जनपद में पुलिस की मिली भगत से होती है गोकशी
https://husainijnp.blogspot.com/2016/03/blog-post_464.html
अजमी रिज़वी
बाराबंकी। जनपद के जैदपुर, सफदरगंज, बदोसराय, मसौली, दरियाबाद,
जहॉगीराबाद, टिकैतनगर थानान्तर्गत दर्जनो गॉवो में गोकशी का धंधा कुटीर
उद्योग की तरह चल रहा है। पुलिस इस खूनी धंधे के प्रति ऑखे बंद किये है
क्योंकि उन्हे भी इस खूनी कारोबार की अकूत कमाई में हिस्सेदार बनकर चुप
रहने में भलाई नजर आती है। निर्बाध गाति से चल रहा गोकशी का धंधा इस बात
का पुख्ता प्रमाण है कि इस गैर कानूनी धंधे को खादी और खाकी का पूरा
समर्थन प्राप्त है। जिले के थाना व कस्बा जैदपुर के मुहल्ला छेदा कटरा,
बड़ा पुरा, उसरी झलका, रईस कटरा, टिकरा, टेरा मुर्तजा तथा ग्राम महमूदपुर
थाना सफदरगंज के सैदनपुर, रामपुर, दादरा, रसौली थाना कोतवाली बदोसराय के
किंतूर, मैलारागंज, टिकैतनगर थाना के कस्बा इचौली, अलियाबाद, वाजिदपुर,
चिर्रा थाना मसौली के शहावपुर, बांसा व सआदतगंज आदि स्थानो पर गोकशी का
कारोबार पूरे शबाब पर है। इन स्थानो से गोमांस के तस्कर चौपहिया साधनो से
ले जाते है। विश्वस्त सूत्रो के अनुसार थाना सफदरगंज में रसौली गॉव
निवासी करीब दर्जन भर से अधिक लोग गोमांस के धंधे से जुड़े यह लोग अपनी कई
बोलेरो गाड़िया, डीसीएम, मारूति, हाफडाला द्वारा उक्त स्थानो से गोमांस
लादकर गैर जनपदो तक ले जाते है। बताते है कि धंधे में लगी सभी बोलेरो
गाड़िया एयरकंडीशन है। जिसमें पीछे की सीट निकालकर करीब बारह कुंतल माल की
लदान होती है। यह लोग चार से साढ़े चार हजार रूपये कुंतल मांस खरीदते है।
तथा थाना मसौली के सआदतगंज की मंडी में पैसठ सौ रूपये कुंतल, लखनऊ
कैसरबाग में पछत्तर सौर रूपये प्रति कुंतल तथा जिला संभल में दस हजार
रूपये कुंतल बिक रहा है। वध किये गये गाया बैलो की भैंसो का खालो का
निस्तारण मृत पशुओ की खाल व हड्डी के ठेकेदार कर देते है। मृत पशुओ की
खालो के साथ वध की हुयी खालो को यह लोग औने पौने दामो में खरीदकर बंथरा
बाजार की मंडी में बेच देते है। गोवध के धंधे से जुड़े लोग गोवंशीय पशुओ
के वध व गोमांस की तस्करी सें इतना मुनाफा कमाते है कि उन्हे खादी व खाकी
को खुश करने मेें तनिक भी तकलीफ नही होती है। बताते है कि पशु बाजारो में
एक गाय बैल या बछड़ा एक हजार से दो हजार तक आसानी से मिल जाता है। वध के
बाद पशु का चमड़ा बारह से सोलह सौ तक, खुर सींग व हड्डिया करीब सात सौ
रूपये में, मांस औसतन दस से बीस हजार रूपया तथा पशु के पेट से निकलने
वाली थैली करीब तीस से चास सौ रूपये में बिक जाता है। यदि जानवर का चोरी
को हो या गॉव में घूम रहे सांड पकड़ में आ जाए तब तो एक जानवर से चालिस से
पजास हजार तक की आमदनी हो जाती है। वर्तमान में गोकशी का ध्ंाधा करने
वाले के हौसले काफी बुलंदी पर है। इस धंधे से मिल रही अकूत दौलत के चलते
खादी और खाकी दोनो मांस तस्करो पर मेहरबान है। पुलिस नेता गठजोड़ की
सरपरस्ती में गोवध व गोमांस का खूनी खेल काफी बड़े पैमाने पर बेखौफ चलाया
जा रहा है। गोमांस की तस्करी के धंधे के आगे अफीम मारफीन का कारोबार भी
कही नही टिकता है। बारह कुंतल मांस लादकर संभल जिला पहुॅचाने वाली बोलेरो
एक रात में पचास हजार का मुनाफा लेती है। इस धंधे में लगी कई मारूति
वाहनो की नंबर प्लेट पर एडवोकेट तक लिख रखा है।

