उर्स पर कलकत्ता के जायरीन पहुंचे सूफी की दरगाह
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। देश-विदेश मे कौमी एकता की मिसाल कायम करने वाले सूफी संत हाजी
वारिस अली शाह के करीबी रहे संन्यासी हजरत हाजी सैय्यद शाह हशमत अली
वारसी शाह रहमत अल्लह के 13 मुबारक उर्स के मौके पर कलकत्ता से हजारो की
संख्या में जायरीनो ने दरगाह पहुंचकर जियारत की। सूफी संत के करीबी बताये
जाने वाले हशमत अली वारसी को अच्छे कार्याे एंव कौमी एकता के लिए सूफी
द्वारा पीला वस्त्र देकर संन्यासी का रुप दिया गया था। 13वें मुबारक उर्स
के मौके पर कलकत्ता एवं अन्य प्रान्तो से आये वारसी भाइयो द्वारा हर बार
उर्स के मौके पर दरगाह पहुंचकर जायरीनो में लंगर की व्यवस्था एवं कव्वाली
का भी आयोजन किया गया। बुधवार की सुबह से बृहस्पतिवार की देर शाम तक
वारसी भाईयों की ओर से उर्स मंे बात महफिल के जुलूस के साथ ऐराम और सूफी
की दरगाह पर चादर पेश की। पूरे इंतजाम के साथ दरगाह पर देश व प्रदेश के
अमन-चैन की दुआ भी मांगी। जियारत करने वालों में मुफिजुर रहमान वारसी,
हीरा वारसी, सैय्यद जैद अली वारसी, दिलावर अली वारसी, सैय्यद इशरत अली,
इफात अली, मेहर अली, किस्मत अली वारसी, इशरत अली वारसी, समेत कलकत्ता के
तमाम वारसी भाई जियारत को पहुंचे।

