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हजरत फ़ातिमा का किरदार महिलाओ के लिए नमूने अमल - मौलाना ज़मीर


अजमी रिज़वी
बाराबंकी। फातिमा जहरा की शहादत पर जिले में मजलिसों का सिलसिला जारी है।
शहर में तीन रोजा मजलिस में दूसरी मजलिस कर्बला सिविल लाइन में सम्पन्न
हुई। जिसको बनारस से आये जव्वादिया अरबी कालेज के प्रिंसिपल मौलाना सै.
जमीरुल हसन ने खिताब करते हुये कहा कि जुरअते हक़ बयानी पर पहरा मिल्लत
के सरमाये को फना कर देता है। उन्होने कहा अल्लाह की राह में वो दो जो
तुम्हे सबसे ज़ियादा पसंद हो । जौज़ा का मतलब है की वह अपने शौहर की दिल की
बात को समझें उसे मदद करे । आखिर में फ़ातिमा ज़हरा( स.अ.) के मसायब पढ़े जिसे
सुनकर मोमिनीन जारो कतार रोने लगे मजलिस से पूर्व कशिश संडीलवी ने पढ़ा -नहीं छोटा बड़ा कोई यहाँ पर सब बराबर है , कहा फ़िज़्ज़ा ने बस ऐसी अदालत फातिमा की है । मुज़फ्फर इमाम ने पढ़ा-जिनसे
नाराज़ हो गई बीबी उससे नाराज़ है ख़ुदा ज़हरा । सरवर अली रिज़वी ने पढ़ा-दीं वो
अल्लाह को हरगिज़ कभी भाया नहीं , चादरें ज़हरा का जिस इस्लाम पर साया नही ।
मजलिस का आगाज़ मौलाना अब्बास मेहँदी सदफ बराबंकवी ने किया। बानिए मजलिस
ने सभी का शुक्रिया अदा किया।

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