aajtaktimes

डीएम ने ऐसिड अटैक पीड़ितों को दिये दस लाख


अजमी रिज़वी
बाराबंकी। डीआरडीए के सभागार में रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष की एक
दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यशाला के उद्घाटन के अवसर पर
जिलाधिकारी अजय यादव ने एसिड अटैक पीड़ित परिवार को दस लाख की सहायता का
स्वीकृति पत्र एवं फतेहपुर क्षेत्र के ग्राम बहेड़ा मिठवारा निवासी पवन
कुमार के 3 वर्षीय  पुत्र अमन कुमार व 5 वर्षीय चमन कुमार को डेढ़-डेढ़ लाख
रूपये की सहायता के एफडीआर प्रदान किया। जिलाधिकारी ने इस अवसर पर कहा कि
हमारे समाज में जो पीड़ित महिलाएं है, जिनके साथ लैंगिक, एसिड, व अन्य
प्रकार की घटनाएं हुई हैं, उनको तुरन्त सहायता प्रदान की जाये। प्रदेश
सरकार ने उ0प्र0 महिला सम्मान कोष का गठन इसी उद्देश्य से किया है कि
पीड़ित महिलाओं का त्वरित इलाज व भरण पोषण हो सके। जिलाधिकारी ने कहा कि
कोई भी पीड़ित महिला इस योजना के लाभ से वंचित नही होना चाहिए। कार्यशाला
में मुख्य विकास अधिकारी ऋषिरेन्द्र कुमार ने प्रतिभागियों को योजना के
बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने के लिए वृहद जागरूकता कार्यक्रमों
को चलाने की आवश्यकता बताई। जिला प्रोबेशन अधिकारी सर्वेश कुमार पाण्डेय
ने बताया कि रानी लक्ष्मी बाई महिला सम्मान कोष का गठन कोष नियमावली-2015
के अन्तर्गत किया गया है जो यह नियमावली 6 फरवरी, 2015 से लागू है। श्री
पाण्डेय आगे बताया कि यह कोष जघन्य हिंसा की शिकार महिलाओं, बालिकाओं
जिन्हे तात्कालिक आर्थिक और चिकित्सीय राहत सुनिश्चित करायेगा। इस कोष का
उपयोग ऐसी पीड़िताओं के भरण-पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य, पुर्नरूद्धार के
साथ-साथ यदि परिस्थितिवश ऐसा अपेक्षित हो, ऐसी पीड़िताओं के अवयस्क बच्चों
के भरण-पोषण एवं शिक्षा के लिये भी किया जायेगा। डीपीओ ने कहा कि इस
योजना में उन्हें भी सहायता दी जायेगी।  महारानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान
कोष के उपयोग के बारे में श्री पाण्डेय ने पावरप्वाइंट के द्वारा बताया
कि जघन्य हिंसा की शिकार महिलाओं, बालिकाओं (आईपीसी की धारा-326क, 304ख,
376क, 376ग, 376घ एवं पाक्सो की धारा- 4, 6, 14 तथा आईपीसी की धारा-302
के साथ पाक्सो की धारा-4 या 6 के उत्पीड़न के मामलों में) के मामलों में
तात्कालिक आर्थिक व चिकित्सीय राहत पहुंचाना है। उन्होने कहा कि यदि कोई
ऐसी चिकित्सा सुविधा, जाँच जो सरकारी चिकित्सालयों, संस्थाओं में उपलब्ध
न हो परन्तु निजी क्षेत्रों में उपलब्ध हो के मामलों में भी कोष के तहत
सहायता दिया जा सकता है।  कार्यशाला में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने
पीड़ित महिलाओं, बालिकाओं की चिकित्सीय जांचों के दौरान सावधानियां एवं
त्वरित जांच कराने के फायदों के बारे में बताया। वहीं पुलिस विभाग की ओर
से आरक्षी राजकुमार ने एफआईआर की प्रक्रिया और उसकी प्रति पीड़ित को
उपलब्ध कराने के बारे में बताया। इस कार्यशाला में डा. अमरनाथ यति,
मोनिका लाल, अभिषेक, डा. रवीन्द्र पोरवाल, राजेन्द्र पाण्डेय, अनिल
मौर्य, हरीश मोहन पाण्डेय, डा सुरेश चन्द्र शर्मा, रत्नेश कुमार सहित कई
थानों के थानाध्यक्ष व उनके प्रतिनिधि, स्वास्थ्य विभाग के डाक्टर तथा
गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

Related

UP 2890951575290200671

Post a Comment

emo-but-icon

Recent

Comments

item