ओवैसी जैसों की जुबान में छिपा है जहरभुजा चाकू
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। एमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मेरा गर्दन पर
चाकू रख दो तो भी मैं भारत माता की जय नहीं बोलूंगा। जाहिर है कि यह उनकी
उस मानसिकता को दर्शाता है जिसमें गर्दन पर चाकू नहीं दिखता बल्कि मुंह
के अंदर छिपी जहरभुजी जुबान जरूर चाकू बनी नजर आती है।
इस समय देश में अभिव्यक्ति के नाम पर राष्ट्रीय भावना पर हमले करने का
फैशन चल पड़ा है। मशहूर होने के लिए लोग अथवा अपने आपको नेता बताने वाले
लोग कुछ भी बोल जाते हैं। पहले जाति पर राजनीति हुईं, सियासी महल बने,
फिर धर्म पर राजनीति हुई, तमाम के सत्ताई राजपाट पनपे, अभी जातिवाद व
धर्मवाद का दानव शान्ति नहीं हुआ था कि अब भारत माता की जय नहीं बोलूंगा
जैसे उवाच भी देश की फिजा में नजर आने लगे। एमआईएम के अध्यक्ष ओवैसी
पार्टी के अध्यक्ष भी हैं और सांसद भी हैं। वे भागवत के बयान पर कहते हैं
कि मेरी गर्दन पर चाकू रख दो फिर भी मैं भारत माता की जय नहीं बोलूंगा।
ओवैसी अब भागवत में भारत देखते हैं या फिर भारत में भागवत। यह तो वही
जाने लेकिन इस बयान में उनकी यह छटपटाहट जरूर नजर आती है जिसमें वे वोटों
के भूखें सौदागर से नजर आते हैं। उन्होंने देश के लिए क्या किया? अब तक
समाज के लिए क्या किया? इसका ब्यौरा तो आवाम को नहीं दे पाते हैं लेकिन
गाहे-बगाहे जब राजनीति की दुकान ठण्डी होती है तो उसे चमकाने के लिए गंदी
सियासत के गटर से निकलकर ऐसी चटर-पटर करते हैं कि मीडिया को उनके रूप में
एक मसाला मिल जाता है। यह वही ओवैसी हैं जिन्होंने पहले भी एक वर्ग के
खिलाफ धार्मिक टिप्पणियां की, समाज विरोधी बाते कहीं अब उनके दीदे देखिये
कि वह अपनी सियासत को चमकाने के लिए भारत माता की जय बोलने के मामले को
भी संविधान के दायरे में ले आये। वे बतायें कि उन्होंने अब तक कितना
संविधान का मान रखा। उन्होंने जैसे जहरभुजे जुबानी चाकुओं को चलाया क्या
वह संविधान में है? उन्हें समझना चाहिये कि भारत माता की जय बोलना एक तरह
से अपनी मात्र भूमि का सम्मान है। काश वह पाकिस्तान के शाहिद अफरीदी होते
तो अब तक उन्हें जावेद मियादाद जैसे लोग कोर्ट में घसीट ले जाते। वे
जेएनयू प्रकरण पर कुछ नहीं बोलते हमारे देश के सैनिक जब आतंकवादियों से
लोहा लेते शहीद होते हैं तो उनकी जुबान तालु में चिपकी रहती है। देश की
गरीबी उसके पिछड़ेपन पर चर्चा नहीं करते वे चर्चा करते हैं आरएसएस की हाफ
व फुल पैंट पर। जहां तक सवाल है गर्दन पर छूरी का तो यदि इस देश में ऐसी
कानून व्यवस्था अथवा इस मानसिकता के मजबूत इरादे वाले नेता होते तो शायद
ओवैसी जैसे लोग ऐसे बयान देने के लिए पैदा ही न होते। वैसे देश के कई
प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरूओं ने ओवैसी को आइना दिखाया है। सम्मानित
