है इंतजार ,आये कोई मसीहा बसा दे मेरा आशियाना
https://husainijnp.blogspot.com/2016/03/blog-post_112.html
विवेक कुमार
जौनपुर । देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी विकलांग को समाज में जोड़ने का काम कर रहे वही जौनपुर जिले के शाहगंज तहसील क्षेत्र के उचगांव निवासी दिव्यांग शिव प्रसाद प्रजापति आशियाना के लिये पिछले डेढ़ वर्षो से दौड़ दौड़ कर थक चुका है ,उसे न तो शब्दों की बाजीगरी लुभाती है और न ही सरकार की उपलब्धिया का बखान ही सुहाता है। वह थककर कर बेबस हो चुका है ,लाचार दिव्यांग शिव प्रसाद पिछले डेढ़ वर्षो से अपने टूटे घर के चौखट पर आस लगाये बैठा है ,
आये कोई मसीहा बसा दे मेरा आशियाना ,गरीब असहायों की बाते सभी करते है। कोई विकलांग को समाज में जोड़ने का काम करता है ,तो कोई अपनी सरकार की उपलब्धिया गिनाते नहीं थकता। मंगलवार को सपा सरकार के चार वर्ष पुरे होने पर कार्यक्रम आयोजित होने से सोमवार को तहसील दिवस का आयोजन किया गया। अपनी फरियाद को लेकर पहुँचा दिव्यांग शिव प्रसाद ने बताया कि वह पिछले डेढ़ वर्षो से आशियाना पाने को लेकर तहसील का चक्कर लगा रहा है ,तहसील दिवस में प्रार्थना पत्र भी दे दिया है। यहाँ तक कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधियो के चौखट पर माथा टेक चुका है फिर भी उसका दर्द कोई समझ न सका ,आज तक सिर पर छत भी नसीब न हो सका ,केवल कागजी कोरम देखने को मिला ,सोमवार को आशियाना की चाह को लेकर एक बार फिर तहसील दिवस में अपनी फरियाद को लेकर पंहुचा था।
प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव गरीब असाह व दिव्यांग को हर सरकारी सुविधा देने का दावा कितना भी करते हो बस तस्वीर उनके दावे के लिये काफी है ,शिव प्रसाद बताता है कि न ही मेरे पास खेत का टुकड़ा है ,और न ही हमारे पास पक्का मकान है ,एक बूढ़े पिता इंद्रजीत बटाई पर खेती करते है ,जिससे घर का खर्चा चलता है। छोटा भाई अभी इंटरमीडियट की परीक्षा दे रहा है ,अब तक दो बहनो की शादी हो चुकी है। जबकी दो बहनो की शादी करना बाकी है ,किसी तरह अपने पुराने टूटे फूटे माकन में जीवन वयतीत कर रहा हु ,वह एक आशियाना के लिए पिछले डेढ़ वर्षो से दौड़ चुका अब तक उसे आशियाना नसीब नही हो सका ,
गरीबो की सरकार बताने वाली सपा सरकार के मंत्री व विधायक ,नेता की नजर अबतक इस गरीब
दिव्यांग पर क्यों नही पडी या पडी तो उसे कोई मदद न दिला सका ,यह सवाल एक जरूर प्रशन चिन्ह खड़ी करती है। गांव में सूर्य उदय से लेकर सूर्यास्तः तक हर कोई आपको शिवप्रसाद की गरीबी व आशियाना की बात करते दिखाई पड़ेगा ,ग्रामीणो ने ग्राम प्रधान से लेकर अधिकारियों से शिव प्रसाद दिव्यांग की आशियाना की बात कही फिर भी उसे आशियाना नसीब न हो सका। अब देखना यह होगा कि दिव्यांग शिव प्रसाद को आशियाना नसीब हो पाता है या नही।
जौनपुर । देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी विकलांग को समाज में जोड़ने का काम कर रहे वही जौनपुर जिले के शाहगंज तहसील क्षेत्र के उचगांव निवासी दिव्यांग शिव प्रसाद प्रजापति आशियाना के लिये पिछले डेढ़ वर्षो से दौड़ दौड़ कर थक चुका है ,उसे न तो शब्दों की बाजीगरी लुभाती है और न ही सरकार की उपलब्धिया का बखान ही सुहाता है। वह थककर कर बेबस हो चुका है ,लाचार दिव्यांग शिव प्रसाद पिछले डेढ़ वर्षो से अपने टूटे घर के चौखट पर आस लगाये बैठा है ,
आये कोई मसीहा बसा दे मेरा आशियाना ,गरीब असहायों की बाते सभी करते है। कोई विकलांग को समाज में जोड़ने का काम करता है ,तो कोई अपनी सरकार की उपलब्धिया गिनाते नहीं थकता। मंगलवार को सपा सरकार के चार वर्ष पुरे होने पर कार्यक्रम आयोजित होने से सोमवार को तहसील दिवस का आयोजन किया गया। अपनी फरियाद को लेकर पहुँचा दिव्यांग शिव प्रसाद ने बताया कि वह पिछले डेढ़ वर्षो से आशियाना पाने को लेकर तहसील का चक्कर लगा रहा है ,तहसील दिवस में प्रार्थना पत्र भी दे दिया है। यहाँ तक कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधियो के चौखट पर माथा टेक चुका है फिर भी उसका दर्द कोई समझ न सका ,आज तक सिर पर छत भी नसीब न हो सका ,केवल कागजी कोरम देखने को मिला ,सोमवार को आशियाना की चाह को लेकर एक बार फिर तहसील दिवस में अपनी फरियाद को लेकर पंहुचा था।
प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव गरीब असाह व दिव्यांग को हर सरकारी सुविधा देने का दावा कितना भी करते हो बस तस्वीर उनके दावे के लिये काफी है ,शिव प्रसाद बताता है कि न ही मेरे पास खेत का टुकड़ा है ,और न ही हमारे पास पक्का मकान है ,एक बूढ़े पिता इंद्रजीत बटाई पर खेती करते है ,जिससे घर का खर्चा चलता है। छोटा भाई अभी इंटरमीडियट की परीक्षा दे रहा है ,अब तक दो बहनो की शादी हो चुकी है। जबकी दो बहनो की शादी करना बाकी है ,किसी तरह अपने पुराने टूटे फूटे माकन में जीवन वयतीत कर रहा हु ,वह एक आशियाना के लिए पिछले डेढ़ वर्षो से दौड़ चुका अब तक उसे आशियाना नसीब नही हो सका ,
गरीबो की सरकार बताने वाली सपा सरकार के मंत्री व विधायक ,नेता की नजर अबतक इस गरीब
दिव्यांग पर क्यों नही पडी या पडी तो उसे कोई मदद न दिला सका ,यह सवाल एक जरूर प्रशन चिन्ह खड़ी करती है। गांव में सूर्य उदय से लेकर सूर्यास्तः तक हर कोई आपको शिवप्रसाद की गरीबी व आशियाना की बात करते दिखाई पड़ेगा ,ग्रामीणो ने ग्राम प्रधान से लेकर अधिकारियों से शिव प्रसाद दिव्यांग की आशियाना की बात कही फिर भी उसे आशियाना नसीब न हो सका। अब देखना यह होगा कि दिव्यांग शिव प्रसाद को आशियाना नसीब हो पाता है या नही।

