कुत्ते की होगी शादी : कौशांबी में हुआ तिलक समारोह
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अशोक केसरवानी
कौशाम्बी । यूपी के कौशांबी जिले में एक ऐसा तिलक समाहरोह देखने को मिला है । जिसे आपने न तो किसी टीवी सीरियल में देखा होगा और न ही किसी किताबो व पुराणों में । हम आपको भारत का ऐतिहासिक तिलक समाहरोह के बारे में बता रहे है, जो कोई कहानी नही बल्कि एक हकीकत है।
कौशांबी के करारी थाना इलाके में 8 मार्च दिन मंगलवार को ऐतिहासिक तिलक समारोह देखने को मिला है। वह किसी मनुष्य का नही था, बल्कि एक कुत्ते का तिलक समारोह हुआ है। जिसमे सैकड़ो लोग मय गाजा बाजा से तिलक लेके कुतिया पक्ष के लोग द्वारे पर पहुंचे। नास्ता पानी के बाद पंडित जी ने पूरे रीति रिवाज के साथ तिलक की रस्म अदा करायी। कुतिया पक्ष ने अपने हैसियत के मुताबिक फल फ्रूड् कपडे समेत 51 हजार रुपये का चढ़ावा चढ़ाया। तिलक समाहरोह में उपस्थित लोगो ने डीजे की धुन पर खूब थिरकते नजर आये।
बतादे कि करारी थाना इलाके के पवारा गांव निवासी जंगबहादुर के पास एक कुतिया थी। जिसका नाम शगुनी था। इसी तरह पड़ोस गांव शुक्लन का पूरा निवासी बसंत त्रिपाठी के पास एक कुत्ता था। जिसका नाम शगुन था। दोनों में बात चली और रिश्ता मान लिया गया । रिस्तेदार समेत गांव गिरांव के लोगो को दावत भी बटवा दिया गया। बीते दिनो मंगनी की रश्म भी पूरी कर ली गयी थी। मूहूर्त के मुताबिक 8 मार्च को तिलक समाहरोह था, जो भब्य तरीके से संपन्न हुआ। 11 मार्च को बारात का मुहूर्त है। जिसकी तैयारी में कुतिया पक्ष के लोग जुटे हुए है।
कौशाम्बी । यूपी के कौशांबी जिले में एक ऐसा तिलक समाहरोह देखने को मिला है । जिसे आपने न तो किसी टीवी सीरियल में देखा होगा और न ही किसी किताबो व पुराणों में । हम आपको भारत का ऐतिहासिक तिलक समाहरोह के बारे में बता रहे है, जो कोई कहानी नही बल्कि एक हकीकत है।
कौशांबी के करारी थाना इलाके में 8 मार्च दिन मंगलवार को ऐतिहासिक तिलक समारोह देखने को मिला है। वह किसी मनुष्य का नही था, बल्कि एक कुत्ते का तिलक समारोह हुआ है। जिसमे सैकड़ो लोग मय गाजा बाजा से तिलक लेके कुतिया पक्ष के लोग द्वारे पर पहुंचे। नास्ता पानी के बाद पंडित जी ने पूरे रीति रिवाज के साथ तिलक की रस्म अदा करायी। कुतिया पक्ष ने अपने हैसियत के मुताबिक फल फ्रूड् कपडे समेत 51 हजार रुपये का चढ़ावा चढ़ाया। तिलक समाहरोह में उपस्थित लोगो ने डीजे की धुन पर खूब थिरकते नजर आये।
बतादे कि करारी थाना इलाके के पवारा गांव निवासी जंगबहादुर के पास एक कुतिया थी। जिसका नाम शगुनी था। इसी तरह पड़ोस गांव शुक्लन का पूरा निवासी बसंत त्रिपाठी के पास एक कुत्ता था। जिसका नाम शगुन था। दोनों में बात चली और रिश्ता मान लिया गया । रिस्तेदार समेत गांव गिरांव के लोगो को दावत भी बटवा दिया गया। बीते दिनो मंगनी की रश्म भी पूरी कर ली गयी थी। मूहूर्त के मुताबिक 8 मार्च को तिलक समाहरोह था, जो भब्य तरीके से संपन्न हुआ। 11 मार्च को बारात का मुहूर्त है। जिसकी तैयारी में कुतिया पक्ष के लोग जुटे हुए है।
इस ऐतिहासिक तिलक समारोह में जिले के कई राजनैतिक दल के चेहरे भी देखने को मिले है। समारोह में आने वाले नाथ रिस्तेदारो समेत अन्य लोगो के लिए नाश्ता पानी के अलावा खाने की भी उत्तम व्यवस्था थी। इस मौके पर लोग पहुचने में नही चुके। और जमकर समारोह का आनंद लिया।

