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बेलगाम अफसरशाही का परिणाम था मुजफ्फरनगर दंगा: पुनिया


अजमी रिज़वी
बाराबंकी। मुजफ्फरनगर का दंगा इंसानियत व मानवता के नाम पर कलंक था। 27
अगस्त 2013 से 09 सितम्बर 2013 के बीच हुए दंगो में 62 निर्दोषों की जान
गयी। कोई भी सरकार इसकी नैतिक जिम्मेदारी से नही बचा सकती। प्रदेश सरकार
को आयोग की दी गयी क्लीन चिट गलत हैं क्योंकि यह दंगा सपा, भाजपा की
घृणित साजिश व बेलगाम अफसरशाही का परिणाम था।

उक्त प्रतिक्रिया अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता
राज्यसभा सांसद डॉ.पी.एल.पुनिया ने मुजफ्फरनगर दंगो की जांच के लिये
बनाये गये रिटायर जस्टिस विष्णु सहाय आयोग की रिपोर्ट में राज्य सरकार को
क्लीन चिट दिये जाने पर व्यक्त की। आयोग की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया
व्यक्त करते हुए श्री पुनिया ने कहा कि 13 दिन तक चले दंगे की सारी
जिम्मेदारी चंद अधिकारियों के सिर मढ़ना जांच के साथ मजाक हैं। इस रिपोर्ट
में असली मुजरिम बच गये हैं, सिर्फ छोटी मछलियों पर कार्यवाही की
संस्तुति की गयी हैं। सरकार को चाहिये वह अपनी गलती स्वीकार करें और जो
लोग भी दंगे के लिये दोषी हैं उनके ऊपर कार्यवाही सुनिश्चित हो क्योंकि
दंगों के दौरान भाजपा विधायक संगीत सोम व सुरेश राणा द्वारा खुलकर जहर
फैलाकर उन्माद को भड़काने का काम किया गया था, जिसके लिये उनके ऊपर पुलिस
केस भी चल रहा हैं और आयोग द्वारा उन पर भी कार्यवाही की गयी संस्तुति न
करना दंगे से पीड़ित परिवारों के न्याय के साथ नाइंसाफी हैं। सांसद श्री
पुनिया ने कहा कि मुजफ्फरनगर का दंगा उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी की
सरकार की नाकामी हैं और इसके लिये सिर्फ अधिकारियों को जिम्मेदार नही
माना जा सकता हैं क्योंकि जिस प्रदेश में जिसकी सत्ता होती हैं उस प्रदेश
के अधिकारी उसी सरकार के मुख्यमंत्री के अधीन होते हैं। ऐसे में अधिकारी
दोषी, मुख्यमंत्री और उनके वजीर निर्दोष, ये बात समझ से परें हैं। इसलिये
सरकार अपनी जिम्मेदारी से नही बच सकती। मुजफ्फरनगर दंगे के लिये प्रदेश
सरकार के मुखिया व उनके जिम्मेदार वजीर खुफियातंत्र के साथ-साथ बेलगाम
अफसरशाही सीधे तौर पर दोषी हैं। इनको किसी तरह से क्लीन चिट नही दी जा
सकती।

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