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गिराई दीवार, जलाया छप्पर


अजमी रिज़वी
बाराबंकी। सफदरगंज थाना क्षेत्र के एक दलित ने एसपी से न्याय की गुहार लगायी। एसपी को दिये प्रार्थना पत्र में मुबारकपुर निवासी अम्बरीश ने गांव के ही कुछ लोगों पर  दीवार ढहाकर छप्पर जलाने का आरोप लगाया। हैदराबाद यूनिवर्सिटी में एक दलित छात्र की आत्म हत्या का मामला अभी ठण्डा होने भी न पाया था कि जिले के सफदरगंज थाना क्षेत्र स्थित मुबारकपुर में एक दलित महिला पर दबंगो का कहर टूट पड़ा। दलित महिला की दीवार गिराकर उसके छप्पर में आग लगाने में पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। बताते है कि दबंगो के साथ मिलकर उसके पड़ोसी केशवराम ने महिला का उत्पीड़न शुरू किया था थाने में पीड़िता नीता पत्नी अमरीश कुमार द्वारा उसकी शिकायत एक दिन पूर्व ही दी गई थी। लम्बा दाव मारने की ताक में रहने वाली सफदरगंज पुलिस भला सूखी शिकायत की सुनवाई कैसे कर सकती थी। यदि समय रहते नामजद सुशील, दीपू, राहुल व अन्य को कानून की गिरफ्त में लिया जाता तो महिला का छप्पर व दीवार बचाई जा सकती थी। दबंगो की पिटाई व आगजनी के सदमें से बेहोश दलित महिला को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इतना सब होने के बाद भी सफदरगंज की होनहार पुलिस ने आरोपियों पर नजर तक डालने की जहमत उठाना मुनासिब नही समझा। महिला का छप्पर जलने की सूचना पर गांव पहुंचे सिपाही पवन व सुन्दर सिंह के बारे मंे थानाध्यक्ष का बड़ा ही नायाब जवाब सुनने को मिला, इनके अनुसार 100 नंबर से सूचना मिलने पर घटना की जानकारी लेने हेतु सिपाही भेजे गए थे। पीड़िता द्वारा दिया गया शिकायती पत्र पूरे तौर से हजम करने की नियत सफदरगंज पुलिस बना चुकी है। पीड़िता ने विगत रविवार को लिखित सूचना के माध्यम से जब अवगत  कराया तो पुलिस के सिपाही केवल मौका देखकर चले गये पीड़िता महिला की दीवार गिराने पहंुचे सुशील, दीपू, राहुल व आनंद पर समय रहते यदि कार्यवाही होती तो शायद महिला को एमरजेंसी में भर्ती नही कराना पड़ता। बीती शाम दबंगो ने महिला के छप्पर में आग लगा दी दहशत का आतंक यह कि कोई पड़ोसी भी डर के मारे आग बुझाने की हिम्मत नही कर सका। महिला को धमकाने व मारने के कारण पीड़िता मौके पर ही बेहोश होकर गिर गई बाद में ग्रामीणों की मदद से महिला को जिला अस्पताल की एमरजंेसी मे लाया गया जहां चार घंटे उपचार के बाद उसे वापस भेज दिया गया पुनः सुबह जब महिला की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी जिसके चलते उसे फिर जिला अस्पताल मंे भर्ती कराया गया। पुलिस की उदासीनता के चलते दबंग अब तक खुले आम घूम रहे है। सफदरगंज थानाध्यक्ष शायद हैदराबाद की तरह से बाराबंकी को भी सुर्खियों में लाने की कोशिश में लगे हुए है। इसकी नायाब कार्यशैली के चलते यदि यहां के दलित भी आत्म हत्या को मजबूर हो जांए तो ये कोई बड़ी बात नही होगी। थाने से मायूसी हाशिल होने पर आज पीड़िता के पति अमरीश पुत्र राम खेलावन ने जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक को पत्र देकर मदद की गुहार लगाई। इस सम्बन्ध में सफदरगंज पुलिस का कहना है कि जिस छप्पर के जलाने का आरोप लगाया जा रहा है ग्रामीणों के अनुसार वह छप्पर रास्ते रखा था। जलाने की घटना फसाने की हो सकती है जांच की जा रही है दोषियों पर कार्यवाही अवश्य की जायेगी।

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