आरोपियों को बचाने मे जुटी देवा पुलिस
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। कोतवाली देवा क्षेत्र अन्तर्गत बीते एक दिन पूर्व ग्राम गांधी
नगर मजरे बबुरी गांव में दो पक्षो में कब्जेदारी को लेकर हुई खूनी भिड़ंत
का राज कुछ गहरा ही नजर आ रहा है। जो घटना बीते एक दिन पूर्व घटी उसकी
नीवं काफी पहले ही रखी जा चुकी थी। अगर पुलिस चाहती तो गांधी नगर की जमीन
खून के छीटों से लाल न होती। विवाद का मुख्य कारण 16 बीघा जमीन पर
कब्जेदारी है। पुलिस को बीती 24 जनवरी को ही जयराम द्वारा एक लिखित
शिकायती पत्र सौंपा गया था। जिसमें जयराम ने उल्लेख किया था कि विपक्षी
महेन्द्र सिंह पुत्र चन्द्रमा सिंह और राजेन्द्र पुत्र गंगा विशुन
न्यायालय में चल रहा जमीन कब्जेदारी का मुकदमा हार चुके हैं अब वह लगातार
पीड़ित और उसके साथियों को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। लेकिन शायद
पुलिस ने उस लिखित शिकायती पत्र को कूड़ेदान में फेंक दिया। आज के हालात
और 24 जनवरी का लिखित शिकायती पत्र दोनो एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
बीते एक दिन पूर्व विपक्षी सागर पुत्र महेन्द्र, कन्हैया लाल और अखिलेश
ने जयराम, रामऔतार, राम विजय और रामलाल जो कि खेत पर थे, उन पर प्राण
घातक हमला कर दिया। जयराम और रामऔतार के मुताबिक कन्हैया ने सबसे पहले
अवैध असलहे से फायर किया। जो कि रामऔतार के सिर को छूती हुई निकली। इसके
बाद फायरिंग का ताबड़तोड़ सिलसिला शुरु हो गया। इतना ही नही निहत्थे चारों
लोगों पर लाठी-डण्डो से भी हमला किया गया। चूंकि हमलावर पूरी तरह आक्रामक
थे। इसलिए इन चारों ने अपनी जान बचाने में ही भलाई समझी। जयराम घटनास्थल
से लहुलूहान हालत में भागते हुए मित्तई चौकी पहुंचता है। लेकिन वहां
मौजूद पुलिस कर्मियों की संवेदनहीनता एक बार फिर जगजाहिर होती है। पुलिस
कर्मी जख्मी पीड़ित से साफ कहते हैं कि कोतवाली जाओ, यहां से कोई मतलब
नही। ऐसे में खाकी का वो चेहरा भी सामने आता है जिसका आम आदमी बातो-बातों
में चर्चा करता रहता है। कोतवाली देवा पुलिस वैसे भी पूर्व में कई बार
अखबारों की सुर्खियों में छायी रही है। फिर चाहे वह माती चौकी काण्ड रहा
हो या फिर ग्राम कुसुम्भा में दलित की हत्या का मामला। अवैध खनन, अवैध
प्लाटिंग, अवैध कब्जेदारी, जाने तमाम कितने ऐसेे अवैध काम हैं जो कोतवाली
देवा पुलिस की संरक्षण में बखूबी दिन रात फल-फूल रहे हैं। पिछले दो बड़े
मामलों में कोतवाली प्रभारी देवा नामजद हो चुके हैं। इसके बावजूद अभी तक
देवा पुलिस को शायद इन घटनाओं से कोई शिक्षा नही मिली है। अगर गांधी नगर
मजरे बबुरी गांव में इस काण्ड के बाद कोई पुनः नृश्ंास हत्या हो जाये तो
बात बड़ी नही होगी। अगर पुलिस मुखिया थोड़ा सा अपने दिमाग पर जोर डाले तो
उन्हे गांधी नगर में बीते दिन हुई वारदात की पहली कड़ी बिल्कुल कुसुम्भा
काण्ड जैसी लगेगी। लेकिन धिक्कार पुलिस की इस कार्यशैली पर कि अभी तक
घटना के प्रमुख आरोपी पकड़ से कोसों दूर हैं। कोतवाली प्रभारी देवां जावेद
खां ने फोन पर वार्ता के दौरान बताया कि दो लोगों पकड़ लिया गया है।
लेकिन नाम बताने में असमर्थता जाहिर की।

