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केन्द्र सरकार के खिलाफ सर्राफा व्यापारियों ने की हड़ताल


अजमी रिज़वी
बाराबंकी। केन्द्रीय बजट 2016 में सोना एवं हीरे के गहनों पर एक फीसदी
उत्पाद शुल्क लगाने से देश के सर्राफा कारोबारियों में आक्रोश व्याप्त
है। आल इण्डिया जेन्स एव ज्वैलरी टेªड फाउण्डेशन तथा उत्तर प्रदेश
सर्राफा एसोसिएशन के आवाहन पर सर्राफा कारोबारियों ने तीन दिन की
सांकेतिक हड़ताल पर जाने का फैसला लिया है। इस दौरान समस्त तहसीलों कस्बो
एवं शहर के सर्राफा व्यापारी अपनी दुकाने बंद करके धरना एवं प्रदर्शन के
माध्यम से सरकार के फैसले का विरोध कर रहे हैं। सर्राफा द्वारा हड़ताल के
पहले दिन मुख्य बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। घण्टाघर के निकट धरना स्थल
पर मौजूद सर्राफा व्यापारियों को सम्बोधित करते हुये जिला महामंत्री अनिल
रस्तोगी ने कहा कि स्वर्ण अभूषणों पर एक प्रतिशत उत्पात कर लगाने से
सर्राफा उद्योग परेशान है। उन्होने कहा कि उत्पात कर लगाने से अभूषणों की
बिक्री कमजोर हो जायेगी तथा गहने मंहगे हो जायेंगे। जिससे गरीब एवं मध्यम
वर्ग के लोगों को शादी विवाह में मंगलसूत्र खरीदने में भी परेशानियों का
सामना उठाना पड़ रहा है। सर्राफा कमेटी के अध्यक्ष राजेन्द्र सोनी ने
व्यापारियों को सम्बोधित करते हुये कहा कि 2005 व 012 में सरकार ने
ज्वैलरी पर एक प्रतिशत उत्पात कर लगाने की घोषणा की थी परन्तु सर्राफा
व्यापारियों के जोरदार विरोध करने के बाद केन्द्र सरकार को व्यापारियों
के आगे झुकना पड़ा और इसे वापस ले लिया। श्री सोनी ने कहा कि 2012 में
कांग्रेस की सरकार ने कर बढ़ाने की कोशिश की थी। जिससे सर्राफा
व्यापारियों के धरने का समर्थन भाजपा ने किया था। लेकिन आज केन्द्र में
भाजपा की सरकार है। भाजपा कांग्रेस की नीति पर चल रही है। अगर केन्द्र
सरकार ने उत्पात शुल्क नही हटाया तो एक जन आन्दोलन होगा। सर्राफा
उपाध्यक्ष राजू वर्मा, साकेत रस्तोगी एवं कोषाध्यक्ष शशि शेखर गुप्ता ने
कहा कि सर्राफा व्यापारी टैक्स देने से पीछे नही हटता है। परन्तु एक्साइज
कर के नाम पर होने वाली परेशानियों एवं इस्पेक्टर राज का विरोध करेंगे।
इस मौके पर नीरज गुप्ता, विकास गुप्ता, नीरज सोनी, अजय रस्तोगी, अनिल
गंगा सहित समस्त व्यापारियों ने केन्द्र सरकार के इस कदम का विरोध करते
हुये मुर्दाबाद के नारे लगाये।

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