खुमार बाराबंकवी की याद में मुशायरा आयोजित
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अजमी रिज़वी
मसौली बाराबकी। मुशायरों की दुनिया में खुमार बाराबंकवी के बाद इस जिले
का नाम देश विदेश में रौशन कर रहे युवा शायर वसीम रामपुरी का नाम आज हर
जगह अदब के साथ लिया जा रहा है ग्रामीण अंचल से निकली ये युवा शख्सियत आज
प्रोग्राम को कामयाब करने की गारन्टी माना जाता है। हमारे सवांददाता से
रुबरु होकर सवालो के जवाब देते हुये बताया की शायरी ख्याल की गहराइयों से
निकलती है एक अच्छा शायर होने के लिये सलीका,मुताला, मुशाहिदा, और महसूस
करने की कुवत का होना बहुत जरुरी है। रामपुर गांव के मूल निवासी वसीम
रामपुरी से विख्यात है बताते है बतौर छात्र रास्टीृय पर्व में स्कूलो में
गीत पढ़ने से मिली हौसला अफजाई और 15 साल पूर्व पहले मुशासरे में रामनगर
की जनता ने जिस तरह मेरे कलामो को सर आंखों पर बैठा कर सराहा आज की
कामयाबी उसी की देन है। देश के हर हिस्सों दिल्ली मुम्बई गुजरात बिहार
लखनऊ में कामयाबी का झण्डा गाड़ कर बाराबंकी को उर्दू अदब में नया मुकाम
दिलाने वाले वसीम रामपुरी कहते है की तब बहुत निराशा होती है जब मेहनत से
तैयार की शायरी को लोग उर्दू की जानकारी के अभाव में हजम नही कर पाते और
दाद दिये बिना खामोश बैठे रह जाते जब की वही बात दूसरे इलाको में धमाल
मचा कर मुशायरो को कामयाब बना देती है। उर्दू को नयी पौध में बढ़ावा मिलना
चाहिये बताया की स्कूलो में उर्दू टीचर तैनात तो है पर साल में एक भी दिन
बच्चो को नही पढ़ाते। इससे उर्दू की खिदमत का शायरों का मकसद पूरा नही
होने वाला।