धर्मगुरूवों ने साफ कहा है कि मुल्क से बढ़कर कुछ नहीं है। फिर यदि हम
भारत मां की जय बोलने से हमारा कुछ छोटा बड़ा नहीं हो जाता। यह हमारे देश
का सम्मान है। सतहे विचारों की राजनीति से खुद को दूर रखना चाहिये।
स्पष्ट है कि ओवैसी का यह कदम चंद लोगों को भले ही भाया हो लेकिन देश की
मिट्टी को माथे का तिलक बनाने वाले देशभक्त मां भारतीय के लालों को यह
कतई रास नहीं आया। इस देश को न तो आरएसएस के मोहन भागवत चला रहे हैं और न
ही यह ओवैसी की मर्जी से चलेगा। मशहूर होने के अन्य भी तरीके हैं देश के
तमाम महापुरूष धर्म व जाति से परे हटकर आज आवाम के दिलों में राज करते
हैं। एमआईएम सांसद को पाक के जावेद मियादाद से सीखना चाहिए। जिन्हें
शाहिद अफरीदी का यह बयान अखड़ गया कि उन्हें पाकिस्तान से ज्यादा भारतीय
क्रिकेट प्रेमियों ने प्यार दिया है। ओवैसी अथवा उनके जैसे लोग अपने
गिरेहबान में झांके यदि उन्हें लड़ना है तो लड़ें देश की तमाम समस्याओं से,
कुरीतियों से, अशिक्षा से एवं मुल्क को खोकला करने वाली ताकतों से। जहां
तक सवाल है गर्दन पर चाकू रखने का तो यदि इसे रखकर किसी से भारत माता की
जय बुलवाया जाये तो यह एक देशभक्त के लिए अथवा एक राष्ट्र के लिए एक
असहनीय स्थिति ही होगी। क्योंकि अपने देश का चाहे जिन्दाबाद बोलना हो
अथवा चाहे उसकी जय, उसे हर राष्ट्रभक्त हृदय से बोलता है। सीमा पर अपनी
जान को जोखिम में डालकर रखवाली करने वाले जवान ऐसी बातों से विचलित नहीं
होते लेकिन कहीं न कहीं उन्हें ऐसे उवाच चुभते जरूर हैं। सियासतदानों के
चाल व चरित्र में गिरावट आई हैं। किसी नेता का बेटा शायद ही सीमा पर शहीद
हुआ हो। किसी जहरीली जुबान वाले सियासतदान का कोई अपना शायद दंगों में
मारा गया हो। दरअसल ऐसी स्थिति से अगर कोई जूझता है या अपना कुछ खोता है
तो वह है एक आम आदमी। नेता अपनी नेतागिरी करें लेकिन राष्ट्र को भारत
माता को इससे दूर रखें। क्योंकि सियासत के गटर से निकला जातिवाद व
धर्मवाद का गंदा कीड़ा वैसे ही अपनी जानलेवा बदबू देश में फैलाये हुए है।
ऐसे में ओवैसी के ऐसे बोल हमें खतरनाक रास्ते की ओर ले जाते हैं। खैर
शिवशेना हो या भाजपा अथवा देश का अपने आपको असली ठेकेदार मानने वाले कुछ
अन्य नेता जवाबी बयान जारी कर चुके हैं अथवा कर रहे हैं लेकिन इन सबके
बीच कुछ तथाकथित सेकुलर लीडर जरूर चुप्पी साधे हैं कुछ ने टिप्पणी की है
लेकिन बड़ी सधी हुई। ऐसे में ईश्वर ओवैसी जैसे लोगों को शदबुद्धि दे कि
देश में कम से कम राष्ट्रवाद के नाम पर राजनीति न हो। यहां अभिव्यक्ति की
स्वतंत्रता है लेकिन यदि कोई इसके चलते देश को ही निशाना बनाये तो इस पर
कड़ाई से रोक लगानी ही होगी। क्योंकि ओवैसी जैसे लोगों की गर्दन पर नहीं
बल्कि उनकी जुबान में छिपे हैं जहरभुजे चाकू?

