्दा होती है: मौलाना फैय्याज
https://husainijnp.blogspot.com/2016/02/blog-post_883.html
अजमी रिज़वी
बाराबंकी। अजाये फातमी की तीसरी मजलिस को खिताब करते हुए गुलाम अस्करी हाल में मुम्बई से आये इमामे जुमा मौलाना सै0 फय्याज बाकिर हुसैनी साहब किब्ला ने कहा दाइस का कोई अमल ऐसा नहीं है जो कुरआन के खिलाफ न हो, वह जो काम करते है उसी को इस्लाम समझते है जब कि इस्लाम का उससे कोई रिश्ता नही बल्कि यह जो भी करते है कुरआन के खिलाफ करते है मौलाना ने यह भी कहा दुश्मन ताकते इस्लाम को नुकसान तीन तरह से पहुंचाती है पहले लीडर से दूर करती है, फिर सिस्टम से दूर करती है जब दोनों से दूरियां बन जाती है तो अपना सिस्टम दाखिल कर देते है । मौलाना ने यह भी कहा जो बुराइयों को देखकर खामोश रहती है वो कौमें मुर्दा होती है क्योंकि बुराइयों को देखकर चुप रहना कूफी मिजाज हेाता है । अन्त में जनाबे फातिमा जहरा के मसायब को बयान किया सिजे सुनकर मोमनीन रो पड़े मजलिस से पूर्व अजमल किन्तूरी ने पढ़ा- फिक्र का गुज़रा जिधर से काफ़िला मेरे रसूल, आपका ही जा बजा देखा नूर मेरे रसूल । मुजफ्फर इमाम ने पढ़ा- मेरी हसरत है बने आपका रौजा जहरा, और हट जाये तेरी कब्र से पहरा जहरा। मोनिस सरवर ने पढ़ा- फरिश्तों जो भी चाहो मांग लो जहरा की चौखट से, यहां से कोई भी खाली हाथ लौटाया नहीं जाता। सवाल जवाब में सही जवाब देने पर मोनिस सरवर को किट बैग देकर हौसला अफजाइ किया गया।
बाराबंकी। अजाये फातमी की तीसरी मजलिस को खिताब करते हुए गुलाम अस्करी हाल में मुम्बई से आये इमामे जुमा मौलाना सै0 फय्याज बाकिर हुसैनी साहब किब्ला ने कहा दाइस का कोई अमल ऐसा नहीं है जो कुरआन के खिलाफ न हो, वह जो काम करते है उसी को इस्लाम समझते है जब कि इस्लाम का उससे कोई रिश्ता नही बल्कि यह जो भी करते है कुरआन के खिलाफ करते है मौलाना ने यह भी कहा दुश्मन ताकते इस्लाम को नुकसान तीन तरह से पहुंचाती है पहले लीडर से दूर करती है, फिर सिस्टम से दूर करती है जब दोनों से दूरियां बन जाती है तो अपना सिस्टम दाखिल कर देते है । मौलाना ने यह भी कहा जो बुराइयों को देखकर खामोश रहती है वो कौमें मुर्दा होती है क्योंकि बुराइयों को देखकर चुप रहना कूफी मिजाज हेाता है । अन्त में जनाबे फातिमा जहरा के मसायब को बयान किया सिजे सुनकर मोमनीन रो पड़े मजलिस से पूर्व अजमल किन्तूरी ने पढ़ा- फिक्र का गुज़रा जिधर से काफ़िला मेरे रसूल, आपका ही जा बजा देखा नूर मेरे रसूल । मुजफ्फर इमाम ने पढ़ा- मेरी हसरत है बने आपका रौजा जहरा, और हट जाये तेरी कब्र से पहरा जहरा। मोनिस सरवर ने पढ़ा- फरिश्तों जो भी चाहो मांग लो जहरा की चौखट से, यहां से कोई भी खाली हाथ लौटाया नहीं जाता। सवाल जवाब में सही जवाब देने पर मोनिस सरवर को किट बैग देकर हौसला अफजाइ किया गया।

